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भागवत कथा को आत्मसात करने से सारे दुख हो जाते हैं दूर : शक्तिपुरी

जब भी स्वयं को दुख, कष्ट व संकटों से घिरा महसूस करें तो भागवत का सहारा लें। श्रीमद्भागवत कथा अवरोध मिटाने वाली...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:20 AM IST

भागवत कथा को आत्मसात करने से सारे दुख हो जाते हैं दूर : शक्तिपुरी
जब भी स्वयं को दुख, कष्ट व संकटों से घिरा महसूस करें तो भागवत का सहारा लें। श्रीमद्भागवत कथा अवरोध मिटाने वाली उत्तम साधन हैं। जो कोई भागवत का आश्रय लेता है वह कभी दुखी नहीं होता है। यह बात मतलोडा धाम के परम संत श्रीश्री 1008 श्री फूलपुरी महाराज की शिष्या एवं डेरा की महंत साध्वी शक्तिपुरी ने खोखा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कही। इससे पूर्व रविवार को शुरू हुई कथा से पूर्व भव्य कलश यात्रा निकाली गई, इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

कथा में श्रोताओं को कर्मों का सार बताते हुए साध्वी शक्तिपुरी ने कहा कि अच्छे और बुरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि भीष्म पितामह 6 महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे थे और सोच रहे थे कि उन्होंने कौन सा पाप किया। जिससे इतने कष्ट सहन करना पड़ रहे हैं। उन्होंने भागवान श्रीकृष्ण से पूछा। कि मैंने ऐसे कौन से पाप किए हैं कि बाणों की शैय्या पर लेटा हूं। कृष्ण उन्हें पुराने जन्मों को याद दिलाई। भागवान कृष्ण ने उन्हें बताते हुए कहा कि पिछले जन्म में जब आप राजकुमार थे और घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे, उसी दौरान आपने एक नाग को जमीन से उठाकर फेंका तो वह कांटों पर जा गिरा था परंतु 6 माह तक उसके प्राण नहीं निकले थे। उसी कर्म का फल है जो आप 6 महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे हैं। इसका मतलब है कि कर्म का फल सभी को भुगतना होता है। इसलिए कर्म करने से पहले कई बार सोचना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रीमद्भागवत कथा सुनने के साथ-साथ उस पर अमल भी करें। इस अवसर पर खोखा के ग्रामीणों के अलावा आसपास के गांवों से आए सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।

गांव खोखा में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा का श्रवण करते श्रद्धालु।

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