पावर प्लांटों की राख का निपटान करने को एनजीटी ने मांगा जवाब

Jhajjar News - दो पावर प्लांटों के अस्तित्व में आने के साथ ही प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। पावर प्लांटों से निकलने वाली राखी की...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:50 AM IST
Jhajjar News - haryana news ngt responds to the disposal of ashes of power plants
दो पावर प्लांटों के अस्तित्व में आने के साथ ही प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। पावर प्लांटों से निकलने वाली राखी की समस्या पर एनजीटी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से हवा में राख के प्रदूषण व झज्जर के चीफ मेडिकल आॅफिसर से राख से लोगों के स्वास्थ्य पर असर संबंधी रिपोर्ट एक महीने में तलब की है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने वेदप्रकाश बनाम हरियाणा सरकार की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राख उत्पन्न करने वाली मैसर्ज एनटीपीसी अरावली पावर प्लांट व मैसर्ज झज्जर पावर प्लांट लि. सीएलपी इंडिया से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि दोनों ही प्लांटों में भारी मात्रा में राख का उत्सर्जन होता है, जिसके कारण क्षेत्र में वायु प्रदूषण है और इससे बीमारियों का खतरा है। ट्रिब्युनल ने हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की उस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है, जिसमें इन प्लांटों से भारी मात्रा में राख पैदा होने की बात सामने आई है। लोगों के स्वास्थ्य के विषय को गंभीरता से लेते हुए एनजीटी ने दोनों ही पावर प्लांटों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने यहां पैदा होने वाली राख की मौजूदा स्थिति, इनके निपटान, रखरखाव व इसके बारे में आगे की कार्य योजना के बारे में जवाब देने को कहा है।

छारा के हाईवे में मिट्टी भराव में डाल रहे फ्लाई ऐश।

हाईवे निर्माण में खपाई जा रही राख

राख एक बड़ी समस्या बनी है। प्लांट के आसपास की कुछ सीमेंट फैक्ट्रियां राख से ईंटों व ब्लॉक का निर्माण कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद राख का स्टाफ बराबर बना है। राख के ट्रकों की मूवमैंट के दौरान सड़क के आसपास के लोग परेशान रहते हैं। अब सांपला झज्जर हाइवे के निर्माण के दौरान छारा फ्लाईओवर के भरत में राख को खपाना शुरू किया गया है।

दो विभागों को सौंपनी होगी रिपोर्ट

एनजीटी के आदेशों पर दोनों पावर प्लांटों के अलावा प्रदूषण व स्वास्थ्य विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। सीएमओ को इस बात की जानकारी देनी है कि क्या राख के कारण किसी प्रकार से मानव जीवन पर असर या नहीं है। साथ ही हरियाणा राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को भी डायरेक्ट किया गया है कि वे इन प्लांटों के कारण यहां वायुमंडल में हवा की गुणवत्ता की जांच के साथ-साथ राख की निगरानी के बारे में रिपोर्ट दें।

फसलों को नुकसान पहुंचाती है राख

राख काे फ्लाई ऐश भी कहते हैं दरअसल बहुत ही मुहिम कंण है। जो खास तौर पर कोयला को जलाने पर बनते हैं। तेज तापमान के साथ ये हवा में उठती है, लेकिन बाद में यह ठंडी होकर हवा के रुख के मुताबिक धीरे धीरे जमीन पर गिरती है। इस प्रकार की राख में सिलिकन डाईआक्साइड और केल्सियम आक्साइड की खासी मात्रा होती है। जो मानव व फसलों को नुकसान पहुंचाती है।

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