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दो टैंक खाली करके तीसरे में भर दिया था प्रेशर, धमाके से उखड़ा ढक्कन पेट्रोल लाइन से टकराने पर मिल में लगी आग

हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर आशीष एग्रोआॅयल मिल में रविवार तड़के ज्यादा प्रेशर के कारण टैंक फट गया।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 06, 2017, 07:55 AM IST

दो टैंक खाली करके तीसरे में भर दिया था प्रेशर, धमाके से उखड़ा ढक्कन पेट्रोल लाइन से टकराने पर मिल में लगी आग
हिसार/बरवाला/उकलाना.सुरेवाला चौक के पास हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर आशीष एग्रोआॅयल मिल में रविवार तड़के ज्यादा प्रेशर के कारण टैंक फट गया। हादसे के दौरान मिल में मौजूद एकाउंटेंट मदनलाल सिंघला ने बताया कि मिल में 13 टैंक स्थापित हैं। इनमें माल पकने के बाद एक के बाद करके खोला जाता है। इससे पहले एक टैंक खुलता है तो उसका प्रेशर अगले दो टैंकों में कर दिया जाता है। यह क्रम चलता रहता है। मगर रविवार की रात्रि को दो नंबर टैंक खुलने के बाद प्रेशर टैंक नंबर 3 और 4 के बजाए 3 में भर दिया। इससे 3 नंबर टैंक का ढक्कन धमाके के साथ खुल गया और दीवार से टकराकर टैंकों मेें पेट्रोल भेजने वाली पाइप लाइन से टकरा गया। जिसके कारण पाइप लीक होने से मिल में आग लग गई। इससे हादसा और भयावह हो गया।

वहीं फोरमैन रोशनलाल ने बताया कि मिल 1994 से चल रही है। मिल के दो महीने से बंद प्लांट को शनिवार को शुरू किया गया था। रात को ट्रायल पर लिया गया था। इस दौरान मिल के दोनों शिफ्टों के मजदूरों व मैकेनिकों को काम पर लगाया गया था। काम शुरू होने के बाद इसमें देर रात प्रेशर बढ़ने की वजह से धमाका हो गया।

धमाका सुन आंख खुली तो मिल में आग की लपटें दिख रही थीं
ऑयल मिल के नजदीक रहने वाले 65 वर्षीय मांगेराम धमाके से एकदम जाग गए। उन्होंने बताया कि भैंसें एकदम बिदक गईं थी। वो अपने कमरे से बाहर आए तो उन्हें मिल में आग जलती दिखाई दी। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि 14-15 आदमी आग से जल रहे थे। वहीं अन्य लोगों के पहुंचने पर वो भी पानी लेकर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। धमाका इतना तेज था कि उनके घर के अन्य सभी लोग भी जाग गए थे। आसपास गांव में भी धमाका सुना गया। मौके पर जले हुए लोगों की चीख पुकार सुनाई दे रही थी। रात 3 बजे होने के कारण जल्दबाजी में मिल कर्मचारियों ने एंबुलेंस को फोन किया। जिसके बाद जले हुए लोगों को एंबुलेंस में डालकर अस्पतालों में ले जाया गया। इस दौरान वहां पर फायरब्रिगेड की गाड़ियां भी पहुंची।
इस हादसे में झुलसे 15 लोगों में से सुरेश और भीमराज की देर रात मौत हो गई।13 लोगों काे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जींद के दनौदा निवासी घायल सुभाष व अन्य घायल मजदूरों के बयान पर ऑयल मिल के मैनेजर कृष्ण कुमार व ऑयल मिल मालिक चाचा-भतीजे सुरेंद्र कुमार जैन व अाशीष कुमार जैन के खिलाफ लापरवाही के लिए धारा 287, 336, 337, 338 व 304ए के तहत मामला दर्ज किया है।
घायलों में दो भाई भी शामिल
ऑयल मिल में हुए हादसेे में दो भाई भी गंभीर रूप से झुलस गए। सोनू का चूड़ामणि में तो रमेश काे भारत अस्पताल में दाखिल किया गया। इनमें 19 वर्षीय सोनू व उसका 30 वर्षीय भाई रमेश शामिल है। सोनू के शरीर का 30 प्रतिशत हिस्सा जल गया है। वहीं रमेश का आधा शरीर झुलस गया। रमेश के बुलाने पर सोनू एक दिन पहले ही मिल में आया था। घटना में झुलसे रमेश का चेहरा बुरी तरह झुलस गया है। आंखें क्षतिग्रस्त हो चुकी है। उसने बताया कि कहा पता नहीं अब दोबारा कभी देख पाऊंगा या नहीं। रमेश को दोपहर को अग्रोहा मेडिकल रेफर कर दिया गया।
आग की लपटों के बीच जान पर खेलकर फोरमैन गणेश ने मेन वाॅल्व बंद कर अंडरग्राउंड पेट्रोल टैंक को फटने से बचाया, खुद झुलसा
मिल में चल रहे काम के दौरान फोरमैन गणेश ने ब्लॉस्ट होने के बाद तुरंत प्लांट के पेट्रोल टैंक की मेन वॉल्व को बंद कर दिया। जिसके कारण 3 नंबर टैंक के पास के लगे अन्य टैंक फटने से बच गए। फोरमैन गणेश ने वॉल्व को बंद करने के बाद प्लांट से ही सीधे उस जगह छलांग लगाई जहां पर पेट्रोल का अंडरग्राउंड टैंक बनाया गया है। प्लांट के पास लगी सीढ़ी ब्लास्ट में क्षतिग्रस्त हो गई थी, इसलिए उसने सीधे नीचे छलांग लगा दी। इस दौरान गणेश बहुत बुरी तरह से झुलस गया। उसकी हालात गंभीर है, लेकिन उसने अपनी समझदारी और बहादुरी से बड़ा हादसा को होने से बचा लिया।
पेट्रोल टैंक की स्टोरेज क्षमता 48 हजार केएल है, वह सुरक्षित रहा
जिस जगह पर ब्लॉस्ट हुआ, उसके पास ही अंडरग्राउंड पेट्रोल टैंक बनाया गया था। इस टैंक की क्षमता 48 हजार केएल बतायी गई है। हालांकि इस टैंक की सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।
5 दिन पहले ही काम पर आया था
चूड़ामणि अस्पताल के बर्निंग आईसीयू में भर्ती घायल 25 वर्षीय चंद्रभान ने बताया कि उसे काम करते हुए पांच दिन ही हुए हैं। वह टैंक को खाली करने का काम करता है। रविवार रात को टैंक मेें प्रेशर देने का काम कर रहे थे। प्रेशर ज्यादा होने के कारण टैंक फट गया।
^घटना में जले हुए लोगों को नाक में पाइप लगाकर पहले पानी का सेवन करवाया जा रहा है। आठ घंटे बाद मरीजों को पाइप के जरिये ही खाना-खिलाया जाएगा।’’
डॉ. गगनदीप, चूड़ामणि अस्पताल, हिसार।
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