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निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 30 साल मुकदमा

निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 30 साल मुकदमा चला, अंत में पता चला कि केस करने वाली महिला काल्पनिक किरदार है ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 20, 2018, 02:35 AM IST

निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 30 साल मुकदमा चला, अंत में पता चला कि केस करने वाली महिला काल्पनिक किरदार है

बेंगलुरू का प्रॉपर्टी केस था; सुप्रीम कोर्ट ने गड़बड़ पकड़ी

पवन कुमार | नई दिल्ली

बेंगलुरू की एक जमीन का मामला 30 साल तक चला। जमीन को लेकर एक एजुकेशन सोसायटी और महिला लक्ष्मी के बीच विवाद था। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई हुई और अंत में पता चला कि याचिकाकर्ता महिला लक्ष्मी तो एक काल्पनिक किरदार है। असल में तो लक्ष्मी है ही नहीं। इन 30 सालों में लक्ष्मी को कभी किसी ने नहीं देखा। वो कभी कोर्ट के सामने भी नहीं आई। फिर भी हर अदालत में लक्ष्मी केस जीतती रही। सुप्रीम कोर्ट ने भी 2006 में लक्ष्मी के पक्ष में ही फैसला दिया। बाद में सोसायटी की अपील पर केस की दोबारा सुनवाई शुरू हुई, तब जाकर लक्ष्मी के बारे में खुलासा हुआ। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने लक्ष्मी के अस्तित्व पर खुलासा करते हुए बेंगलुरू की सेंट एनी एजुकेशन सोसायटी के पक्ष में फैसला दिया।

जस्टिस लोकुर ने कहा कि- "1989 से 1997 तक लक्ष्मी की पैरवी उसके पावर ऑफ अटॉर्नी बी श्रीरामुलु करते रहे। 1997 के बाद कोई नहीं आया। लक्ष्मी ने जब 1989 में पहली बार निचली अदालत में केस दायर किया था, तो उसकी उम्र 67 साल बताई गई थी। महिला की उम्र अब करीब 96 साल हुई। ऐसे में कहा नहीं जा सकता कि लक्ष्मी अब जिंदा होगी भी या नहीं? हमें तो लगता है कि ये महिला एक काल्पनिक किरदार है। 2009 में बेंगलुरू पुलिस ने भी अदालत की अवमानना के मामले में लक्ष्मी को ढूंढने का प्रयास किया था, लेकिन वो नहीं मिली।' इन्हीं बातों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा लक्ष्मी के पक्ष में दिए गए फैसले को रद्द कर कर दिया और साफ कह दिया कि- इस याचिका का यहीं निपटारा किया जाता है।

महिला को किसी ने नहीं देखा, कभी कोर्ट के सामने नहीं आई; फिर भी 30 साल तक हर अदालत में केस जीतती रही

11 साल से लक्ष्मी के पावर ऑफ अटॉर्नी भी अदालत नहीं आए

जस्टिस लोकुर ने अपने फैसले में कहा कि- "30 साल तक ये भ्रम कायम रहा कि लक्ष्मी नामक महिला इस केस की याचिकाकर्ता है। लक्ष्मी निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कभी सामने आई। पिछले 11 साल में तो उसके पावर ऑफ अटॉर्नी भी अदालत के सामने नहीं आए।’ लक्ष्मी की ओर से इस आधार पर केस दायर किया गया था कि बेंगलुरू के कौडेनाहल्ली की विवादित जमीन संरक्षित भूमि है। इसलिए सरकार ये जमीन सेंट एनी एजुकेशन सोसायटी के नाम नहीं कर सकती। इस दलील से लक्ष्मी जीतती भी रही।

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