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डिग्री का क्या है प्रकरण समझिए

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सेंटर फॉर प्लांट बायो टेक्नोलॉजी के एक टीए की एमएससी बायोटेक की डिग्री पर 2015 से...

Danik Bhaskar

Apr 01, 2018, 04:15 AM IST
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सेंटर फॉर प्लांट बायो टेक्नोलॉजी के एक टीए की एमएससी बायोटेक की डिग्री पर 2015 से सवाल उठ रहे थे। साइंटिस्ट बनने का सपने देखते हुए टेक्नीकल अस्सिटेंट अनिल कुमार पूनिया ने विभाग में डिग्री जमा करवाई थी। उनकी डिग्री की मान्यता पर सवाल उठा तो विवाद बढ़ता देख पूनिया ने विभाग से डिग्री करने का दावा वापस लेते हुए नए सिरे से एमएससी की डिग्री करने की अनुमति मांग ली। उन्होंने निम्स यूनिवर्सिटी जयपुर से एमएससी बायो टेक की डिग्री करने का दावा करते हुए इसे विभाग में जमा करवा दिया। इसी डिग्री के आधार पर अनिल कुमार ने सीडीएलयू में बायो टेक्नोलॉजी में पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन भी करवाकर छह माह की छुट्टियां भी लीं। विभाग में कार्यरत एक अन्य टेक्नीकल अस्सिटेंट रोहताश कुमार ने अनिल कुमार की डिग्री की मान्यता पर सवाल उठाते हुए विभाग के अधिकारियों को शिकायत की। इस पर अनिल ने करीब 2015 अगस्त माह में विभाग के डायरेक्टर को पत्र लिखकर पीएचडी रजिस्ट्रेशन अपनी एमएससी की डिग्री के दावे को वापस ले लिया है और इसका कारण नया एमएससी कोर्स करना बताया है। रोहताश कुमार ने बताया कि अनिल पूनिया ने विभाग में जो एमएससी की डिग्री जमा करवाई थी, उसका प्रथम वर्ष ईलम यूनिवर्सिटी से किया हुआ बताया गया और फाइनल ईयर माइग्रेशन दिखाकर निम्स यूनिवर्सिटी जयपुर से किया हुआ दिखाया गया है। रोहताश का दावा है कि आरटीआई के तहत मिली जानकारी के मुताबिक ईलम यूनिवर्सिटी की ओर से शैक्षणिक सत्र 2009-10 में डिस्टेंस से एमएससी बायो टेक का कोर्स नहीं करवाया गया।

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