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महाभारत काल में पांडवों ने बनाए थे कसुहन में सैनिकों के शिविर

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 04:10 AM IST

Jhajjar News - ऐतिहासिक एवं पौराणिक विशेषताओं वाला गांव है कसुहन। सदियों पहले काया शोधन तीर्थ से कसोधन होते हुए आज गांव को कसुहन...

Bahu News - haryana news pandavas were made in the mahabharata period camps of soldiers in kasun
ऐतिहासिक एवं पौराणिक विशेषताओं वाला गांव है कसुहन। सदियों पहले काया शोधन तीर्थ से कसोधन होते हुए आज गांव को कसुहन के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यहां पर काया शोधन तीर्थ में नहाने से चर्म के साथ-साथ शरीर के अन्य रोग भी दूर भी हो जाते थे। महाभारत काल में पांडवों द्वारा यहां पर सैनिकों के शिविर बनाए गए थे। युद्ध में सैनिकों के घायल होने के बाद सैनिक काया शोधन तीर्थ में नहाते थे तो उनके शरीर के घाव भर जाया करते थे।

शिक्षाविद रामचंद्र अत्री, सुरेश शास्त्री ने बताया कि महाराजा पटियाला जो कुष्ठ रोग से ग्रस्ति होने पर उनका जब किसी हकीम, वैध से उपचार नहीं हुआ तो वो पता चलने पर काया शोधन तीर्थ में नहाने आते थे। यहां नहाने से उनका कुष्ठ रोग ठीक हो गया। इसके बाद वो यहां जो मंदिर था, उसके लिए 18 रुपए एवं बंदरों के चने भेजते थे। खेड़ा तपा के गांव का ऐतिहासिक चबूतरा भी इसी गांव में है।

बताया जाता है कि दाड़न खाप, बिनैन खाप, कंडेला खाप के कसुहन चबूतरे के बाद बने हैं। यह गांव क्षेत्र के गांवों का सबसे बड़ा पुराना गांव है। इतना ही नहीं पहले जनसंख्या के हिसाब से भी यह गांव सबसे बड़ा गांव होता था। यहां पर नाग पंचमी के दिन मेला लगता है। जिसमें घोघड़िया नागदेव मंदिर में जाने से पहले घोघड़िया, कसुहन, कालता, भौंसला, रोज खेड़ा गांव के ग्रामीण यहां पर पूजा-अर्चना करते है।


ग्रामीणों के अनुसार कसुहन गांव व्यापार का केंद्र होता था। गांव को मिनी बाजार कहा जाता था। यूपी से यहां गुड़, शक्कर आते थे। यहां से गुड़ शक्कर आसपास के गांवों में जाते थे। महाराजा पटियाला की रियासत का बॉर्डर भी कसुहन गांव की सीमा पर था। गांव की बहू ओम प्रभा जैन संयुक्त पंजाब में मंत्री भी रही। जैन समाज की सबसे पहली जैन स्थानक भी इसी गांव में थी। गांव से अनेकों जैन साधु और साध्वी हुए है। कुरूक्षेत्र के साइन बोर्ड में गांव को शामिल किया गया है। शिक्षा के मामले में भी गांव अव्वल है। चार हजार के करीब की आबादी वाले गांव में 90 प्रतिशत साक्षरता दर है। क्षेत्र में ब्राह्मण बहुल गांव में कसुहन शामिल है।

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