एक इनोवेटर की मदद करना परोपकार से कम नहीं

Jind News - सेना में अपने कार्यकाल के दौरान, उसने जवानों का ऐसा कौशल देखा जिससे वे सर्वाधिक शत्रुतापूर्ण और दुर्गम इलाकों में...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:25 AM IST
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सेना में अपने कार्यकाल के दौरान, उसने जवानों का ऐसा कौशल देखा जिससे वे सर्वाधिक शत्रुतापूर्ण और दुर्गम इलाकों में भी जमीनी स्तर पर हालात को संभालते हैं। वे किसी भी परिस्थिति में खुद को ढाल लेते हैं, जिसमें लड़ाई और बिना-लड़ाई वाली स्थितियां होती हैं। कुदरती आपदा के दौरान फंसे लोगों को बचाकर निकालने के लिए अस्थायी रूप से पुल बनाने से लेकर उन तक खाना पहुंचाने के लिए वे अपना काम समय की मांग के हिसाब से बिना शिकायत बड़े ही इनोवेटिव तरीके से करते हैं। मेरी नजर में वे सदियों से सर्वश्रेष्ठ ग्रास-रूट लेवल के इनोवेटर्स बने हुए हैं। इसी विचार ने उसे सोचने पर मजबूर किया ऐसे और भी इनोवेटर्स गांव-कस्बों में होंगे जिनके बारे में हम वाकई कुछ भी नहीं जानते हैं।

इसी दौरान एक बार देश के नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन में एक सत्र के दौरान, वह यह देखकर हैरान था कि उसके मूल राज्य अविभाजित आंध्र प्रदेश से कोई इनोवेटर उनकी लिस्ट में नहीं था। यही कारण बना कि 2005 में अपने रिटायरमेंट के ठीक एक महीने के बाद, ब्रिगेडियर पी गणेशम ने ‘पल्ली सृजन (ग्रामीण इनोवेशन)' केंद्र की स्थापना कर दी। इसके बाद से ही इस केंद्र का इरादा गांवों में कुछ नया करने वाले लोगों और संबंधित हितधारकों के बीच एक सम्पर्क बनाना है। चूंकि उनकी पेंशन आजीविका के लिए पर्याप्त थी, इसलिए इस केंद्र में स्वैच्छिक काम करने पर जोर दिया गया। इस केंद्र ने सबसे पहले कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों के लिए ऐसे उपयोगी साधनों पर ध्यान दिया जिनसे रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान निकल सकता है। उनका ध्यान खासतौर पर अर्थव्यवस्था की सबसे निचली पायदान पर मौजूद गरीब लोगों के जीवन को आसान बनाने पर है।

हर तीन महीने में ‘पल्ली सृजन' केंद्र एक ‘शोध यात्रा' का आयोजन करता है जो तेलंगाना और आंध्र के विभिन्न गांवों तक पहुंचती है। वे सबसे पहले लोगों को कुछ इनोवेशन के ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन दिखाते हैं और फिर उनसे पूछते हैं कि क्या उनके पास भी ऐसा कुछ साझा करने के लिए है। हालांकि शुरुआती रुझान उम्मीद के हिसाब से कम ही होते हैं- यात्रा में पहुंचे युवा अपने आइडिया के बारे में बताने से झिझकते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी हंसी उड़ाई जाएगी, जबकि दूसरी ओर वरिष्ठ लोग गांव वालों को इसलिए कोसते हैं कि वे निठल्ले पड़े रहते हैं और कुछ नया नहीं करते। इसी कशमकश के बीच जब वे अपने कार्यक्रम का समापन कर रहे होते हैं तो, एक न एक व्यक्ति थोड़ा झिझकते हुए उन तक पहुंचता है और फिर धीरे से अपना आइडिया के बारे में बताता है। उन तक पहुंची पहली इनोवेशन में कपड़ों पर प्रेस करनी वाली इस्त्री में कोयले की बजाय, गैस का इस्तेमाल करना था। इसलिए, टीम ऐसा नया काम करने वाले व्यक्ति से मिलती है और उनके प्रोटोटाइप के बारे में गहराई से समझती है। उनके साथ जुड़ने वाले इनोवेटर्स वास्तव में ऐसे लोग हैं जिनकी भौतिकी और गणित की कोई पृष्ठभूमि नहीं है, लेकिन वे रोजमर्रा की परेशान करने वाली किसी समस्या का कारगर समाधान निकाल लेते हैं।

सिकंदराबाद के वायुपुरी में उनके दफ्तर बाहरी हिस्से में ग्रामीण इनोवेटर्स के बनाए कुछ उपयोगी नमूने प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है एक मोबाइल चार्जिंग यूनिट। आपने ऐसी यूनिट एयरपोर्ट पर और कई दफ्तरों में देखी होगी, लेकिन अंतर ये है कि यहां रखी यूनिट सोलर पैनल से चलती है। आप यहां आएं और किसी कार्यकर्ता से मिलने के लिए इंतजार करने के दौरान अपना फोन इस यूनिट में चार्ज कर सकते हैं और साथ ही देसी वाटर फिल्टर और कूलर से एक ग्लास ठंडे पानी आनंद ले सकते हैं। आपका मन चाहे तो यहां एक नारियल के पेड़ पर चढ़ने वाली मैटेलिक यूनिट की बड़े आराम से सवारी कर सकते हैं या पूराने स्कूटर इंजन से चलने वाली घास काटने की मशीन को देख सकते हैं।

वर्तमान में ‘पल्ली सृजन' के पास विकास की विभिन्न अवस्थाओं में करीब 200 इनोवेशन्स हैं, 26 प्रोडक्ट बिक्री के लिए तैयार हैं। इनके पास 24 पेटेंट हैं और 13 इनोवेटर्स को राष्ट्रपति सम्मान तथा दो को पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है। हर दो महीने में ये संस्था एक तेलुगू पत्रिका का प्रकाशन करती है जिसमें कम से कम चार इनोवेटर्स और उनके काम की कहानी होती है। अब तक इसके 67 संस्करणों का प्रकाशन हो चुका है। पिछले 14 वर्षो में उन्होंने इनोवेटर्स के लिए करीब 4 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता जुटाने में सफलता पाई है। आज वे कई लोगों को पेटेंट कराने में, राष्ट्रीय स्तर के इनोवेशन अवार्ड के लिए आवेदन करने और प्रदशर्नियों में भाग लेने में भी मदद कर रहे हैं। और, इन सभी के कारण उनकी बनाई गई किसी भी नई चीज को बाजार मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

फंडा ये है कि किसी इनोवेशन या नवाचार करने वाले एक व्यक्ति के आइडियो को साकार करने में मदद करने से ऐसे सैकड़ों लोगों की मदद हो सकती है जो उसी नाव में सवार है या वैसी ही परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। और, यह किसी परोपकार से कम नहीं।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

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