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मीटर की डिस्प्ले जला चिप का रिकाॅर्ड करते थे नष्ट

मीटर जलाने और उपभोक्ताओं के साथ मिलीभगत कर बिजली निगम को लाखों रुपए की चपत लगाने के मामले में नए खुलासे और...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:15 AM IST

मीटर जलाने और उपभोक्ताओं के साथ मिलीभगत कर बिजली निगम को लाखों रुपए की चपत लगाने के मामले में नए खुलासे और कहानियां सामने आई हैं। इस मामले में बिजली निगम के जेई, एलडीसी, जेई के सहायक तक के शामिल होने की बात सामने आ रही है। बिजली निगम ने इसको लेकर रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। सेक्टर 14 की बार का मीटर मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने लाइनमैन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। बताया जा रहा है कि एरिया इंचार्ज ने सेक्टर 14 में ही इसी तर्ज पर एक साल में 50 से अधिक मीटर बदल दिए। इसके बाद एरिया इंचार्ज को वहां से हटा दिया गया था। हालांकि ये जांच का विषय है कि ये मामले असलियत में ही सही हैं या गलत है।

बिजली निगम के अधिकारियों ने बताया कि मीटर जलाने के मामले में बड़ा खेल था। रेड स्क्वेयर मार्केट स्थित होटल के दो मीटरों को जिनमें से एक को दो बार व दूसरे को तीन बार बदला गया था। इस होटल के पांच बार बदले गए मीटर को हर बार जलाया गया था। ऐसा ही बार मामले में हुआ।

सेक्टर 14 में 50 से ज्यादा मीटर बदले गए

भास्कर पड़ताल

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यूं चलता है खेल, 2200 रुपए में बच जाते हैं लाखोंउदाहरण के तौर पर थ्री फेज के मीटर से हर महीने उपभोक्ता की 3 हजार यूनिट बिजली खर्च हो रही है। उपभोक्ता इस बिल को नहीं भरता। अगर भरता भी है तो वह इसे यूनिट बिजली मीटर द्वारा निकालने की बात कहकर एप्लीकेशन लगा ली जाती है। इस आधार पर उसे कुछ छूट मिल जाती है। उदाहरण के तौर पर उपभोक्ता इसमें 1 हजार यूनिट का बिल भर देता है। दोबारा बिल आने पर फिर वह आपत्ति दर्ज करवाता है फिर एवरेज के हिसाब से बिल जमा हो जाता है। मौके पर जेई व अन्य स्टाफ को रिपोर्ट करनी होती है। इसके आधार पर राहत दे दी जाती है। जब ये मामला लाखों पर पहुंच जाता है तो उपभोक्ता स्टाफ को भरोसे में लेकर उससे ही मीटर जलाने के जुगाड़ पूछता है। माना किसी उपभोक्ता का 2 लाख का बिल है तो वह उस मीटर की डिस्प्ले जला देता है। मीटर डिस्प्ले के पीछे ही चिप लगी होती है जब ये डिस्प्ले जलती है तो पूरा डेटा इसके साथ जल जाता है और लैब में भी मीटर रीडिंग रिकवर नहीं हो पाती। इसके बाद थ्री फेज मीटर 2200 रुपए में लग जाता है।

बिजली निगम बढ़ाएगा जांच का दायरा : मीटर जलाने और मिलीभगत कर सरकार को चपत लगाने के मामले में हो सकते हैं और खुलासे

ये तरीके अपनाते हैं लोग मीटर जलाने में

1. डिस्प्ले पर टायर पंक्चर में यूज की जाने वाली सोल्यूशन लगा दी जाती है। करंट से भय आने वाले लोग इसके साथ ही एक कागज की बत्ती चिपका देते हैं और इस पर आग लगा दी जाती है।

3. डिस्प्ले तोड़कर दूसरे मीटरों की जली हुई डिस्प्ले लगाना और ये मीटर स्टाफ द्वारा ही उपलब्ध करवाए जाते हैं।

जेई ने आरोपों को गलत बताया

मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं। साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। हमने तो जले मीटर जब भी लैब में भेजे। लैब रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की गई। इसमें हमारी कहां गलती है।’’ विशाल, जेई बिजली निगम।

2. डिस्प्ले अथवा मीटर जलाने वाले कई बार इंजेक्शन से पेट्रोल अथवा अन्य ज्वलनशील उस हिस्से पर डाल देते हैं इसके बाद उस आग लगा दी जाती है।

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