पालतू पशुओं से 9 घंटे से अधिक काम लेने पर पशुपालक पर होगी कार्रवाई

Jhajjar News - बहादुरगढ़ी की फैक्ट्रियों में भले ही श्रमिकों से 8 से लेकर 12 घंटे तक प्रदूषण भरे माहौल में काम लिया जा रहा हो, जिसे...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:30 AM IST
Bahadurgarh News - haryana news action will be done on livestock after taking more than 9 hours of pets
बहादुरगढ़ी की फैक्ट्रियों में भले ही श्रमिकों से 8 से लेकर 12 घंटे तक प्रदूषण भरे माहौल में काम लिया जा रहा हो, जिसे जानते हुए भी सरकार चुप हो, लेकिन अब एक जनयाचिका पर कार्रवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पशुओं के काम का समय निर्धारित कर दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने नगर परिषद और पंचायतों को आदेश दिए हैं कि वे 9 घंटे से अधिक पशुओं से काम लेने वाले पशु पालकों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करें। यह आदेश हाईकोर्ट ने सीआरआर/533/2013 करनैल सिंह व अन्य बनाम हरियाणा सरकार के केस की सुनवाई करते हुए दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार यह सुनिश्चित करें कि राज्य में सभी तरह के पालतू पशुओं से 9 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाए। इसके साथ पशु पालकों को सख्त आदेश दिए हैं कि वे किसी भी सूरत में तय समय के अतिरिक्त अपने पशुओं से काम न ले। इसके लिए सरकार ने डीसी और नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी व सचिव के साथ पंचायतों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया कि वे जिले में पशुओं से काम लेने वाले पशु पालकों की पहचान कर उनकी लिस्ट तैयार करें। पशु पालकों को लिखित में जानकारी दी जाए कि वे अपने पशुओं से 9 घंटे से अधिक काम न ले। इसके बावजूद भी कोई पशु पालक आदेशों की अवेहलना करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ पशु क्रुरता अधिनियम में सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अधिकारी समय-समय पर पशु आहार व उनके रहने का स्थान का निरीक्षण करते हुए अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भजेंगे।

बेसहारा पशुओं की जिम्मेदारी नगर परिषदों और पंचायतों की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने न केवल पालतु पशुओं के लिए समय सीमा निर्धारित की है बल्कि उन पशुओं की देखरेख के लिए भी जिम्मेदारी तय की है। इसके लिए संबंधित नगर परिषद के अधिकारी व पंचायत के नुमाइंदें बेसहारा पशुओं के लिए घर की व्यवस्था करेंगे। साथ ही उनके लिए खाने-पीने की व्यवस्था भी अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेजुबान पशुओं के रहने-सहने व हर तरह की जिम्मेदारी सरकार की है। इसलिए सरकार के अधिकारियों को इसके प्रति सजग रहना चाहिए।

पशु डॉक्टर रखेंगे पशुओं के स्वास्थ्य की जांच पर नजर : राज्य के सरकारी पशु चिकित्सकों को सरकार की ओर से आदेश दिए गए हैं कि वे बेसहारा पशुओं और पालतू पशुओं के इलाज की व्यवस्था करेंगे। अगर कोई व्यक्ति संबंधित पशु चिकित्सालय में पशु बीमारी की सूचना देता है तो उसके इलाज की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के डाॅक्टर की होगी। अगर इसमें भी कोई चिकित्सक कोताही बरतेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यातायात पुलिस रखे पशुओं का ख्याल : आदेशों में यातायात और संबंधित थाना पुलिस को भी निर्देश दिए हैं कि वे गाड़ियों में लगाए गए पशुओं को सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था करें। हाईवे और अन्य सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं की सुरक्षा करें। ताकि किसी वाहन की चपेट मेें आने से पशु की मौत न हो। इसके लिए एक लेन भी तय की जानी चाहिए। साथ ही बेसहारा पशुओं को संबंधित गोशाला और नंदी शाला में भेजने की व्यवस्था भी पुलिस को करनी होगी।


गाेशाला में पशु चिकित्सा पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुअा : बेरी | पशु पालन विभाग हरियाणा द्वारा पारंपरिक पशु चिकित्सा पद्धति पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत किसान सदन में गाेशाला वर्कर्स को दिया जा रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम आज संपन्न हो गया। पशु क्रुरता निवारण समिति के संयुक्त सचिव एवं मास्टर ट्रेनर डॉ. सुरेंद्र आर्य ने बताया की सभी प्रशिक्षण कर्ताओं ने बड़ी लगन के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सभी को यह बताया गया कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के चलते पारंपरिक पशु चिकित्सा पद्धति को अपनाना क्यों जरूरी है। दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से अथवा निर्धारित मात्रा से कम मात्रा में दवा लेने से पशुओं में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस उत्पन्न हो गया है जिसके चलते या तो दवाइयां बेअसर हो गई हैं या कम काम कर रही हैं जिसके चलते पशुपालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। एवं दुग्ध उत्पादन भी घट रहा है वर्तमान में स्थिति को देखते हुए पारंपरिक पशु चिकित्सा पद्धति को अपनाना अति आवश्यक हो गया है।

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