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पिता ने खेत में पैर गंवाकर भी नहीं खोया हौसला, तीनों बेटों को देश सेवा में भेजा, रमेश ने शहीद होकर नाम किया रोशन

Jhajjar News - जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में बुधवार को आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान शहीद हुए। इनमें झज्जर के खेड़ी जट्ट गांव के...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:30 AM IST
Dulhera News - haryana news father did not lose heart even after losing the feet in the field sent three sons to serve in the country ramesh named as a martyr roshan
जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में बुधवार को आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान शहीद हुए। इनमें झज्जर के खेड़ी जट्ट गांव के रमेश गुलिया भी शामिल थे। पिता खजान सिंह खेती करते समय स्वयं पैर गंवाने के बाद भी हौंसला नहीं टूटा। तीनों बेटों को देश सेवा के लिए भेजा, जिसमें रमेश ने शहीदी दे कर गांव खेड़ी जट्‌ट का किया नाम रोशन किया।शहीद रमेश कुमार सीआरपीएफ में बतौर एएसआई तैनात थे। उन्होंने 1990 में सर्विस ज्वांइन की थी। गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ गांव खेड़ी जट्ट में किया गया। शहीद के परिजनों ने बताया कि शहीद रमेश कुमार 15 दिन बाद ही छुट्टी पर घर आने वाले थे। बुधवार सुबह रमेश कुमार की अपने छोटे भाई संजय से फोन पर भी बात हुई थी। परिवार में उनकी प|ी सुनील देवी और दो बेटे हैं। अंनतनाग हमले में हरियाणा के बादली क्षेत्र के लाल एएसआई रमेश कुमार भी शहीद हो गए। बादली के शहीद को 15 दिनों के बाद अवकाश पर घर आना था। उसने एक दिन पहले ही अपने छोटे भाई को फोन करके घर आने की खुशखबरी दी थी। बुधवार रात रमेश के शहीद होने की खबर मिलते ही गांव खेड़ी जट्ट में मातम पसर गया। प|ी सुनील देवी का रो-रो कर बुरा हाल था। शहीद रमेश कुमार का बुधवार सुबह दस बजे उसके सबसे छोटे भाई संजय के पास फोन आया था अाैर रमेश ने घर परिवार की कुशल मंगल पूछने के बाद भाई संजय को बताया कि वह 15-20 दिन में छुट्टी पर आएगा।

खेड़ी जट्‌ट के एएसआई रमेश अनंतनाग में हुए शहीद : बेटे माेहित ने दी मुख्गानि, रमेश गुलिया को 15 दिनाें बाद छुट्टी पर आना था घर, छोटे भाई को फोन पर दी थी सूचना

पूरे सम्मान के साथ शहीद का शव गांव पहुंचा : सरपंच अभिमन्यु ने बताया कि शहीद रमेश गुलिया के शव को पूरे गांव और क्षेत्र के लोग डासा बॉर्डर से पूरे सम्मान के साथ गांव तक लेकर पहुंचे। बुधवार रात जिस समय से घर परिवार के लोगों और गांव के लोगों को यह पता लगा था कि रमेश कुमार आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए हैं उसी समय से गांव में गम का माहौल है। पूरा गांव शहीद रमेश कुमार के अंतिम दर्शनों के लिए व्याकुल दिखाई दिए।

राज्य सरकार देगी एक परिजन को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपए : सीआरपीएफ के एएसआई रमेश कुमार की शहादत पर पूरे प्रदेश को गर्व है। सीएम मनोहर लाल और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने उनकी शहादत को सलाम करते हुए ट्वीट कर परिजनों के प्रति संवेदनाएं जताई हैं। वहीं कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने सरकार की ओर से घोषणा की है कि प्रदेश सरकार शहीद के परिवार से एक आश्रित को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी।

खेड़ी जट्‌ट में शहीद रमेश कुमार के पार्थिव शव को लाते ग्रामीण। मुखाग्नि के बाद अंतिम प्रणाम करता बेटा मोहित।

