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नाना की पहलवानी के किस्से सुन किरण ने सीखे दांव, अब बनी भारत केसरी

दिल्ली के महरौली में शनिवार को आयोजित प्रतियोगिता में किरण गोदारा ने ओपन वेट में मधुवन की महिला पहलवान को पटखनी दी।

Dainik Bhaskar

Nov 28, 2016, 05:34 AM IST
नाना की पहलवानी के किस्से सुन किरण ने सीखे दांव, अब बनी भारत केसरी
हिसार. हिसार की बेटी और सेक्टर पंद्रह निवासी महिला पहलवान ने भारत केसरी का खिताब जीता है। दिल्ली के महरौली में शनिवार को आयोजित प्रतियोगिता में किरण गोदारा ने ओपन वेट में मधुवन की महिला पहलवान को पटखनी दी। किरण पिछले साल राजीव गांधी गोल्ड कप में भारत केसरी बनने से चूक गई थी और उन्हें दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। किरण गोदारा ने इसके बाद सालभर तक कड़ी मेहनत की और इस बार उसने अपने दांव का दम दिखा दिया। मगर इस जीत के पीछे शुरुआत भी अजब रही।
बात करीब छह बरस पहले की है। इससे पहले किरन अपने ननिहाल गांव कालीरावण में रहती थी। नाना अपने समय पहलवानी करते थे। सो कई उनकी पहलवानी के कई किस्से सुनने को मिले। किरन ने भी दंगल में उतरने की ठानी। मगर परिवार के लोग तैयार नहीं थे। नाना ने उसका साथ दिया। उसके बाद उसने दांवपेंच लड़ाने सीखे। फिर दंगल भी जीते।

मूलरूप से रावतखेड़ा निवासी पिता कुलदीप गोदारा व मां गीता देवी और भाई अजय गोदारा ने भारत केसरी बनकर हिसार पहुंचने पर किरण का जोरदार स्वागत किया। 2001 से गुरु हनुमान की याद में किया जाने वाले इस दंगल में ओपन वेट में कोई भी महिला पहलवान भाग ले सकती है, जिसमें किरण गोदारा परचम लहराया है। जीत के बाद किरण के घर में खुशी का माहौल है। कोच विष्णुदास ने भी उन्हें सम्मानित किया और बधाई दी।
घरवालों का इनकार, पर नाना ने दंगल में उतारा
मैं दसवीं में थी तो कुश्ती लड़ने की रुचि हुई। घरवालों को बताया। मगर वे नहीं माने। वे नहीं चाहते थे कि बेटी दंगल में लड़े। नाना रामस्वरूप खिचड़ इस बात से इत्तफाक नहीं रखते थे। नाना ने मेरा साथ दिया। वो खुद भी पहलवानी करते थे। नाना का साथ मिलने के बाद मैं कुश्ती लड़ने लगी। दांवपेंच सीखने के बाद दंगल में उतारी। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। ननिहाल में शुरुआत करने के बाद शहर पहुंची। इसके बाद महाबीर स्टेडियम में रेसलिंग कोच विष्णुदास से प्रशिक्षण लेना शुरू किया। बीते 6 सालों में एक के बाद एक कई सफलता हासिल की। कुश्ती में बेहतर प्रदर्शन के बाद ही केंद्र सरकार ने रेलवे में टीसी के पद पर नियुक्ति भी दी है।
चोट खिलाड़ी का शृंगार, दर्द नहीं हौसला मिलता है
कई नेशनल मेडल जीत चुकी और ओलिंपिक क्वालिफाई राउंड में कजाकिस्तान में पांचवां स्थान हासिल कर चुकी पहलवान किरण गोदारा के हौसले बुलंद हैं। कहती हैं कि खेल में चोट लगना खिलाड़ी का शृंगार है, इससे दर्द नहीं बल्कि आगे बढ़ने का हौसला मिलता है। खेल ही नहीं अगर बेटियों को बढ़ावा मिले तो बेटियां हर मुकाम हासिल कर सकती है। वह राजकीय कॉलेज में पढ़ी हैं।
भारत केसरी बनने में हिसार का दबदबा
2001 से शुरू हुए राजीव गांधी गोल्ड कप में भारत केसरी बनने का खिताब पाने में अब तक हिसार सबसे आगे रहा है। किरण गोदारा से पहले महिला पहलवान और डीएसपी गीतिका जाखड़ भी कई सालाें तक भारत केसरी बनी और बाद में घुटने में चोट लगने के कारण उन्होंने दंगल करना छोड़ दिया। पिछले साल हालांकि भारत केसरी रोहतक की पहलवान बनी थी और किरण गोदारा दूसरे नंबर पर थी, मगर इस बार किरण गोदारा ने पहला स्थान हासिल कर हिसार को फिर से उपरी पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया है।
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