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बच्चों ने तैयार किया ग्राउंड, टायर को टारगेट बना सीखी तीरंदाजी, नेशनल लेवल पर जीते पदक

आज बाल दिवस है। तमाम बाधाआें के बाद भी हुनर मंच तलाश ही लेता है।

bhaskar news | Last Modified - Nov 14, 2017, 06:06 AM IST

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    हिसार.आज बाल दिवस है। तमाम बाधाआें के बाद भी हुनर मंच तलाश ही लेता है। जज्बे और मेहनत के बूते जो मुकाम हासिल होता है, वह समाज में अलग ही पहचान दिलाता है। साथ ही दूसरों के लिए भी रोल मॉडल बनता है। अपने शहर में भी ऐसे हुनरमंद और होनहारों की कमी नहीं है। किसी ने खुद मैदान बनाकर मेडलों पर निशाने साधे तो किसी ने अपने डांस स्टेप से देखने वालों को कायल बनाया। स्कूल में सब्जेक्ट्स के टीचर्स नहीं थे, मगर मेधावी मीनाक्षी खुद पढ़ाई कर जिले में अव्वल रही। आइए, बाल दिवस पर सिटी के कुछ होनहारों से आपको रूबरू करवाते हैं।

    शहर से सटे गांव मंगाली में फुटबॉल के अलावा तीरंदाजी की नई पौध तैयार हो रही है। दरअसल, यहां छोटे-छोटे बच्चे अपने तीर निशाने पर लगा रहे हैं। इसके पीछे की कहानी भी कम रोचक नहीं है। गांव की सुलोचना और उनकी फ्रेंड सीलू को इसका श्रेय जाता है। सुलोचना पहले फुटबॉल खेलती थीं। खेल में लिंगामेंट टूटे तो फुटबाल छोड़नी पड़ी। ऑनलाइन तीरंदाजी के बारे में जानकारी ली और तीर कामन थामे। तीरंदाजी में कई कीर्तिमान स्थापित किए। उनको देख दूसरे बच्चे भी तीरंदाजी का क्रेज होने लगा। गांव में बने मंदिर के पास एक खाली भूमि पर बच्चों ने तैयारी शुरू कर दी। किसी बच्चे ने घास काटी तो किसी ने ग्राउंड को समतल बनाए रखने का काम किया, तो किसी ने पानी का छिड़काव किया। इस तरह से तीरंदाजी की प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड तैयार हुआ। पराली और टायर के टारगेट बना तीरंदाजी सीखी। गांव में बिना कोच के ही सुलोचना के नेतृत्व में कई बच्चे नेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं में पदक जीत नाम रोशन कर रहे हैं। 12 वर्षीय मोहित सब जूनियर नेशनल तीरंदाजी प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुका है। इसके साथ इस ग्रुप के 5 बच्चे अमृतसर, देहरादून, पटियाला में सरकारी स्पोर्ट्स एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहे हैं।

    गौरांश की डांस परफाॅर्मेंस के बाद डीआईडी जूनियर का काॅन्सेप्ट आया

    मॉडल टाउन निवासी 15 वर्षीय गौरांश चौहान को उसके पिता जगबीर सिंह 7 वर्ष की उम्र में दिल्ली में डांस इंडिया डांस शो के ऑडिशन दिखाने ले गए थे। यहां कुछ युवा परफार्म कर रहे थे, इतने में जगबीर ने गौरांश को स्टेज पर चढ़ा दिया। इसके बाद गौरांश ने माइकल जेक्शन की स्टाइल में स्टेज पर जो धमाल मचाया, सभी देखते रह गए। स्टेज के दूसरी ओर इस प्रस्तुति को देख रहे डीआईडी शो के डायरेक्टर काफी प्रभावित हुए। लिहाजा 7 साल के गौरांश काे ऑडिशन रूम में डांसिंग फेम गीता, टेरेंस और रैंबो डिसूजा के सामने ले गए। वहीं गौरांश को जूनियर एमजे के खिताब से नवाजा गया। वहां से शो के डायरेक्टर को विचार आया कि सीनियर के साथ अब बच्चों के लिए डांस इंडिया डांस को इंडिया के सामने लेकर आया जा सकता है। गौरांश एबीसीडी 2, नीरजा, नॉटी गैंग फिल्म में भी काम कर चुके हैं। अब उन्हें दूसरे कई प्रोजेक्ट भी मिल रहे हैं।

    स्कूल में साइंस के शिक्षक नहीं थे, खुद पढ़ाई कर रही जिला टॉपर

    कड़ी मेहनत से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। यह साबित करके दिखाया है गांव राखी खास की मीनाक्षी ने। 12वीं में मेडिकल विषय में जिला टॉप किया, जबकि उसके सरकारी स्कूल में साइंस के तीनों विषयों का शिक्षक ही नहीं थे। आरोही मॉडल स्कूल खेड़ी लोचब की पूर्व छात्रा मीनाक्षी के परिवार में पति बलजीत सिंह 12वीं व माता कविता 10वीं कक्षा पास है। ऐसे में उसने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर जिले में टॉपर का मुकाम हासिल किया और आज वह दूसरों के लिए आइडियल है। मीनाक्षी ने कहा कि माता-पिता ने उसका हौसला बढ़ाया जिसके बल पर उसने यह सफलता हासिल की है। मेरा सपना डॉक्टर बनना है उसे पूरा करने के लिये पीएमटी की तैयारी कर रही हूं। स्कूल प्रधानाचार्य चांदनी ने कहा कि मीनाक्षी उनके स्कूल की होनहार छात्रा रही है। उसकी कड़ी मेहनत ने स्कूल को भी प्रदेश में सम्मान दिया है।

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