शहीद का एक भाई सीअारपीएफ में अाैर दूसरा भाई पुलिस में तैनात : शहीद रमेश कुमार के अलावा दो अन्य भाई भी हैं एक भाई राजेश कुमार भी सीआरपीएफ में तैनात है। फिलहाल लखनऊ में तैनात है। तीसरे नंबर का भाई संजय औद्योगिक पुलिस में झज्जर में तैनात है। शहीद रमेश कुमार के पिता एक साधारण जमीदार खजान सिंह हैं। खेती के दौरान उनका एक पैर कट गया था उसके बाद भी उन्होंने तीनों भाइयों को देश सेवा के लायक बनाया और दो को सेना में तथा तीसरे को पुलिस ने भर्ती करवाया। शहीद रमेश कुमार की मां गिदोड़ी देवी और प|ी सुनील देवी है। शहीद रमेश कुमार का विवाह 1993 में गांव बरहाना में हुआ था।

शहीद रमेश के हैं दाे बेटे : शहीद रमेश गुलिया की शादी 1993 में बरहाना निवासी सुनील देवी के साथ हुई। रमेश के दो बेटे हैं बड़ा बेटा लगभग 23 साल का मोहित है और छोटा लगभग 20 साल का रोहित है। दोनों की शादी नहीं हुई है। शहीद एएसअाई के अंतिम संस्कार में सीअारपीएफ के अाईजी रणदीप दत्ता, डीअाईजी सुशील मिश्रा, कृषिमंत्री अाेपी धनखड़, सांसद अरविंद शर्मा,एसडीएम जगनिवास, नायब तहसीलदार प्रभुदयाल, डीएसपी अशाेक दहिया, डीएसपी रमेश गुलिया, एडवाेकेट अरविंद गुलिया, मा. मनराज गुलिया, खेड़ी जट्ट सरपंच अभिमन्यु, साेमबीर गुलिया, कुलदीप वत्स माैजूद थे।

गांव में हैं 40 फीसदी सैनिक : सरपंच

गांव के सरपंच और झज्जर सरपंच एसोसिएशन के प्रधान अभिमन्यु ने बताया कि इस गांव में लगभग 40 फीसदी परिवारों में कोई ना कोई सैनिक जरूर है। यहां के युवाओं ने फौजे के प्रति जो प्यार व सम्मान है वह अन्य क्षेत्रों के युवकों को भी फौज की तरफ आकर्षिक करता रहा है। गांव में वर्तमान में 10 से 15 फीसदी सैनिक कैसे हैं जो रिटायर हो चुके हैं, लेकिन नए युवकों में उत्साह भरने के काम में लगे है। 30 से 35 फीसदी अब भी सेना में कहीं न कहीं और किसी न किसी रूप में किसी पोस्ट पर तैनात हैं।

भारत माता की जयकाराें के साथ शहीद का शव गांव पहुंचा

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में बुधवार को आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के एएसआई रमेश कुमार गुलिया के पार्थिव शरीर को उनके गांव में लाने से पहले गांव व क्षेत्र के युवाओं ने हाथों में तिरंगे झंडे लेकर अपने हीरो का स्वागत किया। बाद में शहीद को सीआपपीएफ ने सलामी देकर उसके बेटों ने मुखाग्नि दी। उस इस दौरान हर आंख नम दिखाई दी। रमेश कुमार का वाहन गांव में आने से पहले ही ग्रामीण हाथों में तिरंगा लेकर खड़े हो गए थे। शव पहुंचते ही युवअाें में जोश भर गया और हर कोई भारत माता की जय के नारे लगाते दिखाई दिया। हर ओर शहीद अमर रहे की गूंज थी। गांव में उनके पार्थिव शरीर का सुबह से ही इंतजार किया जा रहा था जो शाम को पूरा हुआ। सीआरपीएफ असिस्टेंट कमाटेंडेंट सुनील कुमार की टीम शहीद एएसआई रमेश कुमार के पार्थिव शरीर को लेकर खेड़ी जट्ट गांव के अंदर पहुंचे। जहां प्रदेश के कृषि मंत्री अाेपी धनखड़ ने सरकार की तरफ सो घोषणा की कि गांव के सरकारी स्कूल का नाम रमेश कुमार के नाम से होगा। शहीद रमेश के दो बेटे हैं। मोहित बड़ा लडका है जोकि बीएससी कर चुका है। वहीं छोटा बेटा रोहित बीए फाईनल वर्ष में है। प|ी सुदेश देवी गृहिणी है।

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