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रोजाना चलती हैं 70 निजी बसें, स्पीड पर कंट्रोल नहीं, ड्राइविंग लाइसेंस की भी जांच नहीं

Jind News - जिले में पिछले 3 माह में प्राइवेट बस चालकों की लापरवाही से दो बड़े हादसे हो गए। 6 लोगों को इन हादसों में जान गंवानी...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:27 AM IST
Jind News - haryana news there are 70 private buses no control over speed no driving license checks
जिले में पिछले 3 माह में प्राइवेट बस चालकों की लापरवाही से दो बड़े हादसे हो गए। 6 लोगों को इन हादसों में जान गंवानी पड़ी। जबकि इतने ही व्यक्ति गंभीर चोट लगने से घायल हो गए। इतना कुछ होने के बाद भी प्रशासन या पुलिस ने भविष्य में प्राइवेट बसों से इस तरह के हादसे न हो। इन पर लगाम लगाने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

हादसे के बाद जो आम वाहन चालक के खिलाफ लापरवाही से ड्राइविंग करने का केस दर्ज होता है, वही बस चालकों के खिलाफ हुआ। इससे ज्यादा कोई भी कार्रवाई पुलिस या प्रशासन द्वारा नहीं की गई। प्रशासन ने कार्रवाई की है तो बिना परमिट के सवारियां ढो रही बसों पर की है। बस चालकों के लाइसेंस जांच, बस की फिटनेस व ओवर स्पीड पर कोई भी कार्रवाई पिछले दिनों में नहीं हुई। इससे सवाल उठ रहे हैं कि प्राइवेट बस चालकों की लापरवाही से हो रहे हादसों का जिम्मेदार कौन है। जिले में इस समय सहकारी समितियों की 70 बसें चल रही हैं। इन बसों के अधिकतर चालक सवारियों के उठाने के चक्कर में रोजाना तेज स्पीड से बसें दौड़ाते हैं। अधिकतर ड्राइवर भी इस दौरान अनट्रेंड होते हैं। इससे कब किस सड़क पर बड़ा हादसा हो जाए। इसकी हर समय संभावना बनी रहती है।

खानापूर्ति : हादसे के बाद बस चालक के खिलाफ लापरवाही से ड्राइविंग करने के केस दर्ज तक सीमित रहती है पुलिस कार्रवाई

प्राइवेट बसों से हो रहे हादसों की ये हैं 3 बड़ी वजह

1. निर्धारित रूट की बजाय दूसरे रूट पर चलना

प्राइवेट बस चालक मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में कई बार अपने रूट को छोड़कर दूसरे रूट पर जहां सवारियों की संख्या ज्यादा होती है उस पर रूट पर बसें चलाते हैं। ड्राइवर इस दौरान बस की तेज स्पीड रखता है ताकि वह जल्द से जल्द चक्कर पूरा कर सके।

2. अनट्रेंड ड्राइवर

प्राइवेट बसों पर जो ड्राइवर होते हैं उनमें अधिकतर अनट्रेंड होते हैं। काफी ऐसे ड्राइवर हैं जिनके पास बस चलाने के लिए जरूरी हैवी लाइसेंस तक नहीं होता। प्राइवेट बस मालिक कम वेतन देने के चक्कर में जल्दी-जल्दी ड्राइवरों को बदलते रहते हैं।

3. बस की तेज स्पीड होना

सवारियां उठाने के चक्कर में ड्राइवर पर तेज गति से बस चलाने का दबाव होता है। यदि उससे आगे कोई रोडवेज बस जा रही तो बस को तेज गति से दौड़ाया जाता है। इस दौरान पूरी तरह से खतरनाक ड्राइविंग होती है और और हादसा होने की संभावना बढ़ जाती है।

निजी बस चालक की क्यों नहीं होती वेरिफिकेशन

एडवोकेट विनोद बंसल बताते हैं कि स्कूल बस की समय-समय पर जांच होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में गाइडलाइन जारी की हुई है। इसी तरह से स्कूल बस चालक की पुलिस द्वारा वेरिफिकेशन की जाती है। उसके लाइसेंस की जांच होती है। लेकिन प्राइवेट बस चालकों की इस तरह से पुलिस द्वारा कोई वेरिफिकेशन नहीं की जाती। जबकि स्कूल बस की भांति प्राइवेट बस में भी काफी संख्या में सवारियां सफर करती है। इन सवारियों में छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग सब होते हैं।

हादसे में परमजीत को गंवाना पड़ा पूरा परिवार

8 अक्टूबर को प्राइवेट बस चालक की हुई लापरवाही से राजथल गांव के परमजीत को अपना पूरा परिवार गंवाना पड़ा। इस हादसे में उसके माता-पिता व बहन की मौत हो गई और अब वह अपने परिवार में अकेला बचा है। हादसे के बाद सदर थाना पुलिस ने बस चालक हिसार जिला के भैणी निवासी विनोद के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था लेकिन परमजीत को पूरा परिवार गंवाने के बाद भी कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई।

ओवर स्पीड से चलने वालों पर करेंगे कार्रवाई : मुनीष

प्राइवेट बसों की समय-समय पर चेकिंग की जाती है। ड्राइवरों के लाइसेंस भी जांचे जाते हैं। जिन बसों के कई बार चालान होते हैं उनके चालकों के लाइसेंस रद किए जाते हैं। प्राइवेट बसों के ओवर स्पीड से चलने पर लगाम लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस की सहायता से इंटरसेप्टर मशीन से जांच की जाएगी और जिसकी भी ओवर स्पीड मिलेगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - मुनीष नागपाल, आरटीए एवं एडीसी जींद।

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