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गांव की महिलाओं ने खड़े किए रोजगार, हिसार में बने बिस्किट खाएंगे देश के सांसद

कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत लोगों को ट्रेनिंग देकर रोजगार के मामले में शहर और गांवों में भारी अंतर होता जा रहा है।

वैभव शर्मा | Last Modified - Nov 06, 2017, 06:39 AM IST

गांव की महिलाओं ने खड़े किए रोजगार, हिसार में बने बिस्किट खाएंगे देश के सांसद
हिसार.कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत लोगों को ट्रेनिंग देकर रोजगार के मामले में शहर और गांवों में भारी अंतर होता जा रहा है। एक तरफ जहां ग्रामीण महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर छोटे-छोटे रोजगार से कमाई कर रही हैं और रोजगार भी बांट रही हैं। वहीं शहरी क्षेत्र में पिछले तीन साल में इस योजना के तहत एक भी युवक को नौकरी नहीं दिलाई गई है।
दरअसल, शहरी लोगों को प्रशिक्षण देकर रोजगार मुहैया कराने के कार्य में जुटी केन्द्र की शहरी आजीविका मिशन योजना में पिछले 3 वर्षों से एक्सपर्ट की टीम लोगों को कौशल रोजगार प्रशिक्षण दे रही है। इसमें 176 युवाओं को प्रशिक्षण दिलाने के बाद भी इस योजना के तहत किसी कंपनी में नौकरी नहीं मिल पाई। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका मिशन के तहत काम कर रही महिलाएं छोटे-छोटे प्रोडक्ट और बैंक से सीमित आर्थिक सहायता के दम पर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। हाल ही में हिसार में सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए बाजरे और हल्के मीठे बिस्किट को हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला ने सांसदों को खिलाने की पेशकश की है। अब यह ग्रुप सांसद के पास 200 डिब्बे बिस्किट पहुंचाएगा।
इनके बने लकड़ी के मनके चीन में हो रहे सप्लाई, हर माह डेढ़ लाख आमदनी
राजकीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मंगाली गांव की 5वीं तक पढ़ी सुलोचना और 7वीं पास अंगूरी देवी ने दो वर्ष पहले लकड़ी के मनके बनाने के लिए 11 महिलाओं को जोड़कर महिला समूह (तिलक) बनाया। उनके बनाए मनके पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के साथ-साथ चीन तक सप्लाई किए जाते हैं। अंगूरी देवी बताती हैं कि हमारा समूह एक माह में लकड़ी का खर्चा निकालने के बाद करीब डेढ़ लाख रुपए आमदनी करता है। प्रत्येक महिला दिन में काम कर 400 से 500 रुपए तक कमा लेती है। अब करीब चार माह पहले हमने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए बैंक से 1 लाख रुपए का ऋण भी लिया है।
बाजरे के बिस्किट से मिली पहचान, घर से हो रही बिक्री
पेटवाड़ गांव में रोशनी और किरन समूह हैं, इन समूहों में 10- 10 महिलाएं काम करती हैं। खास बात यह है कि इन समूह को बाजरे के उत्पादों ने पहचान दिलाई। समूह बाजरे के बिस्किट, लड्डू, मठिया बनाते हैं। महिलाओं ने बताया कि पहले तो दिक्कत आई मगर अब लोगों को बाजरे का स्वाद भा रहा है। हम इन उत्पादों को विश्वविद्यालयों, मेलों में भी लेकर जाते हैं ताकि लोग हमारे काम को समझें। पिछले दिनों दीपावली पर भी हमें आॅर्डर मिले। हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला ने भी 200 डिब्बों का आर्डर दिया था। अब हम बर्तन भी बनाने लगे हैं। अच्छा प्रतिफल मिल रहा है, हम घर बैठे ही पैरों पर खड़े हो रहे हैं।
शहरी आजीविका मिशन का हाल
रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण की तीन वर्ष की इस योजना के तहत कुल 1039 लाभार्थी जुटाए गए थे। 176 को प्रशिक्षण दिया गया और 176 का चल रहा है। लेकिन अभी किसी भी युवा को प्लेसमेंट नहीं मिल पाई है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में 103 सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए गए। 77 ने ऋण के लिए बैंक में आवेदन किया। 10 के लिए फंड रिलीज हुआ है।
ग्रामीण आजीविका मिशन
डेढ़ वर्ष की इस योजना के तहत 211 महिला सहायता समूह तैयार हुए। एक समूह में 15 महिलाएं रखी गईं। हैदराबाद व आंध्रप्रदेश के एक्सपर्ट इन्हें प्रशिक्षण देते हैं। 3 माह होने पर ही प्रशिक्षण पूर्ण माना जाता है। फिर 1 लाख रुपये का लोन ही मिलता है। ये समूह बाजरे के बिस्किट, लड्डू, मसाला, हैंडमेड प्रोडक्ट, आर्टीफिशियल फूल, गुलदस्ते, घर को सजाने का सामान, जूतियां, हाथ के पंखे, मनके और हुक्के की आकर्षक चिलम बनाते हैं।
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