Hindi News »Haryana »Gurgaon» स्किल पासबुक कैचअप और एलईपी को लेकर स्कूलों के टीचर नहीं गंभीर

स्किल पासबुक कैचअप और एलईपी को लेकर स्कूलों के टीचर नहीं गंभीर

शिक्षा विभाग पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों को एक स्तर के कॉम्पिटेंसी पर लाने के लिए स्किल पासबुक कैचअप प्रोग्राम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 28, 2018, 02:10 AM IST

स्किल पासबुक कैचअप और एलईपी को लेकर स्कूलों के टीचर नहीं गंभीर
शिक्षा विभाग पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों को एक स्तर के कॉम्पिटेंसी पर लाने के लिए स्किल पासबुक कैचअप प्रोग्राम चला रहा है, पर इसे लेकर कई स्कूलों के टीचर गंभीर नहीं है। टीचर्स ने बच्चों के आंकलन में भी लापरवाही बरती और एलईपी भी सही तरीके से लागू नहीं की जा रही। ऐसे में सरकार की सभी बच्चों को एक शैक्षिक स्तर पर लगाने की मुहिम को झटका लग सकता है।

अप्रैल से शुरू हुए शिक्षा सत्र में पहली से आठवीं के बच्चों के लिए स्किल पासबुक कैचअप प्रोग्राम के तहत छह सप्ताह तक कॉम्पिटेंसी सुधार कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पहली बार विशेष तौर से कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को एलईपी के तहत पूरे दिन कॉम्पिटेंसी आधारित पढ़ाई कराई जा रही है। इस दौरान दो-दो घंटे हिंदी, अंग्रेजी, गणित व ईवीएस को लेकर गतिविधि करने का प्रावधान है, ताकि पढ़ाई शुरू होने से पहले बच्चे को पीछे के कोर्स में किसी प्रकार की उलझन ना रहे। गौरतलब है कि विभिन्न सर्वेक्षण रिपोर्ट में बच्चों की कॉम्पिटेंसी स्तर में कमी पाई गई है। इसे देखते हुए विभाग ने स्किल पासबुक कैचअप प्रोग्राम के तहत पहली से पांचवीं के बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने का फैसला लिया है। दूसरी ओर विभाग ने मिडिल स्तर में एक मई से नियमित पढ़ाई कराने का फैसला लिया है।

आकलन में भी लापरवाही बरती

योजना के तहत पहले टीचर्स को बच्चों के शैक्षिक स्तर का आकलन कर स्किल पासबुक में नोट करना था। कई स्कूलों ने ग्रुप में ही बच्चों से प्रश्न पूछकर स्किल पासबुक में भर लिया। बच्चों का आंकलन करने के बजाय खानापूर्ति की गई। जब बच्चे के लर्निंग लेवल का सही पता नहीं होगा तो उसे क्या आगे की जानकारी दी जाएगी।

एलईपी में भी लापरवाही

विभाग की योजना अनुसार बच्चे के शैक्षिक आंकलन में जो कमियां मिलीं, इसी को एलईपी के जरिए दूर करना है। कई स्कूलों में टीचर्स ने एलईपी कराने के बजाय किताब से पढ़ाना शुरू कर दिया, जो गलत है। एलईपी के तहत बच्चों को विषय वस्तु को करके बताना होता है, जिससे उसे पूरे विषय की समझ हो सके।

एक टीचर के जिम्मे दो क्लास

कई स्कूलों में टीचरों की कमी है। ऐसे में जो टीचर पहली कक्षा में हेड था, वो दूसरी कक्षा में भी हेड है। ऐसे में वह बच्चे का आंकलन सही तरीके से नहीं कर सकता, क्योंकि टीचर को पहले से बच्चे के बारे जानकारी है। ऐसे में एक टीचर को लगातार दो क्लास की जिम्मेदारी नहीं मिलनी चाहिए।

यह है शेड्यूल :विभाग ने छह सप्ताह तक प्राइमरी स्तर पर पढ़ाई के लिए दिन और समय तय कर दिया है। इसमें पहली से दूसरी तक गणित, अंग्रेजी व हिंदी पर ध्यान दिया जाएगा। सोमवार व मंगलवार को पहले दो घंटे गणित, दूसरे दो घंटे अंग्रेजी की पढ़ाई होगी। तीसरे सेशन में दो घंटे हिंदी की पढ़ाई होगी। बुधवार व गुरुवार को पहले अंग्रेजी, हिंदी व गणित की पढ़ाई कराई जाएगी। शुक्रवार व शनिवार को हिंदी,गणित व अंग्रेजी है। तीसरी से पांचवीं में ईवीएस को शामिल किया गया है।

ये है कॉम्पिटेंसी स्तर

L -2 यानि अपने क्लास के स्तर का

L- 1-अपनी क्लास से एक कक्षा पीछे

L- 0 में अपनी क्लास से दो कक्षा पीछे।

नहीं हो रहा सही मूल्यांकन

स्किल पासबुक के तहत एक टीचर को एक क्लास का हेड बनाना चाहिए। जिससे की बच्चों का स्किल का सही मूल्यांकन कर सके। कई स्कूलों में टीचरों की कमी है। ऐसे में योजना को लागू करने में कठिनाई हो रही है। टीचर स्किल पासबुक प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर है। -अशोक कुमार, महासचिव,राजकीय अध्यापक संघ

प्रोग्राम को लेकर गंभीर शिक्षक

अधिकांश स्कूल स्किल पासबुक कैचअप को लेकर गंभीरता से काम कर रहे हैं। एलईपी के तहत बच्चों के शैक्षिक को सुधार किया जा रहा है। दूसरा इससे बच्चे में पढ़ाई का प्रेशर नहीं है। टीचर एलईपी के जरिए इसकी कमियों को दूर कर रहे हैं। -सुशील कुमार पचगांव, पूर्व ब्लॉक प्रधान अध्यापक संघ

रिजल्ट अच्छा नहीं मिल रहा है

विभाग ने स्किल पासबुक कार्यक्रम को 14 मई तक घटाकर 30 अप्रैल तक कर दिया है। इसका रिजल्ट अच्छा नहीं मिल रहा है। इस पर सरकार ने यह फैसला लिया है। एलईपी व स्किल पासबुक के लिए एक क्लास एक टीचर होना चाहिए। -दुष्यंत ठाकरान,जिला प्रधान,प्राथमिक शिक्षक संघ

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Gurgaon

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×