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बिट्टू शर्मा का मर्डर केस: कोर्ट ने सात आरोपियों को उम्रकैद और एक को सात साल की सजा सुनाई

प्रॉपर्टी डीलर बिट्टू शर्मा की पौने चार पहले हुई हत्या के मामले में गुरुवार को अदालत ने फैसला सुनाया।

Bhaskar news | Last Modified - Nov 17, 2017, 07:56 AM IST

हिसार.पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल के पीए ललित शर्मा के भतीजे प्रॉपर्टी डीलर बिट्टू शर्मा की पौने चार पहले हुई हत्या के मामले में गुरुवार को अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने फैसले में सात आरोपियों को उम्रकैद और एक को सात साल की सजा सुनाई है। अदालत ने सात आरोपियों पर 39 हजार का जुर्माना और आठवें पर दो हजार का जुर्माना लगाया है। अदालत ने फॉरेंसिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मोबाइल की कॉल डिटेल को अाधार मानते हुए फैसला सुनाया। हैरत की बात तो यह कि अदालत में मुकदमे के मुद्दई और दो गवाहों ने कुख्यात अपराधी विनोद पानू उर्फ काना और दिनेश पूनिया के भय में आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया था।


प्रॉपर्टी डीलर बिट्टू शर्मा की हत्या के मामले का अदालत में ट्रायल करीब साढ़े तीन साल तक चला। इस प्रकरण में पुलिस ने साइंटिफिक, परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए। इसके अलावा तीन पब्लिक के गवाहों में मुद्दई कृष्ण कुमार एवं उसके चाचा व पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल के पीए ललित शर्मा और मृतक बिट्टू का पार्टनर लाडवा वासी सतेंद्र पूनिया के अलावा 26 अन्य गवाह पेश हुए। ये अलग बात है कि घटना के प्रमुख आरोपी विनोद पानू की गिरफ्तारी न होने और आरोपी दिनेश पूनिया के जमानत पर बाहर होने के कारण भयभीत गवाहों ने अदालत में आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया था।

समझिए :ये कैसे बने आधार

परिस्थितिजन्य साक्ष्य: पुलिस द्वारा तफ्तीश के दौरान मौका ए वारदात पर मिले साक्ष्य, जैसे कारतूस, खून आलूद या बरामद कोई हथियार, अपराधियों का कपड़ा।

साइंटिफिक साक्ष्य:मोबाइल की कॉल डिटेल भी साइंटिफिक साक्ष्य के तौर पर माना जाता है। इससे अपराधियों की लोकेशन पता की जाती है। वारदात के समय उसकी लोकेशन कहां थी और उससे पहले वह कहां-कहां गया। ये कड़ियां जोड़ी जाती हैं। इसके लिए मोबाइल कॉल डिटेल भी अहम साक्ष्य माना जाता है।

यह होते हैं परिस्थितिजन्य साक्ष्य

- वारदात से पहले तफ्तीश में मिले एेसे साक्ष्य जिनसे अपराधियों की लोकेशन ट्रेस होती, मोबाइल कॉल डिटेल, कोई अन्य साक्ष्य, अपराधियों के कपड़ों पर मिला खून, जो जांच में वारदात से मैच खाते हों।

- फॉरेंसिक जांच और बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट फॉरेंसिक एक जांच प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के तहत मौके पर मिले खून आलूद एवं अन्य कोई केस संबंधित वस्तु की जांच की जाती है। इस जांच में देखा जाता कि मौके पर मिला खून या वस्तु और बरामद गोली पर लगा खून मैच है कि नहीं। इसके अलावा गिरफ्तार अपराधी के कपड़ों पर लगा खून एवं मौके पर मिला खून मैच खाता है कि नहीं।

- बैलेस्टिक जांच में मौका ए वारदात पर मिले कारतूस और अपराधियों से बरामद किए गए असलाह की जांच होती है। इस जांच में देखा जाता कि असलाह से कारतूस चला कि नहीं, चला तो मौके पर मिला कारतूस अपराधी के असलाह से चला है कि नहीं। मैच होता तो यह भी ठोस साक्ष्य माना जाता है।

पुष्पा कॉम्प्लेक्स में गोलियां मारकर की गई थी हत्या

शहर के पुष्पा कॉम्प्लेक्स में 24 जनवरी 2014 को दोपहर करीब 3.09 बजे प्रॉपर्टी डीलर बिट्टू शर्मा की उस समय गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। जब वह अपने प्रॉपर्टी डीलिंग के आॅफिस में बैठा था। इस दौरान उसका पार्टनर लाडवा वासी सतेंद्र पूनिया भी था। इस घटना में सतेंद्र ने मृतक के भाई कृष्ण कुमार को बताया था कि दिनेश पूनिया ने पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद के बाद षड्यंत्र रचकर हत्या कराई है। हत्या को कुख्यात अपराधी विनोद पानू उर्फ काना एवं उसके साथियों ने अंजाम दिया। प्रकरण में मृतक बिट्टू शर्मा के भाई कृष्ण कुमार ने हत्या का मामला दर्ज कराया था।

गवाहों के होस्टाइल या गवाह न होने पर कोर्ट इन साक्ष्यों को आधार मानती है

अदालत आमतौर पर फैसला सुनाते समय गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य साक्ष्य, साइंटिफिक साक्ष्यों को आधार बनाती हैं। बिट्टू शर्मा हत्याकांड में भी अदालत ने इन्हीं साक्ष्यों को आधार मानते हुए अपना फैसला सुनाया है।
पीके संधीर, अधिवक्ता, पीड़ित पक्ष।

अदालतों में तमाम एेसे ऐतिहासिक फैसले हैं। जिनमें कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। इसके बाद भी अदालतों में परिस्थितिजन्य एवं साइंटिफिक तथा पुलिस की तफ्तीश में आए साक्ष्यों को आधार बनाकर फैसले हो चुके हैं। हिसार के देश में चर्चित रेलूराम पूनिया हत्याकांड में कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। इसके अलावा करनाल मनोज बबली ऑनर किलिंग के मामले में भी कोई चश्मदीद नहीं था।
लाल बहादुर खोवाल, अधिवक्ता।

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