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सिटी थाने का एफआईआर रजिस्ट्रेशन सेल बना कबाड़ घर, महिला व सिविल थाने में बैठने की जगह तक नहीं

आमजन की सुविधा के लिए पुलिस विभाग ने सभी थानों में मित्र कक्ष खोलने का फैसला किया है, लेकिन वहां पहले से खुले एफआईआर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:05 AM IST

आमजन की सुविधा के लिए पुलिस विभाग ने सभी थानों में मित्र कक्ष खोलने का फैसला किया है, लेकिन वहां पहले से खुले एफआईआर रजिस्ट्रेशन सैल का फायदा जनता को नहीं मिल पाया है। थानों के एंट्री गेट पर स्थापित रजिस्ट्रेशन सैल काफी महीनों से धूल फांक रहे हैं। सिटी थाना का कक्ष जहां कबाड़खाना बन चुका है, वहीं सिविल लाइन और महिला थाना में बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। सिर्फ सदर थाना में हालात ठीक दिखे। वहां पुलिसकर्मी भी बैठता है और जनता की शिकायत भी सुनकर दर्ज की जाती है।

बता दें कि रजिस्ट्रेशन सैल की यह व्यवस्था तत्कालीन आईजी ओपी सिंह ने शुरू की थी, ताकि जनता को थानों के अंदर जाने की जरूरत न पड़े। उनकी शिकायत को बाहर ही दर्ज किया जाए और किसी को शिकायत नहीं लिखनी आती है तो सैल में मौजूद सिपाही उसकी मदद करेगा। फिलहाल ऐसा नहीं हो रहा है। अब रजिस्ट्रेशन सैैल की तर्ज पर ही मित्र कक्ष खोले जाएंगे। बस अंतर इतना है कि ये हाईटेक होंगे। इस बारे में आईजी संजय कुमार का कहना है कि जनसुविधा के लिए हर जरूरी कदम उठाएं जाएंगे। किन कारणों से सैल बंद है और जनता दरबार नहीं लगते, पता करेंगे।

रजिस्ट्रेशन सेल में रखा सामान।

चार थानों की ग्राउंड रिपोर्ट

सिटी थाना : थाना परिसर में एफआईआर रजिस्ट्रेशन सैल का कक्ष बनाया गया था। पर, इसमें सिपाही या जनता के बैठने की व्यवस्था तक नहीं की गई। अब कबाड़खाना बना दिया है। सबसे ज्यादा हालात यहीं खराब हैं। इसलिए जनता को थाने के अंदर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवानी पड़ती है।

सिविल लाइन थाना : एंट्री गेट के साथ ही अस्थायी टिन का रजिस्ट्रेशन सैल बनाया गया था। पर, इसमें बैठने की व्यवस्था नहीं है। कहने के लिए सैल खुला हुआ है, जोकि धूल फांक रहा है। शिकायत दर्ज करने व लिखने के लिए कोई भी सिपाही वहां उपलब्ध नहीं होता है। यहां तो पक्का निर्माण कर सैल बनाने के आदेश हुए थे। पर, थाना पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया।

महिला पुलिस थाना : यहां थाना के बाहर पहले अस्थायी टिन का सैल बना दिया। इसके पास ही पक्का निर्माण करवाया गया लेकिन आजतक उसमें सैल संबंधित सेवाएं शुरू नहीं कर पाए हैं। पीड़ित महिलाओं को शिकायत दर्ज करवाने के लिए थाने के अंदर-बाहर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अगर किसी को शिकायत लिखनी नहीं आती तो उन्हें किसी को तलाश कर मदद लेनी पड़ती है।

सदर थाना : एफआईआर रजिस्ट्रेशन सैल अन्यों की तुलना में बेहतर काम कर रहा है। यहां पुलिस कर्मी भी बैठते हैं और जनता की शिकायतें सुनकर उनका समाधान करने का आश्वासन भी देते हैं। यह सैल थाने में प्रवेश करने के साथ ही बाईं तरफ है। जनता को थाने के अंदर-बाहर चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं।

अब जनता दरबार भी नहीं लगते

आमजन की शिकायतों का समाधान करने और कहां तक जांच पहुंची इत्यादि की जानकारी देने के लिए सभी थानों में माह में 2 बार जनता दरबार लगता था। इसे नो योर केस नाम दिया था। दो-तीन बार दरबार लगे लेकिन उसके बाद थाना पुलिस ने जनसेवा को बंद कर दिया। अब पीड़ित अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई का स्टेटस जानने के लिए थाने या चौकी में जाते हैं तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है।

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