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पुत्र अाैर पुत्रवधू में अंतर न समझे सास : जैनाचार्य सुभद्र

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:45 AM IST

Jind News - जैनाचार्य सुभद्र मुनि ने एसएस जैन सभा बड़ौदा में चल रहे प्रवचनों में कहा कि सास, बहू का रिश्ता मां-बेटी की तरह होना...

Uchana News - haryana news do not understand the difference between son and daughter in law mother in law jnanacharya subhadra
जैनाचार्य सुभद्र मुनि ने एसएस जैन सभा बड़ौदा में चल रहे प्रवचनों में कहा कि सास, बहू का रिश्ता मां-बेटी की तरह होना चाहिए। सास को चाहिए कि वो पुत्रवधू को अपने पुत्र की तरह समझे। सास को चाहिए कि वो अपना जमाना याद करे, जब तुम्हें किस-किस बात का कष्ट होता था।

कम से कम अपनी बहू के साथ वो बातें न करें जब सास बहू थी उसे कष्ट होता था। दहेज, धन या सामान की मांग करना नीचता है। क्या तुम भिखमंगी बनोगी? जो बहू से बड़ा कोई धन नहीं है। जिसने अपनी बेटी आपको दे दी तो समझो सब कुछ दिया। इसलिए कभी भी धन, दहेज के लिए बहू को परेशान न करें। बहू से कोई गलती हो जाए तो उसे सुधारने की कोशिश करो न कि बहू को ताना देकर उसको परेशान मत करो। बहू के मां-बाप, भाई का नाम लेकर गाली देना, ताने कसना घर को नर्क बना देता है। इसलिए सास को चाहिए कि वो बहू को बेटी की तरह रखे। जैनाचार्य ने कहा कि बहू को चाहिए कि वो ससुराल में बड़ों की बातें ध्यान से सुने। मायके में अपनी मां की सेवा कर सकती है, ससुराल में अपनी सास की भी सेवा बहू को अपनी मां मान कर करनी चाहिए। केवल सुंदर रूप से कुछ नहीं होता।

जब तक आपके अंदर बड़ों की सेवा के संस्कार नहीं हैं तो आपके पढ़ने, सुंदरता का कोई फायदा नहीं है। बहू को याद रखना चाहिए उसे भी कभी सास बनना है। इसलिए कभी भी सास को परेशान न करें। परिवार में शांति होगी तो सब कुछ अच्छा होगा। परिवार में अगर अशांति होगी तो सब कुछ होते हुए भी अच्छा नहीं होगा। इस मौके पर मनोज जैन, प्रदीप जैन, सतीश बुडायन, शीलू, तेजवीर मौजूद रहे।

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