मोबाइल के माध्यम से पढ़ाई-लिखाई तो बढ़ी, लेकिन एकाग्रता हुई खत्म : प्रणीत

Jind News - स्कीम नंबर-5 स्थित जैन स्थानक में प्रवचन करते हुए मुनि प्रणीत ने कहा कि साधना के क्षेत्र में चंचलवृति खतरनाक साबित...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:00 AM IST
Jind News - haryana news reading through the mobile increased but concentration ended praneet
स्कीम नंबर-5 स्थित जैन स्थानक में प्रवचन करते हुए मुनि प्रणीत ने कहा कि साधना के क्षेत्र में चंचलवृति खतरनाक साबित हो सकती है जो साधक साधना करना चाहता है उसे अपनी चंचल प्रकृति को छोड़ना होगा। सच्चे साधक की निशानी होती है कि वह किसी भी स्थिति-परिस्थिति में अपनी चंचलता नहीं दिखाता। जैन आगमों में मन, वचन, काया से चंचलता होती है। मन की चंचलता मन को परेशान कर देती है। हमेशा वर्ण, गंध, रस रूप के आकर्षण के कारण मन एकाग्र नहीं हो पाता है। आज मोबाइल ने बच्चों की एकाग्रता पर बड़ा घात किया है।

मोबाइल के माध्यम से पढ़ाई-लिखाई तो बड़ी है लेकिन एकाग्रता खत्म हो गई है। गीता में कहा गया है कि अभ्यास वैराग्येन च चंचलता को रोकने के लिए वैराग्य और अभ्यास चाहिए। गुरु को पाने के लिए शिष्य को विनम्रता और गंभीरता की आवश्यकता होती है। गुरु का ज्ञान का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। मुनि ने एक इतिहास की घटना का वर्णन किया। आर्य भद्र वाहू स्वामी जो ज्ञान के भंडार थे। उम्र उनकी बढ़ती जा रही थी। संत समुदाय ने सोचा इतने बड़े ज्ञान इस दुनिया से चले गए तो इनका ज्ञान भी लुप्त हो जाएगा। क्यों न कोई योग्य मुनि उनके चरणों से ज्ञान रस पीकर धर्म की प्रभावना करे नजर दौडाई तो स्यूलिभद्र ऐसे संत है जो ज्ञान हासिल कर सकते है और भद्रवाहू से निवेदन किया कि आप इन्हें अपना अमूल्य ज्ञान दें। वो तैयार हो गए और ज्ञान सिखाने लगे। जैन इतिहास के अनुसार 10 पूर्वों को ज्ञान दे दिया एक बार उनकी बहनें स्यूलिभद्र के दर्शन हेतु आई और स्थूलिभद्र को मालूम पड़ा कि बहने दर्शन के लिए आईं हैं और अपनी लब्धि के प्रयोग से शेर का रूप बना लिया। उनकी बहनें डर गई। शायद भाई को शेर खा गया। जब यह बात भद्रवाद को मालूम पड़ी तो स्थूलिभद्र को ज्ञान देने से मना कर दिया क्योंकि उसने ज्ञान का दुरुपयोग किया।

बहनों को दूसरा रूप दिखाने की जरूरत नहीं थी। कहने का अर्थ है चंचलता साधक के लिए ज्ञान से वंचित रखती है। कथाा के दाैरान मनोज जैन, अमित जैन, प्रकाश जैन, आनंद जैन, मदन लाल जैन, पुनीत जैन, श्री निवास जैन, रामचन्द्र जैन आदि उपस्थित रहे। दूसरी ओर तेरापंथ सभा भवन में रितेश जैन की अध्यक्षता में आचार्य महाश्रमण का 46वां दीक्षा महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम का मंगलाचरण कांता मितल ने अपने भजन के माध्यम से किया। इस अवसर पर राजकिशन जैन, टेकचंद जैन, डॉ. सुरेश जैन, नारायण सिंह रोहिल्ला, नरेश जैन, राज जैन, अध्यक्ष रितेश जैन व भारी संख्या में लाेग माैजूद रहे।

जींद. तेरापंथ सभा भवन में आचार्य महाश्रमण के दीक्षा महोत्सव में मौजूद महिलाएं।

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