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खतरे को देख नरेश ने ली थी लाइसेंसी पिस्टल ठेकेदार के मना करने पर नहीं लाता था साथ

शराब पीने के लिए पानी नहीं देने पर नशेड़ी युवकों की गोली का शिकार बना नरेश सरकारी सेवा में जाना चाहता था। 4 फरवरी को...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 03:10 AM IST
शराब पीने के लिए पानी नहीं देने पर नशेड़ी युवकों की गोली का शिकार बना नरेश सरकारी सेवा में जाना चाहता था। 4 फरवरी को उसे अंबाला में रेलवे ट्रेडमैन पोस्ट के लिए परीक्षा के लिए जाना था। इसके लिए वह पिछले समय से तैयारी कर रहा था।

झील गांव निवासी 32 वर्षीय अविवाहित नरेश 12वीं पास था। वह अपने माता-पिता व दादा-दादी का इकलौता सहारा था। इसी पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाने के लिए वह सरकारी नौकरी की तलाश में था। परंतु नौकरी न मिलने के कारण वह पिछले करीब तीन साल से शराब ठेके पर कारिंदे की पार्ट टाइम जॉब कर रहा था लेकिन परीक्षा से पहले ही बदमाशों ने उसको गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया। जैसे ही नरेश के मर्डर का परिजनों को पता लगा तो वे बेहोश होकर गिर पड़े। जब तक गांव में डेडबॉडी नहीं पहुंची तब तक उसकी मां बीरमती रोते बिलखते कह रही थी मेरा नरेश मुझे छोड़कर कहीं नहीं जा सकता। ढांढस बंधा रही महिलाओं से बार बार पूछ रही थी कि मेरा नरेश आ गया क्या? इसी प्रकार बूढ़े दादा ताराचंद, दादी चंदो देवी का तो बुरा हाल किसी से देखा भी नहीं गया। डेडबॉडी को लेकर गांव पहुंचने पर पिता महाबीर फफक फफक कर रोते हुए बोले आज तो उनकी दुनिया उजड़ गई है। अब वे किसके सहारे जीएंगे। एक ही कमाने वाला था जो भी दुश्मनों ने नहीं छोड़ा।

4 फरवरी को अंबाला में रेलवे ट्रेडमैन पोस्ट के लिए नरेश को देनी थी परीक्षा

जींद. काठ मंडी ठेके में हुए मर्डर मामले में घटनास्थल पर कार्रवाई करती पुलिस।

रात को वारदात, फिर भी अगले दिन दोपहर को हुआ पोस्टमार्टम

शराब ठेके के कारिंदे नरेश की गोली मारकर हत्या करने की वारदात बुधवार रात करीब पौने 11 बजे को हुई थी। रात को ही पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में पहुंचा दिया था। सुबह करीब नौ बजे पुलिस ने सभी कागजात तैयार कर लिए थे। बावजूद इसके डाॅक्टरों ने दोपहर को पोस्टमार्टम किया। इस पर सिविल अस्पताल में पहुंचे पुलिस अधिकारी भी खफा दिखाई दिए। उनका कहना था कि डाॅक्टरों के पास जाते हैं तो वे कहते हैं फलां डाॅक्टर पोस्टमार्टम करेगा। परिजनों ने भी आरोप लगाए कि डॉक्टरों को पीड़ित परिवार की कोई चिंता नहीं है। ग्रामीण भूखे प्यासे रात से ही अस्पताल में डटे हैं। वहीं डाॅक्टरों का कहना था कि मामला मर्डर का होने के कारण वे पूरी प्रक्रिया के तहत ही पोस्टमार्टम करेंगे। शव के एक्स-रे व अन्य जांच भी कराई गई है, जिसकी वजह से समय लगा है।

पुलिस कई एंगल से जांच कर रही है : एसएचओ


मामूली बहस बन गई नरेश के लिए जानलेवा

कारिंदे नरेश को नहीं पता था कि पानी से मना करने की मामूली बहस उसके लिए जानलेवा साबित होगी। एक दिन पहले ही रेलवे रोड के पास ठेका से काठमंडी ठेके पर आए नरेश ने तो रूटीन में ही शराबियों को कहा था कि पानी बाहर से ले लेें। उसके बाद जब उन्होंने कहा कि पानी नहीं दे रहा तो तुझे देख लेंगे, इस धमकी को भी उसने गंभीरता से नहीं लिया। वह तो फिर भी ठेके को बंद करने से पहले कैश काउंट करने में जुटा था। तभी गेट पर आकर बदमाशों में से एक ने देसी कट्टे से गोली मार दी।

‘पिस्टल लिए होता तो बदमाशों को जवाब देता’

पिछले करीब तीन साल से शराब ठेकों पर कारिंदे की नौकरी करने वाला नरेश वैसे तो अपनी सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर दिखाई देता था। बाकायदा उसने लाइसेंसी हथियार लिया हुआ था लेकिन पिछले दिनों से वह ठेकेदार के कहने पर अपना हथियार घर पर ही रखा हुआ था। परिजनों को इस बात का पछतावा हो रहा है कि अगर उनका बेटा अपना हथियार लिए हुए होता तो बदमाशों को जवाब दे सकता था।