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बड़सी गेट से किले तक हैरिटेज वॉक किया

ऐतिहासिक पृथ्वी राज चौहान किले का क्या डिजाइन और इतिहास है, यह जानने के लिए हिसार के इंडियन नेशनल ट्रस्ट आर्ट एंड...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:20 AM IST

बड़सी गेट से किले तक हैरिटेज वॉक किया
ऐतिहासिक पृथ्वी राज चौहान किले का क्या डिजाइन और इतिहास है, यह जानने के लिए हिसार के इंडियन नेशनल ट्रस्ट आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज (इंटक) ग्रुप के सदस्य इसे देखने और समझने आए तथा हैरिटेज वॉक की। ऐतिहासिक बड़सी गेट से लेकर ऐतिहासिक किले तक पैदल भ्रमण करते हुए पहुंचे।

इंडियन कल्चरल हैरिटेज ग्रुप के सदस्य शहर के इतिहास को जानने के लिए आए। डॉ. आदर्श शर्मा व मंजु सिंह ने इनकी अगुवाई की। उनके साथ दिल्ली से आए विशेषज्ञ व इतिहासकार तपस्या व पीयूष भी साथ रहे। उन्होंने ऐतिहासिक किले व बड़सी गेट के बारे में पूरा इतिहास बताया। ग्रुप के मनीष देव ने बताया कि यह ग्रुप हैरिटेज साइट देखने के लिए बनाया गया है कि ऐसी ऐतिहासिक जगहों पर अब क्या काम हो रहा है व इसके पीछे का इतिहास क्या है। उन्होंने आज तक हांसी के किले का केवल नाम ही सुना था। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक किला इतने वर्षों से बना हुआ है, यह उन्हें पहले पता नहीं था। पहली बार किला व बड़सी गेट दरवाजा देखकर उन्हें काफी अच्छा लगा और पता लगा कि शहर का इतिहास कितना पुराना है। इसके पीछे का इतिहास भी जाना।

इसके इतिहास के बारे में उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं थी। चार घंटे उन्होंने यहां गुजारे व किले पर पूरा भ्रमण किया। साथ ही बड़सी गेट दरवाजा भी देखा। उनके साथ हिसार के राकेश अग्रवाल, मनीष गोयल, अनुभा तायल व अन्य सदस्यगण साथ रहे।

अवलोकन

ऐतिहासिक किले का डिजाइन व इतिहास देखने आई इंडियन नेशनल ट्रस्ट आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज टीम

ऐतिहासिक किले का मुआयना करते संस्था इंटक के मुनीष देव व अन्य।

अन्य ऐतिहासिक शहरों में करेंगे ऐसी वॉक

ग्रुप के सदस्यों ने पहली बार ऐतिहासिक किला व बड़सी गेट दरवाजा देखा। हांसी व ऐतिहासिक किले की जानकारी ली। ग्रुप की यह पहली हैरिटेज वॉक थी। इस तरह की हैरिटेज वॉक हिसार सहित अन्य शहरों में भी करेंगे।

संरक्षित इमारतों की सूची दी है : पूर्व सचिव

इंडियन नेशनल ट्रस्ट आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज ग्रुप ने शहर की संरक्षित इमारतों के बारे में जानकारी मांगी। मैंने उन्हें इनकी सूची सौंप दी। हमारा भी प्रयास है कि ऐतिहासिक और संरक्षित इमारतों को बचाए रखने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं।-सतीश चुचरा, पूर्व सचिव, नगर परिषद, हांसी

ग्रुप में थे कुल 70 लोग

ग्रुप के 70 लोग एक साथ यहां पहुंचे। जो कि बस व कार के माध्यम से यहां आए। हांसी आने के लिए एक बस बुक की गई थी। सुबह सवा सात बजे हिसार से चले व दोपहर 1 बजे तक हांसी में रहे।

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