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बैडमिंटन में 54 मेडल जीत चुके हैं ये ट्विन्स ब्रदर, ऐसी है इनकी लाइफ

जुड़वां भाइयों ने बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण का आर्टिकल पढ़ा तो उनके मन में आया कि उनका भी आर्टिकल छपे।

Danik Bhaskar | Dec 27, 2017, 06:52 AM IST

हिसार. जुड़वां भाइयों ने बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण का आर्टिकल पढ़ा तो उनके मन में आया कि उनका भी आर्टिकल छपे। इसी से प्रेरणा लेकर जुड़वां भाइयों सुरेंद्र व विरेंद्र ने 11 साल की उम्र में स्कूल से ही बैडमिंटन का अभ्यास शुरू कर दिया था। इसी का परिणाम है कि अब तक ट्विंस ब्रदर स्टेट चैंपियनशिप में 37 गोल्ड सहित 54 गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।


- खास बात यह है कि जुड़वां भाई हमेशा डबल्स में खेले और खेल के साथ-साथ लाइफ में भी साथ चले।

- दोनों भाइयों की जॉब ज्वाइनिंग, शादी भी एक साथ हुई और जॉब में प्रमोशन भी। फिलहाल सुरेंद्र व विरेंद्र बिजली निगम में सीनियर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं।

- बिजली निगम की खेल प्रतियोगिताओं में हर साल पदक जीतते हैं। हाल ही 22 से 24 दिसंबर को यमुनानगर में मास्टर्स हरियाणा स्टेट ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप में मैन डबल्स व न्यू मिक्स डबल्स में गोल्ड मेडल हासिल किए।

- सुरेंद्र ने बताया कि वह मूलत: भिवानी के गांव धारवाण बास के हैं। 1992 में दोनों ने बिजली निगम में स्पोट्र्स कोटे के तहत एलडीसी की जॉब हासिल की।

- इसके कुछ समय बाद हिसार ट्रांसफर होने पर विद्युत नगर में आकर रहने लगे।

- सुरेंद्र ने बताया कि उनका एक बड़ा भाई भी है। जो इंटरनेशनल स्तर तक बैडमिंटन खेल चुके हैं।

- सुरेंद्र व विरेंद्र ने 1984 से बैडमिंटन करियर की शुरुआत करते हुए सब जूनियर, जूनियर, सीनियर व मास्टर्स चैंपियनशिप में भाग लेते हुए लगातार मेडल जीते। इनमें स्टेट लेवल चैंपियनशिप में 1984 से 1992 तक लगातार स्टेट चैंपियनशिप, नेशनल व सीनियर चैंपियनशिप में पदक अपने नाम किए।

- वहीं बिजली निगम में भी जुड़वां भाई अपने खेल हुनर के झंडे गाड़ते हुए 1992 से अब तक 15 गोल्ड जीत चुके हैं।

भाइयों के नाम रहे ये मेडल

>नेशनल चैंपियनशिप - 2 गोल्ड, 5 सिल्वर, ब्रांज 6 >हरियाणा स्टेट बैडमिंटन चैंपियनशिप - 37 गोल्ड, 6 सिल्वर
>ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी टूर्नामेंट - 15 गोल्ड, 22 सिल्वर, ब्रांज 6।

40 को दे चुके ट्रेनिंग

जॉब ज्वाइन करने के बाद दोनों भाई करीब 40 बच्चों को बैडमिंटन की ट्रेनिंग भी दे चुके हैं। इनमें से कई खिलाड़ी स्टेटलेवल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर चुके हैं। 1999-2000 बैच से कोच का डिप्लोमा भी कर चुके हैं।