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10 लेडीज ने की शुरुआत, अब 3000 का संगठन बना रहा गूंद के लड्डू, सर्दियों में ही 5 करोड़ का कारोबार

अब हरियाणा के कई जिलों के अलावा दिल्ली और उत्तर प्रदेश से डिमांड आने लगी है।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 07:01 AM IST
3 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं 3 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं

हिसार. ये कहानियां नारीशक्ति के संगठित श्रम और अभूतपूर्व सफलता की है। चंद महिलाओं ने मंगाली और पेटवाड़ में समूह बनाकर लड्डू बनना शुरू किया तो धीरे-धीरे इसका स्वाद आसपास के लोगों की जुबान पर चढ़ने लगा। अब हरियाणा के कई जिलों के अलावा दिल्ली और उत्तर प्रदेश से डिमांड आने लगी है। दस महिलाओं के एक ग्रुप की कामयाबी के बाद अब अलग-अलग ग्रुप की करीब 3000 महिलाओं का एक बड़ा संगठन बन चुका है, जिसे मंगाली की सुमित्रा लीड करती हैं। मेलों में उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड रहती है।

- वह कहती हैं कि हरियाणा में जाड़े में लड्डू की डिमांड बढ़ती है। इस बार नवंबर से फरवरी यानी 4 महीने में करीब 1667 क्विंटल लड्डू की बिक्री होगी।

- संगठन का विस्तार कर इसे अगले साल 2000 क्विंटल तक ले जाने की तैयारी है। चेन सिस्टम से जोड़ कर राज्य के बड़े स्टोर्स से इसकी मार्केटिंग की भी प्लानिंग है।

साल 2016 मंगाली से हुई थी शुरुआत, 35 गांवों तक पहुंची

- 30-30 रुपए जुटाकर शुरू हुआ यह संगठन 35 गांवों तक पहुंच गया है। वर्ष 2016 में शुरू हुए इस संगठन में आज 3000 महिलाएं जुड़ी हैं।

- ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इन्हें मदद मिली। इसके बाद मुड़कर नहीं देखा। उन्हें असली पहचान गूंद के लड्डुओं ने दिलाई।

- महिलाओं ने बैंक से 1 लाख रुपए के ऋण के साथ कार्य बढ़ा दिया। संगठन की लीडर सुमित्रा बताती हैं कि संगठन में कई गांव महिलाएं जुड़ी हुई हैं।

लड्डुओं का स्वाद सांसद और वित्त मंत्री तक चख चुके हैं

- नारनौंद के पेटवाड़ गांव में चार साल पहले महिलाओं ने मिलकर रोशनी समूह बनाया था।

10 महिलाअों से शुरू हुए इस समूह के बने गूंद और बाजरे के लड्डुओं का स्वाद देश के सांसद और वित्त मंत्री तक चख चुके हैं।

- यही नहीं उन्होंने 80 हजार से 1 लाख रुपए तक के लड्डुओं को बनाने का आॅर्डर भी दिया।

- रोशनी समूह से जुड़ीं महिलाएं हर माह डेढ़ लाख रुपए का आमदनी करती हैं। समूह में प्रत्येक महिला 10 हजार रुपए की बचत करती है।