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सुकृति के वार्षिकोत्सव में प्रसिद्ध कवियों ने बांधा समा

गुड़गांव. सुकृति सोशल एंड कल्चरल क्लब के वार्षिकोत्सव द्वारा आयोजित कवि गोष्ठी में भाग लेते कवि। भास्कर न्यूज |...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 02:10 AM IST
गुड़गांव. सुकृति सोशल एंड कल्चरल क्लब के वार्षिकोत्सव द्वारा आयोजित कवि गोष्ठी में भाग लेते कवि।

भास्कर न्यूज | गुड़गांव

सुकृति सोशल एंड कल्चरल क्लब के वार्षिकोत्सव में कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में गुड़गांव व दिल्ली के जानेमाने कवियों व गीतकारों ने प्रस्तुति दी। क्लब की प्रेसिडेंट डॉ. नलिनी भार्गव ने मंच का संचालन करते हुए कहा कि मां जब मैं उदास होती हूं, आज भी तुम्हारी गोद याद आती है। तुम होती हो तब पास मेरे, फिर किसी और की चाह नहीं होती है। दिल्ली से आए शायरा उर्मिला माधव ने अपनी शायरी में ज़िंदगी की विशेषताओं को दर्शाया। उन्होंने कहा कि ज़िंदगी के रास्ते में, सब इधर-उधर गए, आस-पास चल रहे थे, वो किधर गए। जलज़लों की धार से, न बच सका कोई कहीं, साथ वाले क़ाफ़िले, सब बिखर-बिखर गए। गुड़गांव की कवियत्री वीणा अग्रवाल ने कहा कि न इकरार करती हूं, न इंकार करती हूं, ऐ ज़िंदगी मैं तुझसे सिर्फ़ प्यार करती हूं। जो भी मिला, जब मिला, जहां मिला, मैं हर जगह ख़ुशी का इज़हार करती हूं।

इस अवसर पर प्रसिद्ध कवि विमलेंदु सागर ने अपनी कविताओं में मां की गरिमा को उजागर किया। कवि व कहानीकार नरेंद्र गौड़ ने अपनी कविता में ह्रदय की मार्मिक दशा का प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शायर व कवि राजेन्द्र राज, क्लब की अध्यक्षा प्रवेश भीकन ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में सचिव रति अरोड़ा, खजांची कीर्ति श्रीवास्तव, पूर्व अधयक्षा पुष्पा सचदेव, पूर्व अध्यक्षा रमा हांडा, पूर्व अध्यक्षा रानी आहूजा मौजूद थी।