अच्छे और बुरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता : विकास दास

Jind News - जनकल्याण शिक्षा एवं सुधार समिति के तत्वधान में नगर के ऐतिहासिक महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर हाल में...

Mar 31, 2019, 04:46 AM IST
जनकल्याण शिक्षा एवं सुधार समिति के तत्वधान में नगर के ऐतिहासिक महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर हाल में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर तपोमूर्ति परमपूज्य विकास दास महाराज ने कहा कि भागवत का आश्रय करने वाला कोई भी दुखी नहीं होता है। अच्छे और बुरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है, इसलिए कर्म करने से पहले कई बार सोचना चाहिए। भागवत भाव प्रधान और भक्ति प्रधान ग्रंथ है। भगवान पदार्थ से परे है और प्रेम के अधीन है। प्रभु को मात्र प्रेम ही चाहिए। अगर भगवान की कृपा दृष्टि चाहते हैं तो उसको सच्चाई की राह पर चलना चाहिए। भगवान का दूसरा नाम ही सत्य है। सत्यनिष्ठ प्रेम के पुजारी भक्त भगवान के अति प्रिय होते हैं। कलयुग में कथा का आश्रय ही सच्चा सुख प्रदान करता है। कथा श्रवण करने से दुख और पाप मिट जाते हैं। सभी प्रकार के सुख एवं शांति की प्राप्ति होती है।

भागवत कलयुग का अमृत है और सभी दुखों की एक ही औषधि भागवत कथा है। इसलिए जब मौका मिले तब कथा सुनो और भगवान का भजन करो। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कर्मों के फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। जब काम की वजह से मनचाहा फल मिलता है, तब हम खुश होते हैं। अगर हमारी इच्छा के मुताबिक फल न मिले तो हम दुखी हो जाते हैं। कोई भी काम करने से पहले विवेक का उपयोग करके हमें यह जान लेना चाहिए कि ऐसा करना सही है या नहीं। अगर वह काम सही हो तो उसे नतीजे की फिक्र किए बिना पूरा मन लगाकर और उत्साह से करना चाहिए। कथा के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया।

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