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िजले के 97245 बच्चे हेल्दी, 12 हजार वीक जबकि 238 मिले कुपोषित

महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 1033 आंगनवाड़ी सेंटरों पर 0 से छह साल के बच्चाें काे पौष्टिक आहार देने के साथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 16, 2018, 03:10 AM IST

िजले के 97245 बच्चे हेल्दी, 12 हजार वीक जबकि 238 मिले कुपोषित
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 1033 आंगनवाड़ी सेंटरों पर 0 से छह साल के बच्चाें काे पौष्टिक आहार देने के साथ ही उनकी हेल्थ जांच की जाती है। जिसमें पाया गया है कि जिले में 94.77 फीसदी बच्चों का हेल्थ नार्मल है। 11.70 प्रतिशत बच्चे कमजोर व 0.28 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। जिनमें लड़कियों की संख्या अधिक है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के सर्वे के अनुसार जिले में एक लाख, 13 हजार 510 बच्चे हैं। इनमें से एक लाख, 2 हजार, 609 बच्चों का विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में मार्च में उनका वजन किया गया था। जिसमें सामने आया कि 94.77 प्रतिशत यानी 97245 बच्चों का वजन सामान्य है। 11.70 प्रतिशत यानि 12,010 बच्चे कमजोर हैं, जिनका वजन उनकी आयु के हिसाब से कम है। 283 बच्चे कुपोषित (0.28 फीसदी) हैं। जिनमें 144 बेटियां हैं और 139 बेटे हैं। गुड़गांव अर्बन में 63 बच्चे कुपोषित हैं। यदि अभिभावकों ने बच्चों की डाइट पर ध्यान नहीं दिया तो इन कुपोषित बच्चों की हालत खराब हो सकती है। ऐसे में चावल, घी, तेल सहित वे खाद्य सामग्री अधिक खिलाएं, जिनमें फैट हो। दूसरी ओर आंगनवाड़ी सेंटरों पर बच्चों को भी पौष्टिक आहार दिया जाता है। जिसमें दलिया, आलू-पूरी, मीठा चावल, गुलगुले, पराठा व नमकीन चावल शामिल है। न्यूट्रीशियन डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि कमजोर बच्चों दिन में पांच टाइम भोजन देना चाहिए। बच्चे को सुबह भोजन दें, फिर लंच से पहले, फिर लंच के समय, शाम को और फिर रात को भोजन दें। भरपूर भोजन मिलने के कारण ही बच्चे का वजन नहीं बढ़ता।

ऐसे होती है पहचान

आंगनवाड़ी सेंटरों पर लड़के व लड़कियों का वजन किया जाता है। जैसे 1 साल की बच्ची में नॉर्मल-7 किलोग्राम या इससे ऊपर, कमजोर- 6.200 -7 किलोग्राम के बीच व कुपोषित- 6.200 किलोग्राम से नीचे हाेता है। लड़के- एक साल के बच्चे में नार्मल-7.700 किलोग्राम या इससे ऊपर, कमजोर- 7- 7.700 किलोग्राम के बीच व कुपोषित- 7 किलोग्राम से नीचे हाेता है। इसी प्रकार हर अायु वर्ग इसी प्रकार वेट निर्धारित है। उसी आधार पर उनका हेल्थ तय होता है।

रिपोर्ट से खुलासा

महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 1033 आंगनबाड़ी सेंटरों पर 0 से छह साल के बच्चाें काे पौष्टिक आहार देने के साथ ही उनकी हेल्थ जांच की जाती है।

0 से छह साल के बच्चों की मार्च की रिपोर्ट

सेंटर वजन किया सामान्य कमजोर कुपोषण

गुड़गांव (R) 13,464 11.802 1631 31

सोहना 21,277 18,250 2965 62

पटौदी 18,733 17,248 1425 60

फर्रुखनगर 6807 13304 1052 37

गुड़गांव यू-1 25375 22300 2354 63

गुड़गांव यू-2 16953 14314 2583 29

योग 102609 97245 12010 283

गुड़गांव. वजीराबाद स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बैठे बच्चे। फाइल फोटो

10,2609 बच्चों का हुआ वजन

जिले में 57575 लड़के व 51963 लड़कियां का आंगनबाड़ी केंद्र में वजन किया गया। इसमें 51437 लड़के 45808 लड़कियां नार्मल हैं।5999 लड़के और 6011 लड़कियां कमजोर हैं, जो कम कुपोषित की श्रेणी में आती हैं। इसकी तरह 139 लड़के व 144 लड़कियां कुपोषित हैं जो लड़कों से अधिक हैं। इन आंकड़ों से साबित होता है कि अभिभावक बेटियों की सेहत की ओर ध्यान कम दिया जा रहा है।

जिले में कमजोर व कुपोषित बच्चों के हेल्थ पर आंगनबाड़ी वर्करों को अधिक ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। इन बच्चों के अभिभावकों को जागरूक करने को कहा गया है। इसके साथ ही सेंटर पर भी ऐसे बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। गुड़गांव जिले में माइग्रेट पापुलेशन के कारण कुछ बच्चे कुपोषित है। सुनैना,जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी

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