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5 गांवों के किसान पैसे लेकर जमीन वापस मांगने सिंचाई विभाग पहुंचने लगे, बाकी विरोध में

प्रदेश की सियासत में नया मोड़ लाने वाली दादूपुर नलवी नहर अब किसानों में भी आपस में मनमुटाव पैदा कर रही है।

Bhaskar news | Last Modified - Nov 17, 2017, 05:26 AM IST

5 गांवों के किसान पैसे लेकर जमीन वापस मांगने सिंचाई विभाग पहुंचने लगे, बाकी विरोध में

यमुनानगर. प्रदेश की सियासत में नया मोड़ लाने वाली दादूपुर नलवी नहर अब किसानों में भी आपस में मनमुटाव पैदा कर रही है। 20 गांवों से अधिग्रहित की गई इस जमीन को 5 गांव वापस मांग रहे हैं। इसके लिए वह बाकायदे पैसे लेकर सिंचाई विभाग के चक्कर काट रहे हैं। जबकि बाकी गांवों के किसान जमीन नहीं मुआवजा ही चाहते हैं वह, सिंचाई विभाग से अधिसूचना की कॉपी चाहते हैं ताकि कोर्ट में जाकर अदालत की अवमानना की याचिका दायर कर सकें। 27 सितंबर यानी 50 दिन पहले कैबिनेट की मीटिंग में सरकार ने नहर को डिनोटिफाइड करने का फैसला ले लिया। फैसले पर दो धड़ों में बंटे किसान अब सिंचाई विभाग पर भी नाराजगी जता रहे हैं।

उनका कहना है कि सरकार इस मसले को राजनीतिक बना रही है। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारी किसानों से न तो पैसे ले पा रहे हैं और न ही उन्हें दस्तावेज दे पा रहे हैं। सिंचाई विभाग के एसई एसडी शर्मा का कहना है कैबिनेट ने दादुपर नहर को डिनोटिफाइड करने का फैसला लिया है। अभी तक विभाग के पास सिर्फ ये ही सूचना है। पता लगा है कि दस्तावेज सरकार के लीगल सेल में हैं। सेल से आने के बाद ही वे इस बारे में किसानों को कुछ बता सकते हैं। बिना दस्तावेज व लिखित आर्डर के बिना पैसे कैसे ले सकते हैं।

दो शिफ्टों में जमीन हुई है अधिग्रहण
1987 में भटौली, तेलीपुरा, भूखड़ी, मधुवाला समेत 5 गांव की 190 एकड़ जमीन एक लाख 70 हजार से दो लाख तक के प्रति एकड़ मुआवजे पर अधिग्रहित हुई। अब यहां कलेक्टर रेट 50 लाख रुपए प्रति एकड़ है। प्राइवेट रेट 1 करोड़ तक है। इसलिए किसान जमीन वापस लेने में अड़े हुए हैं।

ये किसान गए पैसे लेकर अधिकारियों के पास
किसान राजेश कांबोज ने बताया कि उनकी तीन एकड़ जमीन एक्वायर हुई थी। उस समय छह लाख रुपए मिले थे। अब हम डिनोटिफाई होने के बाद सिंचाई विभाग के आॅफिस पैसे लेकर जाते हैं पर कोई जमीन देने को तैयार नहीं है। राजबीर सिंह का कहना है कि उनकी पांच एकड़ जमीन गई थी। उन्हें पौने दो लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा मिला था। अगर जमीन मिल जाती है तो उनका एक एकड़ एक करोड़ से भी अधिक में बिकेगा।

इनको दस्तावेज चाहिए कोर्ट में जाने के लिए
धरने पर बैठे किसान अर्जुन सुढैल, राजेश दहिया व कश्मीर सिंह का कहना है कि सरकार के खिलाफ उन्हें कोर्ट में केस डालना है। एडवोकेट ने नोटिफिकेशन के दस्तावेज मांगे हैं। दस्तावेजों के लिए वे एसडीओ से लेकर एसई तक से मिल चुके हैं। हर कोई ये कहता है कि अभी तक कोई दस्तावेज नहीं है।

इधर, सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन, सीएम का पुतला भी फूंका

85 दिनों से अनाज मंडी गेट पर धरना दे रहे किसान वीरवार को उग्र हो गए। भाकियू रतनमान गुट का समर्थन मिलते ही गुस्साए किसानों ने लघु सचिवालय के सामने जाम लगा दिया। इस दौरान जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई। किसान हाईवे पर ही सीएम का पुतला लेकर बैठ गए। हाइवे पर जाम की सूचना मिलते ही सिटी जगाधरी थाना प्रभारी राकेश कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे। इस दौरान किसानों की उनसे नोकझोंक भी हुई। किसानों ने सीएम का पुतला फूंका, इसके बाद ही जाम खुल सका। दोपहर बाद किसानों को समर्थन देने मेयर व सात पार्षद भी पहुंचे।

वीरवार को भाकियू रतनमान गुट भी किसानों को समर्थन देने पहुंचे। भाकियू के प्रदेश महासचिव विजय मेहता, उपाध्यक्ष प्रदीप नगला, जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर, कुरुक्षेत्र जिलाध्यक्ष मैनपाल, सीटू नंबरदार, सतपाल, सुदेश, रमेश ढिल्लो, सुभाष चमरोडी, पवन गोयल, रामपाल, रघुवीर, रोशन लाल, गुरदयाल, बलिंद्र दामला आदि कार्यकर्ताओं के साथ किसानों के बीच पहुंचे। विजय मेहता ने कहा कि वाटर लेवल गिर रहा है और सरकार नहर बंद कर रही है। इससे भाजपा की किसान विरोधी होने का सबूत मिलता है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने खोदने में पैसा खाया, अब नहर को बंद करने में सरकारें पैसा खाएंगी। किसान का भला कोई भी सरकार नहीं सोच रही है।

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Web Title: 5 gaaanvon ke kisaan paise lekar jmin vaaps magne sinchaaee vibhaaga phunchne lgae, baaki virodh mein
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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