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कविता सहज ही कवि के मन में जन्म लेती है

शहर की युवा कवियित्री ज्योत्सना कलकल की नई पुस्तक- जिंदगी जरा आसान रहने दो, का एससीईआरटी भवन के निर्णय सभागार में...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 03:15 AM IST
शहर की युवा कवियित्री ज्योत्सना कलकल की नई पुस्तक- जिंदगी जरा आसान रहने दो, का एससीईआरटी भवन के निर्णय सभागार में रविवार शाम विमोचन हुआ। अध्यक्षता हरियाणा साहित्य अकादमी एवं हरियाणा ग्रंथ अकादमी की पूर्व निदेशक डॉ. मुक्ता ने की। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कवियित्री रेणु हुसैन रहीं। कविता संग्रह की समीक्षा साहित्यकार घमंडी लाल अग्रवाल और डॉ. कृष्ण लता यादव ने की। मुख्य अतिथि रेणु हुसैन ने कहा कि कविता सहज और सरल रूप में कवि के मन में जन्म लेती है। इसलिए बिना किसी रोक टोक बस लिखते रहिए। समीक्षक कृष्णलता यादव, डॉ. दिनेश शास्त्री ने भी अपने विचार रखे। विशेष आमंत्रित अतिथि नरेंद्र गौड़ तथा ओम प्रकाश कादियान ने पुस्तक तथा कवियित्री दोनों का भविष्य उज्ज्वल बताया। संचालन युवा कवि अभिषेक गौड़ ने किया। समारोह का आरंभ वीणा अग्रवाल की सरस्वती वंदना से हुआ। ज्योत्सना ने पुस्तक के विषय में बताया कि इसमें अधिकतर कविताएं मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों को ध्यान में रखकर लिखी गई हैं। उन्होंने अपनी लेखन कला का सार देते हुए कहा कि जिंदगी की कुछ लाजवाब उलझनों का मरहम कविता है। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश शास्त्री, बाल साहित्यकार डॉ. मधु पंत और सुरेश वशिष्ठ मौजूद रहे।

ज्योत्सना कलकल की पुस्तक ‘जिंदगी जरा आसान रहने दो’ का विमोचन, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रेणु हुसैन ने कहा...

गुड़गांव. एससीईआरटी भवन के निर्णय सभागार में युवा कवियित्री ज्योत्सना कलकल की नव प्रकाशित पुस्तक- जिंदगी जरा आसान रहने दो का विमोचन करतीं हरियाणा साहित्य अकादमी एवं हरियाणा ग्रंथ अकादमी की पूर्व निदेशक डॉ. मुक्ता।