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अस्थमा जैसी बीमारी के लिए जागरूक होना जरूरी : धवन

जिदंल अस्पताल के सीनियर चिकित्सक जानकारी देते हुए। हिसार | ग्रामीण क्षेत्र में चूल्हे के धुएं तथा खेतों में...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:15 AM IST
अस्थमा जैसी बीमारी के लिए जागरूक होना जरूरी : धवन
जिदंल अस्पताल के सीनियर चिकित्सक जानकारी देते हुए।

हिसार | ग्रामीण क्षेत्र में चूल्हे के धुएं तथा खेतों में पराली जलाने, तूड़ा बनाते समय ज्यादा मिट्टी धूल-कण से ग्रामीण क्षेत्र में लोग अस्थमा के शिकार हो रहे हैं। जब हम सांस लेते हैं तो नाक और मुंह से होते हुए वायु मार्ग से फेफड़ों तक जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। बलगम भी बनता है तो श्वास नालियों में और भी रुकावट हो जाती है। यह जानकारी जिंदल अस्पताल के सीनियर चिकित्सक डाॅ. पीएस धवन, डाॅ. अजंलि गुप्ता, डाॅ. इंद्रजीत खुराना, डाॅ. भूषण सुदर्शन बंसल, डाॅ. पुनीत गोयल ने अस्थमा दिवस के उपलक्ष्य में प्रेस वार्ता में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धूल और धुआं, सिगरेट का धुआं, फूलों का पराग, ठंडी हवा या मौसम में बदलाव, पटाखों का धुंआ, भावुक होने, ज्यादा तनाव में रहने या हंसना, कुछ पालतू जानवर कुत्ते, बिल्ली या चिड़ियां, तेज महक वाला परफ्यूम इत्यादि से अस्थमा की परेशानी होती है। इन कारणों से दूर रहकर अस्थमा से होने वाली परेशानी बच सकते हैं।

40% मरीजों को इनहेलर डिवाइस की सलाह दी

उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में लोग अस्थमा से ज्यादा पीड़ित हो रहे हैं। भारत में लगभग 90 फीसदी चिकित्सकों ने क्लीनिक में पहली बार होने वाले अस्थमा के कम से कम 40 फीसदी मरीजों को इनहेलर डिवाइस का प्रयोग करने की सलाह दी है। भारत में सांस संबंधी रोगों के मरीजों की देखभाल करने की सुविधाएं बढ़ाने के लिए नये-नये यूजर फ्रैंडली जांच के उपकरण और नये इनहेलर्स उपकरण विकसित की जा रहे हैं। इसके इस्तेमाल से किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। इस मौके पर मनदीप सिंह, गौरव, आनंद तनेजा व मनीष सोनी मौजूद थे।

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