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52 भट्ठा मालिकों ने नहीं अपनाई जिगजैग तकनीक

5 वर्ष पहले
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जिगजैग तकनीक नहीं आने पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 52 ईंट-भट्ठों को सील करने का निर्णय लिया है। जिगजैग तकनीक अपनाने के लिए विभाग द्वारा ईंट-भट्ठा संचालकों को दो बार मोहलत भी दी गई, लेकिन उसके बाद भी जिले के 150 ईंट-भट्ठों में से 52 ने जिगजैग तकनीक नहीं अपनाई है। ऐसे में अब विभाग कार्रवाई करेगा।

एनसीआर में आने के बाद प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए ईंट-भट्ठों पर सरकार ने जिगजैग तकनीक लगाने का निर्णय लिया था और इसके लिए ईंट-भट्ठा संचालकों को मोहलत भी दी गई थी, लेकिन आठ माह बीतने के बाद भी जिले के मात्र 98 ईंट-भट्ठा संचालकों ने ही जिगजैग तकनीक को अपनाया है, जबकि 52 ईंट-भट्ठे आज भी पुरानी तकनीक से चल रहे हैं। इस कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में अब विभाग ने भट्ठों का निरीक्षण कर उन पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। जींद जिला एनसीआर में आने के बाद ईंट-भट्ठा संचालकों को खाद्य आपूर्ति विभाग ने नवंबर में निर्देश जारी कर जिगजैग लगाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए ईंट-भट्ठा संचालकों को जनवरी तक का समय दिया गया था, लेकिन तब भी अधिकतर ईंट-भट्टा संचालकों ने जिगजैग तकनीक नहीं लगाई थी। इसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने जिगजैग लगाने के लिए ईंट-भट्ठा संचालकों को 30 जून तक का समय दे दिया। छह माह की अवधि भी बीत गई, लेकिन जिले के 52 ईंट-भट्ठा संचालकों ने इस अवधि के दौरान भी जिगजैग तकनीक नहीं अपनाई। ऐसे में अब विभाग ने ईंट-भट्ठों पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।

नहीं माने निर्देश
प्रदूषण को कम करने के लिए विभाग ने दिए थे ईंट-भट्ठा संचालकों को निर्देश, अब होंगे सील
क्या होता है जिगजैग में
भट्‌ठों में आमतौर पर ईंट पकाने के लिए छल्लियों में सीधी हवा दी जाती है। जिगजैग में टेढ़ी-मेढ़ी लाइन बनाकर हवा दी जाती है। इससे ईंधन कम लगता है। वैसे एक लाख ईंट पकाने में 26 टन कोयला खर्च होता है, जबकि इस तकनीक में 16 टन का ही खर्च है। जिगजैग तकनीक में ईंटों की गुणवत्ता अच्छी रहती है। साधारण विधि का इस्तेमाल करने पर भट्‌ठे में करीब 50 फीसद ईंट अव्वल निकलती हैं। इस तकनीक में 90 फीसद अव्वल ईंट होती हैं। इस तकनीक में कोयले की कम खपत होने से प्रदूषण भी कम होगा। अधिकारियों की मानें तो इस तकनीक का इस्तेमाल होने से प्रदूषण में 70 फीसदी कमी आ सकती है।

जल्द लगवाए जाएंगे जिगजैग : ढिल्लों
जिला जींद ईंट-भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान प्रवीण ढिल्लों ने कहा कि लगभग 100 ईंट-भट्ठों पर जिगजैग तकनीक लगा दी गई है जबकि कुछ पर बाकी है। नया सीजन शुरू होने से पहले सभी पर यह तकनीक लगवा दी जाएगी। अब ईंट-भट्ठों पर केवल दो-तीन दिन का काम है।

30 जून तक का दिया था समय, अब कार्रवाई
ईंट-भट्ठों पर जिगजैग तकनीक लगाने के लिए 30 जून तक का समय दिया गया था। 50 से अधिक ईंट-भट्ठा संचालकों ने तकनीक नहीं अपनाई। अब चेकिंग कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।\\\' -अनिल कुमार, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक, जींद

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