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4 पीढ़ियां एक छत के नीचे खाती हैं एक ही चूल्हे का खाना, हर काम में लेते हैं इनकी सलाह

बहल के एक परिवार में चार पीढ़ियां एक साथ एक ही छत के नीचे व एक ही चूल्हे का खाना खाते हैं।

भगत सिंह कस्वां | Last Modified - Dec 04, 2017, 05:23 AM IST

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    बहल.आधुनिक युग के मौजूदा सामाजिक ताने-बाने में जहां एकल परिवार की प्रथा चल रही है, वहीं बहल के एक परिवार में चार पीढ़ियां एक साथ एक ही छत के नीचे व एक ही चूल्हे का खाना खाते हैं। परिवार के सदस्यों का प्यार क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। बहल निवासी रेशमा देवी गोस्वामी का परिवार भाईचारे के लिए प्रेरणा बना हुआ है जिसके 37 सदस्य आपस में प्यार व स्नेह से एक ही घर में रह रहे हैं। 92 वर्षीय रेशमा देवी के चार बेटे और दो बेटियां हैं। बेटियां अपनी-अपनी ससुराल में रह रही हैं। चारों बेटों हनुमान, जिले सिंह, हरिसिंह व संजय स्पोर्ट्स वियर का कार्य कर रहे हैं। बेटे एक ही जगह कार्य कर रहे हैं। परिवार में इनके अतिरिक्त चार पुत्रवधु, आठ पौत्र, आठ पौत्रियां, चार पौत्रवधु, तीन पड़पौत्र एक पड़पौत्री हैं। इसके अतिरिक्त चार रिश्तेदार भी रेशमा देवी के घर में रह रहे हैं। घर की महिलाएं खेतीबाड़ी और पशुधन पालन का कार्य सामूहिक रूप से कर रही हैं। हर महिला हर कार्य में एक दूसरे का सहयोग कर रही है। परिवार के तीन सदस्य भारतीय सेना में कार्यरत हैं।

    हर काम में परिवार वाले लेते हैं रेशमा देवी की सलाह

    इस घर के सदस्यों की विशेषता यह है कि छोटे से छोटे कार्य में घर की मुखिया रेशमा देवी की सलाह ली जाती है। बिना सलाह कोई भी कार्य नहीं किया जाता। रेशमा देवी के 40 वर्षीय पुत्र संजय ने बताया कि भगवान की कृपा है कि हमारे घर में हम भाइयों व घर की बहुओं के बीच कभी कोई विवाद नहीं हुआ है। यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे परिवार में जितनी भी बहु आई हैं उनका भी आचार व व्यवहार भी बहुत अच्छा है जिसके चलते आज परिवार एक ही छत के नीचे रह रहा है।

    प्रेरणा व चर्चा का विषय है परिवार
    जब संयुक्त परिवारों की बात चलती है तो रेशमा देवी के परिवार की बात अनायास ही चल पड़ती है। हर कोई व्यक्ति इस परिवार के प्रेम व व्यवहार से पूरी तरह प्रभावित बना हुआ है। बात चाहे घर की हो या बिजनेस की या फिर समाज की इस परिवार की एकजुटता देखकर लोग इनकी मिसाल देते हैं कि परिवार हो तो ऐसा। रेशमा देवी के पति श्योचंद गिरि की वर्ष 2004 में मौत हो गई थी। रेशमा देवी का कहना है कि कभी कभार में घर में कुछ खटपट होती है तो वह तुरंत मामले को जानकर बहुओं आदि को समझा देती है तथा उन्हें खुशी होती है कि उनकी बहुएं उसी समय उनका सम्मान करते हुए बात को भुला देती है।

    एक समय का खाना बनाने में लगते हैं चार घंटे
    - परिवार के सदस्यों की संख्या को देखते हुए एक समय का खाना बनाने में दो महिलाओं को तीन से चार घंटे का समय लगता है।

    - पहले स्कूल जाने वाले बच्चों का नाश्ता तो बाद में घर के अन्य सदस्यों के लिए खाना तैयार किया जाता है। सभी महिलाएं एक दूसरे के सहयोग से काम को बिना किसी मनमुटाव के पूरा करती हैं।

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