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अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति ने आंदोलन के दौरान दर्ज किए केस वापस लेने की मांग उठाई

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समित के पदाधिकारियों ने गुरुवार को डीसी के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 13, 2018, 02:05 AM IST

अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति ने आंदोलन के दौरान दर्ज किए केस वापस लेने की मांग उठाई
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समित के पदाधिकारियों ने गुरुवार को डीसी के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में बताया है कि फरवरी 2016 में रोहतक में हुए उपद्रव के दौरान रोहतक में कुछ असामाजिक तत्वों ने जातिगत भाइचारे को तोड़ने के लिए हिंसक घटनाएं कीं। इसमें हरियाणा के 30 लोगों की जानें गई थीं। आंदोलन के बाद अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के साथ तीन बार समझौता हुआ। ये समझौते 22 फरवरी 2016, 19 मार्च 2016 व फरवरी 2018 में हुए। इसके बाद हरियाणा भवन नई दिल्ली में भी केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह व सीएम मनोहर लाल के साथ भी समझौता हुआ, जिसमें मुख्य रूप से हाईकोर्ट में विचाराधीन जाट आरक्षण बिल पर सरकार जल्द फैसला कराए, हरियाणा आरक्षण बिल पर सरकार जल्द फैसला कराए व हरियाणा में आरक्षण लागू करें। इसके अलावा सभी राज्यों में जाटों के लिए आरक्षण लागू किया जाए।

गुड़गांव. तहसीलदार को ज्ञापन देते अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति सदस्य।

ये रखी मांगें:समिति ने ज्ञापन में मांग की है कि आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी व सम्मान मिले। जिन युवकों पर उस दौरान केस दर्ज किए गए थे, उन्हें वापस लिया जाए। ज्ञापन में आरोप है कि प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने की बजाय केस पर स्टे होने दिया। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि वे अपने विवेक से जाटों के साथ सरकार द्वारा किए जा रहे अन्याय को रोकें। इस दौरान सतबीर सिंह सिंधू, प्रोफेसर श्याम सिंह, कमांडेंट सतबीर सिंह व कल्याण सिंह संधू आदि सहित समुदाय के कई लोग मौजूद रहे।

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