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7 हजार साल पुरानी मानव बस्ती और कंकालों की होगी तलाश, आर्कियोलॉजी विभाग ने दी खुदाई की अनुमति

6 हजार साल पुरानी कब्रिस्तान की तलाश के लिए डिर्पाटमेंट ऑफ आर्कियोलॉजी नई दिल्ली ने खुदाई की अनुमति दे दी है।

Dainik Bhaskar

Dec 29, 2017, 07:20 AM IST
7 thousand years old human  skeletons will be explored in kunal village

रतिया। गांव कुनाल में 6 हजार साल पुरानी कब्रिस्तान की तलाश के लिए डिर्पाटमेंट ऑफ आर्कियोलॉजी नई दिल्ली ने खुदाई की अनुमति दे दी है। इसको लेकर सितंबर में पुरातत्व विभाग हरियाणा, आर्कियोलॉजी एवं म्यूजियम डिपार्टमेंट राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली ने आर्कियोलॉजी विभाग से अनुमति मांगी थी। तीनों विभागों की संयुक्त एजेंसी का कहना था कि गांव कुनाल में छह हजार साल पुराने कब्रिस्तान को तलाशने के लिए खुदाई की जरूरत है और वहां पर कंकाल भी तलाशने हैं। विभाग की अनुमति मिलने के बाद एजेंसियों ने खुदाई का खाका तैयार कर लिया है। खुदाई का काम 19 जनवरी से शुरू होगा, जोकि मई तक चलेगा।

3 एजेंसियां 19 जनवरी से कुनाल के खनन शिविर में करेंगी खुदाई
पुरातत्व विभाग हरियाणा के आर्कियोलॉजीस्ट एवं कैंप इंचार्ज एसएस चालिया ने बताया कि अगले साल खुदाई के लिए एजेंसियों को अनुमति मिल चुकी है। खुदाई का काम 19 जनवरी से शुरू होगा। इस बार खुदाई में कब्रिस्तान कंकालों को तलाशना है। खुदाई कार्य में हरियाणा, चंडीगढ़ दिल्ली की टीमें शामिल होंगी।
यहां पर अब तक खुदाई के दौरान 24 कैरेट सोने का हार, चांदी का मुकुट ऐसे आभूषण मिल चुके हैं, जो हरियाणा से नहीं हैं। इससे साफ जाहिर है कि यहां पर हड़प्पाकालीन प्री हड़प्पाकालीन समय के अवशेष हैं। कुनाल में उत्खनन शिविर की कुल 5 एकड़ जमीन है। यहां पर इसी साल आभूषण पिघालने की भट्ठी भी मिली थी।

इस साल भी मिल चुकी है गहने पिघलाने की भट्ठियां

गांव कुनाल में करीब 7 हजार साल पुरानी मानव बस्ती मानी गई है। अब तक 6 हजार साल पुराने अवशेष मिल चुके हैं। इस साल भी हरियाणा, चंडीगढ़ नई दिल्ली की टीमों ने कुनाल के उत्खनन शिविर में खुदाई की थी। खुदाई का काम साल 1984 से चल रहा है। यहां पर हड़प्पाकालीन प्री हड़प्पाकालीन सभ्यता के अवशेष मिल चुके हैं, जोकि करीब 6 हजार साल पुरानी सभ्यता है। खुदाई को लेकर हर साल एजेंसियों द्वारा आर्कियोलॉजी विभाग से खुदाई की अनुमति मांगी जाती है। इस साल भी तीन सरकारी एजेंसियों ने कुनाल में कब्रिस्तान कंकालों की तलाश की अनुमति मांगी थी, जिसे विभाग ने स्वीकार कर लिया। एजेंसियों का तर्क था कि यहां पर अब तक 6 हजार साल पुरानी मानव बस्तियां मिल चुकी हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां पर 7 हजार साल पुराने अवशेष मिल सकते हैं। मानव बस्ती यहां सरस्वती नदी के किनारे थी। सरस्वती नदी के भी अवशेष मिले हैं।

आबादी होने के कारण लोगों की मौत भी स्वाभाविक है। ऐसे में काफी लोग मृतकों को जमीन में दफनाते थे। उन लोगों का अलग से कब्रिस्तान होगा। कब्रिस्तान की खुदाई से प्री हड़प्पाकालीन उससे पहले की सभ्यता के लोगों के मुर्दों को जमीन में दबाने के तौर तरीके, उनके साथ रखी जाने वाली वस्तुएं, उनका कद, शारीरिक बनावट अन्य अवशेष भी मिल सकते हैं। इसके लिए उत्खनन शिविर में खुदाई के साथ साथ आसपास के क्षेत्र की भी फेंसिंग की जाएगी। खुदाई जमीन में करीब 20 फुट गहरी की जाएगी। इस बार खुदाई का मुख्य मकसद 6 हजार साल पुराने कब्रिस्तान कंकालों को तलाशना है। इसके लिए सर्वे टीमें उत्खनन शिविर में अलग से पोर्टरी यार्ड बॉक्स बनाएगी। वहां से मिलने वाले अवशेषों को उक्त पोर्टरी यार्डों में ही सुरक्षित रखा जाएगा। विभाग द्वारा उत्तरी भारत में नवंबर से मई तक ही खुदाई का काम करता है। यहां पर खुदाई के लिए जनवरी का महीना तय किया गया है।

19 जनवरी से शुरू होगा खुदाई का काम: इंचार्ज
पहले खुदाई का काम करने के लिए एक जनवरी का दिन तय किया गया था, लेकिन सिरसा में थेहड़ पर कब्जे हटाने के कारण उक्त एजेंसियां टीमें वहां व्यस्त हैं। इसी कारण खुदाई का काम 19 दिन की देरी से होगा। अब खुदाई 19 जनवरी के बाद की जाएगी।

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