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पीड़िताें के लिए एक बेटी ने लड़ी कानूनी लड़ाई, 550 तारीखों से दिलाया इलाज, 57 कराेड़ रुपये मुआवजा

पीड़ितों के मुआवजे और इलाज के लिए कानूनी लड़ाई जारी है और इस लड़ाई को शहर की ही एक बेटी लड़ रही है।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 23, 2017, 07:45 AM IST

पीड़िताें के लिए एक बेटी ने लड़ी कानूनी लड़ाई, 550 तारीखों से दिलाया इलाज, 57 कराेड़ रुपये मुआवजा

डबवाली. आज डबवाली अग्निकांड की 22वीं बरसी है। दो दशकों के बाद भी पीड़ितों के मुआवजे और इलाज के लिए कानूनी लड़ाई जारी है और इस लड़ाई को शहर की ही एक बेटी लड़ रही है। उसने पीड़ितों के लिए 57 करोड़ के मुआवजे की घोषणा कराई। कानून की इस लड़ाई में अहम किरदार निभाने वाली एडवोकेट बेटी अंजूबाला ने हादसे में अपना भतीजा खोया था। वर्ष 1995 में 23 दिसंबर को देश का भीषण अग्निकांड हुआ। हादसे में स्कूली बच्चों सहित 442 लोगों की जान गई जबकि सैकडों लोग आज भी उपचार ले रहे हैं। चंडीगढ़ में रहने वाली अंजूबाला ने लोकल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। इस दौरान बदली 5 सरकारों ने कोर्ट के आदेश भी पूरे नहीं माने। आज भी मुआवजे के ब्याज के बकाए करीब 4 करोड़ रुपये के लिए लड़ाई जारी है। पूरे इलाज और पुनर्वास के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पूर्ण पालना आज तक नहीं हुई है। एडवोकेट अंजूबाला न्याय के लिए पैरवी कर रही हैं।


एडवोकेट अंजूबाला पत्नी सर्व इंद्र मोहन बताती हैं कि मैं उन दिनों चंडीगढ़ हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रही थी। इसी बीच 23 दिसंबर 1995 को डीएवी स्कूल के 7वें वार्षिकोत्सव में भीषण अग्निकांड हुआ। इसमें 222 विद्यार्थी और 26 नौनिहाल तथा 150 महिलाएं 44 पुरुष सहित कुल 442 लोगों की जलकर मौत हो गई। 196 लोग घायल हुए। इस अग्निकांड में मेरे भाई जतिंद्र का 4 साल का बेटा रजत दावानल का ग्रास बन गया जबकि दूसरा भतीजे महज ढाई साल के बॉबी का चेहरा झुलस गया। सरकार बदली तो पीड़ित मुआवजे और इलाज के लिए भटकने लगे। अगस्त 1996 में हाईकोर्ट में रिट दायर की। कोर्ट से सरकार द्वारा निशुल्क इलाज, शिक्षा और डीएवी की ओर से अनाथ बच्चों को अडॉप्ट करने की मांग की। हाईकोर्ट ने तुरंत पीड़ितों के इलाज का भुगतान करने का आदेश दिया। बस इसी के साथ कानूनी लड़ाई शुरू हो गई थी। घायलों में से 53 का इलाज आज 23वें साल भी जारी है। इन मरीजों को विश्वस्तरीय सर्जरी सुविधाओं इलाज की जरूरत है लेकिन सरकार इस पर सुध नहीं ले रही है। हालांकि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पीड़ितों को कुल 57 करोड़ 5 लाख 11 हजार रुपये मुआवजा मिला है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट स्थानीय कोर्ट के आदेश पर भी डीएवी ने अभी भी करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये जमा नहीं कराए हैं। अग्निकांड पीड़ित संघ संस्थापक मास्टर हरपाल प्रवक्ता विनोद बंसल बताते हैं कि अग्निकांड पीड़ितों के लिए अंजूबाला की निशुल्क कानूनी सेवाओं के बिना आज उनके ज्यादातर परिवारों के मुख्यधारा में आना संभव होता।
डबवाली | उपमंडलन्यायिक दंडाधिकारी की कोर्ट में गुरुवार को अग्निकांड पीड़ित संघ के केस में सुनवाई हुई लेकिन कोर्ट में डीएवी स्कूल की ओर से रिकेल्कुलेशन के लिए हाईकोर्ट में रिट दायर किए जाने का एफिडेविट दिया गया। इससे कोर्ट ने आगामी सुनवाई के लिए 3 जनवरी की तारीख तय की है। अग्निकांड की 22वीं बरसी से ठीक एक दिन पहले गुरुवार 22 दिसंबर को एसडीजेएम रितु ने कोर्ट में दोनों पक्षों को सुना। इस दौरान अग्निकांड पीड़ित संघ की ओर से एडवोकेट वीएन जोशी ने पीड़ितों को मुआवजा वितरण के लिए डीएवी संस्थान की प्रॉपर्टी अटैच करने की दलील दी। वहीं मौके पर डीएवी संस्थान की ओर से एडवोकेट रविंद्र मोहन ने हाईकोर्ट में रिट दायर होने की दलील दी।

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Web Title: pideitaaen ke liye ek beti ne Ladi kanuni Ladaaee, 550 taarikhon se dilaayaa ilaaj, 57 karaaede rupye muaavjaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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