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कंगाल होने के बाद भी साहूकार के बेटे नरसी ने भरा अपनी बहन का भात

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 03:36 AM IST

Jind News - धर्मबीर सिंह सांगी द्वारा लिखे गए नाटक ‘नरसी का भात’ का मंचन शनिवार देर रात बरटा गांव में किया गया। नाटक में...

Narwana News - haryana news even after being poor his son narsi the son of the moneylender filled his sister39s rice
धर्मबीर सिंह सांगी द्वारा लिखे गए नाटक ‘नरसी का भात’ का मंचन शनिवार देर रात बरटा गांव में किया गया। नाटक में हरियाणवी बोली, वेशभूषा तथा हरियाणवी संवाद के जरिये शांति, प्रेम तथा भाईचारे का संदेश दिया। लोक नाटक में मुख्य अतिथि के रूप में रंगकर्मी सुमेर शर्मा ने शिरकत की। नाटक की कहानी में जूनागढ़ गुजरात में साहूकार के चार बेटे होते हैं। सबसे छोटे बेटे का नाम नरसी होता है। उस जमाने में सेठ के पास 56 करोड़ की माया होती है। उसमें से 12 करोड़ अपनी पोती हरनंदी के विवाह पर खर्च कर दी जाती है। बाद में सेठ अपनी माया अपने बेटों में बांट देते हैं। कुछ समय बाद नरसी की सारी माया खत्म हो जाती है। उसके पास कोई पैसा नहीं बचता, लेकिन वह ईमानदारी व सत्य का रास्ता नहीं छोड़ता। जब भात भरने की बात आती है तो वह भात भरता है। उसकी बहन बहुत खुश होती है। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार ईमानदारी बहुत बड़ी दौलत है। नाटक का मुख्य किरदार विकास विजयराज व निर्देशन मंजूबाला ने किया।

नरवाना. नरसी का भात में प्रस्तुति देते कलाकार।

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