• Home
  • Haryana
  • Hisar
  • अधिकारियों से फैक्ट्स छुपाकर बनाया था जेटीएस मामला पकड़े जाने पर डीजी ने किया डिमोशन
--Advertisement--

अधिकारियों से फैक्ट्स छुपाकर बनाया था जेटीएस मामला पकड़े जाने पर डीजी ने किया डिमोशन

एचएयू के कैंपस स्थित सेंटर फॉर प्लांट बायो टेक्नोलॉजी में पूर्व में टेक्निकल अस्सिटेंट के पद पर कार्यरत अनिल...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 04:10 AM IST
एचएयू के कैंपस स्थित सेंटर फॉर प्लांट बायो टेक्नोलॉजी में पूर्व में टेक्निकल अस्सिटेंट के पद पर कार्यरत अनिल कुमार को विभागीय उच्चाधिकारियों ने पदोन्नत कर जेटीएस (जूनियर टेक्निकल सुपरवाइजर) के पद पर बैठा दिया। साइंस टेक्नोलॉजी के डीजी टीएल सत्यप्रकाश के संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने जेटीएस के पद को अबोलिश कर अनिल पूनिया को दोबारा से टीए के पद पर डिमोट कर दिया। वहीं निंबस विश्वविद्यालय से एमएससी की फर्जी डिग्री के सहारे पीएचडी में छुट्टियां लेने पर टीए अनिल कुमार के खिलाफ 52000 की रिकवरी के आदेश दिए हैं। मामले की शिकायत करने वाले रोहताश कड़वासरा ने बताया कि अभी भी इस मामले की गहनता से जांच नहीं कराई है, अगर जांच कराई जाए ताे यह प्रकरण काफी गंभीर निकलेगा।

कैसे टीए को बनाया जेटीएस

हरियाणा सरकार के नियमानुसार अगर 2 वर्ष तक कोई पोस्ट खाली रहती है तो वह अबोलिश कर दी जाती है। मगर इस केस में कुछ अलग हुआ। उच्चाधिकारियों से फैक्ट छिपाकर टीए को जेटीएस बनाया गया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इसके लिए तत्कालीन डायरेक्टर टेक्निकल डॉ. आरसी यादव ने शनिवार के दिन सीपीबी खुलवाया, स्टाफ से कहा गया कि डीजी टीएल सत्यप्रकाश विजिट करने आ रहे हैं। हकीकत यह थी कि उस दिन डीजी की विजिट का काेई कार्यक्रम ही नहीं था। इसी दिन टीए अनिल पूनिया को जेटीएस के पद पर प्रमोट कर दिया गया। यह कार्य टेक्निकल डायरेक्टर डॉ. यादव के सेवानिवृत्त होने से दो दिन पहले हुआ।

डिग्री का प्रकरण समझिए

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सेंटर फॉर प्लांट बायो टेक्नोलॉजी के एक टीए की एमएससी बायोटेक की डिग्री पर 2015 से सवाल उठ रहे थे। साइंटिस्ट बनने का सपने देखते हुए टेक्नीकल अस्सिटेंट अनिल कुमार पूनिया ने विभाग में डिग्री जमा करवाई थी। उनकी डिग्री की मान्यता पर सवाल उठा तो विवाद बढ़ता देख पूनिया ने विभाग से डिग्री करने का दावा वापस लेते हुए नए सिरे से एमएससी की डिग्री करने की अनुमति मांग ली। उन्होंने निम्स यूनिवर्सिटी जयपुर से एमएससी बायो टेक की डिग्री करने का दावा करते हुए इसे विभाग में जमा करवा दिया। इसी डिग्री के आधार पर अनिल कुमार ने सीडीएलयू में बायो टेक्नोलॉजी में पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन भी करवाकर छह माह की छुट्टियां भी लीं। विभाग में कार्यरत एक अन्य टेक्नीकल अस्सिटेंट रोहताश कुमार ने अनिल कुमार की डिग्री की मान्यता पर सवाल उठाते हुए विभाग के अधिकारियों को शिकायत की। इस पर अनिल ने करीब 2015 अगस्त माह में विभाग के डायरेक्टर को पत्र लिखकर पीएचडी रजिस्ट्रेशन अपनी एमएससी की डिग्री के दावे को वापस ले लिया है और इसका कारण नया एमएससी कोर्स करना बताया है। रोहताश कुमार ने बताया कि अनिल पूनिया ने विभाग में जो एमएससी की डिग्री जमा करवाई थी, उसका प्रथम वर्ष ईलम यूनिवर्सिटी से किया हुआ बताया गया और फाइनल ईयर माइग्रेशन दिखाकर निम्स यूनिवर्सिटी जयपुर से किया हुआ दिखाया गया है। रोहताश का दावा है कि आरटीआई के तहत मिली जानकारी के मुताबिक ईलम यूनिवर्सिटी की ओर से शैक्षणिक सत्र 2009-10 में डिस्टेंस से एमएससी बायो टेक का कोर्स नहीं करवाया गया।

दोनों डिग्री वापस ले ली थी

टीए अनिल पूनिया का कहना है कि यूनिवर्सिटी पहले यह कोर्स करवाती थी, परंतु अब नहीं। भविष्य में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए मैंने दोनों डिग्रियां वापस ले ली थी। इससे मेरे पांच साल खराब हो गए हैं। मैंने अपनी मेहनत से नेट की परीक्षा पास की है। मेरे पर झूठे आरोप लगाए गए। वहीं जेटीएस पद पर प्रमोशन को लेकर उन्होंने कहा कि मुझे कुछ नहीं कहना।