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12420 किलो नाइट्रोजन डाई आॅक्साइड 600 केजी सल्फर डाई आॅक्साइड निकली

जिले में दिवाली के मौके पर 3000 हजार टन से अधिक पटाखे जलाए गए। इससे बने केमिकल स्मॉग ने लोगों के लिए आफत खड़ी कर दी। इन...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 03:12 AM IST
Jind - 12420 kg nitrogen dioxide 600 kg sulfur dioxide
जिले में दिवाली के मौके पर 3000 हजार टन से अधिक पटाखे जलाए गए। इससे बने केमिकल स्मॉग ने लोगों के लिए आफत खड़ी कर दी। इन पटाखों के जलाने से 12420 किलो नाइट्रोजन डाई आॅक्साइड व 600 किलो सल्फर डाई आॅक्साइड जैसी जहरीली गैसों के साथ-साथ 12150 किलो पोटैशियम आॅक्साइड सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर भी हवा में घुल गया।

बेशक इस बार जींद शहर में पटाखों की बिक्री के लिए प्रशासन की ओर से लाइसेंस जारी नहीं किए गए। बावजूद इसके शहर में देर रात तक पटाखों का शोर सुनाई देता रहा। हर साल शहर में पटाखों के लाइसेंस के लिए लगभग 150 लोगों द्वारा आवेदन किया जाता है। इसमें से 50 को ही लाइसेंस मिल पाता है। पटाखा विक्रेताओं की मानें तो लाइसेंस वाली दुकानों के अलावा शहर के गली-मोहल्लों में स्थित छोटी दुकानों पर पटाखों की बड़ी सेल होती है।

इस बार प्रशासन की ओर से केवल उचाना व सफीदों में ही पटाखों की बिक्री के लिए 25 लाइसेंस जारी किए गए थे। परंतु जिले का ऐसा कोई कोई शहर या गांव नहीं था जहां पर पटाखे न चलाए गए हों। एक अनुमान के अनुसार जिले में 3 हजार टन से अधिक पटाखे चलाए गए। इसके चलते जिले का वातावरण इतना प्रदूषित हो गया कि लोगों को मास्क पहन कर चलना पड़ा। वहीं सांस के रोगियों को बेहद परेशानी हुई।

3000 टन पटाखे जलाने से निकली गैसें

नाइट्रोजन डाई आॅक्साइड : 12 हजार 420 किलो

पोटैशियम आॅक्साइड एसपीएम : 12 हजार 150 किलो

सल्फर डाई आॅक्साइड : 600 केजी

पटाखे: प्रदूषण का गणित

पोटैशियम नाइट्रेट : 80 प्रतिशत

गन पाउडर : 10 प्रतिशत

चारकोल : 1 प्रतिशत

सल्फर : 1 प्रतिशत

सेल्यूलोज नाइट्रेट : 1 प्रतिशत

सोटरोंशियम कार्बोनेट : 1 प्रतिशत

कैल्शियम क्लोराइड : 1 प्रतिशत

सोडियम नाइट्रेट : 1 प्रतिशत

बेरियम क्लोराइड : 1 प्रतिशत

कॉपर क्लोराइड : 1 प्रतिशत

एल्युमिनियम मेटल : 1 प्रतिशत

कौन से रंग के लिए कौन सा केमिकल

सोटरोंशियम कार्बोनेट : लाल रंग

कैल्शियम क्लोराइड : संतरी रंग

सोडियम नाइट्रेट : पीला रंग

बेरियम क्लोराइड : हरा रंग

कॉपर क्लोराइड : नीला रंग

एल्युमिनियम मेटल : सफेद रंग

ये भी जानिए...







शहर में प्रदूषण का लेवल जानने के लिए लगेगा एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम



भास्कर न्यूज|जींद

जिले में फिलहाल प्रदूषण का क्या लेवल है। इसको जानने के लिए कोई भी मापक यंत्र नहीं है। दिनों-दिन बढ़ रहे प्रदूषण व एनजीटी बोर्ड (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बोर्ड) की गाइड लाइन के चलते अब शहर में जल्द ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मैनुअल एंबियट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लगने के बाद शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है या फिर कम हो रहा है। इसका पता तुरंत ही चल सकेगा। एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक प्राइवेट फर्म को ठेका दिया है। अगले एक माह के अंदर यह सिस्टम संबंधित फर्म द्वारा शहर में लगाया जाएगा। इस सिस्टम के लगने से पीएम 2.5 व पीएम 10 स्तर के अलावा सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड के एसपीएम स्तर का पता चल सकेगा।

लघु सचिवालय में लगना हुआ तय, मांगी एनओसी : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक शहर में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के लिए फिलहाल लघु सचिवालय साइट को तय किया गया है। इसके लिए संबंधित फर्म के कर्मचारी दौरा भी कर चुके हैं। यदि प्रशासन भी इसी जगह पर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) देता है तो फिर यहीं पर यह सिस्टम लगाया जाएगा। यदि प्रशासन द्वारा लघु सचिवालय में सिस्टम लगाने की एनओसी नहीं दी जाती तो फिर इसे शहर में दूसरी जगह जिसमें हमेटी, कृषि उपनिदेशक कार्यालय आदि जगह शामिल हैं। वहां पर इस सिस्टम को स्थापित किया जाएगा।

जींद. एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगेगा जो कुछ इस तरह का होगा।

सिस्टम लगने से होगा ये फायदा

शहर में एयर क्वालिटी सिस्टम लगता है तो उससे काफी फायदा होगा। जिले में पराली जलाने, पटाखे बजाने, ट्रैफिक व फैक्ट्रियों के चलने से प्रदूषण के स्तर में कितनी बढ़ोतरी होती है। इसका तुरंत ही पता चल सकेगा। यदि प्रदूषण का स्तर बढ़ा है तो फिर उसमें कमी लाने के लिए समय रहते प्रशासन या फिर सामाजिक संस्थाओं द्वारा कई तरह के कदम उठाए जा सकते हैं।

19 शहरों में लगेंगे यह मॉनिटरिंग सिस्टम

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Jind - 12420 kg nitrogen dioxide 600 kg sulfur dioxide
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