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दवा वितरण मामला : दुष्यंत v/s बाबा

दवा वितरण मामला : दुष्यंत v/s बाबा हरियाणा में फिलहाल दुष्यंत बनाम बाबा में दवा िवतरण को लेकर जंग छिड़ी है। वह भी...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:20 AM IST
दवा वितरण मामला : दुष्यंत v/s बाबा

हरियाणा में फिलहाल दुष्यंत बनाम बाबा में दवा िवतरण को लेकर जंग छिड़ी है। वह भी उस बाबा के खिलाफ जिसके लिए दुष्यंत के बाबा हमेशा नरम रहे हैं। न कभी ज्यादा खिलाफ बोले और न कभी चुनाव में बराबरी का कंडीडेट उतारा। लेकिन अब नरम दिल वाले दादा के पौता दाड़ी वाले बाबा को पूरी तरह घेरे हुए है। पहले 300 करोड़ रुपए का घोटाला बीमारी वाले महकमे में बताया। बाबा ने जब इसका जवाब दिया तो दुष्यंत ने एक बार फिर पलटवार कर नए आंकड़े जारी कर बाबा पर हमला बोला दिया है। अभी जांच-जांच का खेल चल रहा है। देखना है कि कौन बाजी मारता है।

अब सादगी पड़ने लगी पड़ोसी विधायकों पर भारी

गांवों में पैदल या साइकिल पर पहुंचने वाले भाजपा के दो पड़ोसी विधायकों पर उनकी दिखाई जाने वाली सादगी और जन प्रेम उलटा पड़ने लगा है। रादौर से विधायक श्याम सिंह राणा सुबह-सुबह पैदल ही गांवों में घूमते हैं। चाहे वह कहीं भी हो, लेकिन अब उनके इलाके में सुबह की यह वॉक उनका मूड खराब कर रही है, क्योंकि उनके हलके में किसानों पर दिल्ली कूच के वक्त केस दर्ज किए थे। किसान सुबह उन्हें घेर लेते हैं। कुछ इसी प्रकार साइकिल मैन के नाम से पहचान बनाने वाले लाडवा विधायक पवन सैनी कुछ दिन पहले एक गांव में मेले में पहुंच गए। यहां दो महिला पहलवानों को 250-250 रुपए अपनी ओर से दिए तो वहां कुछ लोगों ने खिलाड़ियों से कह दिया कि उनकी सरकार होती तो 5-5 हजार देते। बस फिर क्या था। खिलाड़ियों ने विधायक जी को घेर लिया। इसका वीडियो वायरल हो गया। बाद में विधायक ने लिखवाया कि उनका विवाद नहीं हुआ और यह लिखा हुआ पत्र फिर सोशल मीडिया पर जारी किया गया।

फसल से पहले रैली-रोड शो कर गए केजरीवाल

प्रदेश के नेता तो पहले से ही हरियाणा की नब्ज को जानते हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल भी कम नहीं। वह मुख्यमंत्री दिल्ली के हैं, लेकिन पल-बढ़े यहीं हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने अपनी यात्राएं स्थगित की हैं। इनेलो और भाजपा पहले ही रैलियां कर चुकी हैं। ऐसे में केजरीवाल भी अपनी हिसार रैली के बाद रोड शो फसल कटाई परवान चढ़ने से पहले ही कर गए। अब प्रदेश की सियासी गरमाहट भी ठंडी पड़ गई है।

बड़ी सरकार से रूठी छोटी सरकार

प्रदेश की छोटी सरकार बड़ी सरकार से रूठ गई है। बड़ी सरकार के मुखिया के दरबार तक पहुंची छोटी सरकार के मुखियाओं ने नाराज होकर उनके खिलाफ मोर्चा खोला तो इसे भुनाने में हर समय बड़ी सरकार के खिलाफ मौका ढूंढने वाला विपक्ष एकाएक सक्रिय हो गया। पैर में चोट होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा दिल्ली से अपने गृह क्षेत्र रोहतक पहुंच गए। ब्लॉक में जाकर सरपंचों से मिले। इधर, अपने को गांवों की पार्टी होने का दावा करने वाले इनेलो के नेता भी इनके समर्थन में आ गए। दिल्ली के मुख्यमंत्री तो सरकार बनने पर सरपंचों से पेंशन तक का वादा कर गए। मुख्यमंत्री और महकमे के मंत्री छोटी सरकार की मांग माने जाने से मना कर गए लेकिन वोट बैंक को देखते हुए सरकार ने पंचायत महकमे के एससीएस को आगे कर दिया। उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस कर स्पष्टीकरण दिया कि ई-पंचायत अनिवार्य नहीं है। लेकिन साथ ही वह यह भी बता गए कि यह योजना 2010 में यानी कांग्रेस के शासनकाल में शुरू हुई थी।

आईएएस चुतर्वेदी का सीएस से 36 का आंकड़ा

प्रदेश में डीएफओ रहे आईएएस संजीव चतुर्वेदी भले ही दिल्ली चले गए हैं, लेकिन अभी हरियाणा और यहां के सीएस से छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ है। क्योंकि कांग्रेस के वक्त उनकी ओर से उठाए गए मामलों में अभी तक भाजपा सरकार भी कुछ नहीं कर पाई आैर वे इसके लिए मुख्य सचिव को जिम्मेदार मान रहे हैं। पूर्व सीएम, पूर्व वन मंत्री और एक आईएएस के खिलाफ घोटाला उजागर कर चर्चा में आए चतुर्वेदी ने इस बार सीध प्रदेश के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर उन्हीं पर तंज कसा है। लिखा- जब दिल्ली के मुख्य सचिव से मारपीट होने के ऐसे मामले पर चौबीस घंटे में आपने निंदा प्रस्ताव पास कर दिया जो जिसकी अभी पुष्टी तक नहीं हुई तो राज्यपाल की चिट्‌ठी का जवाब चार महीने में भी नहीं दे पाएं हैं। ऐसा क्यों। साथ ही उन्होंने राज्यपाल से भी सीएस के खिलाफ ही सीबीआई की जांच की मांग कर उन्हें घेरने की कोशिश की है। -आेएसडी