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दिल की अदालत और अदालत में दिल का मिलना

कंगना रनौत बनाम रितिक रोशन मुकदमा अदालत में अब आखरी पड़ाव पर जा पहुंचा है। दोनों ने ‘कृष’ में एकसाथ अभिनय किया था।...

Danik Bhaskar | Mar 23, 2018, 02:55 AM IST
कंगना रनौत बनाम रितिक रोशन मुकदमा अदालत में अब आखरी पड़ाव पर जा पहुंचा है। दोनों ने ‘कृष’ में एकसाथ अभिनय किया था। महेश भट्‌ट के लिए अनुराग बासु ने ‘गैंगस्टर’ फिल्म में कंगना रनौत को पहला अवसर दिया था। फिल्म का नाम सही नहीं था क्योंकि यह प्रेमकथा है। बार डांसर और एक आरोपी लंबे समय तक साथ रहते हैं परन्तु उनका पहला शारीरिक संपर्क तब होता है जब आरोपी को पुलिस ने गोली मार दी है। उस दृश्य में दोनों की उंगलियां स्पर्श करती हैं।

कंगना ‘तनु वेड्स मनु’ के प्रदर्शन से स्टार बनीं और फिल्म के दूसरे भाग में उसने दोहरी भूमिकाएं अभिनीत की थीं। ‘क्वीन’ के प्रदर्शन के बाद कंगना शिखर श्रेणी की सितारा हो गईं। तीन फिल्मों की सफलता के बाद कंगना रनौत ने पटकथा लेखन में दखलअंदाजी करना शुरू किया। हंसल मेहता की ‘सिमरन’ असफल रही। इस फिल्म पर अमेरिकन कल्ट फिल्म ‘बोनी एंड क्लाइड’ का प्रभाव स्पष्ट नजर आता है। आजकल कंगना रनौत ‘मणिकर्णिका’ की शूटिंग कर रही हैं। फिल्म निर्माण के अंतिम चरण में है। झांसी की रानी की भूमिका निभाना कंगना रनौत के लिए कठिन नहीं होगा क्योंकि व्यक्तिगत जीवन में भी वे लड़ाकू हैं और एक अदृश्य तलवार उनके हाथ में रहती है। पहाड़ी क्षेत्र में जन्मी कंगना रनौत तीव्र गति से बहती नदी की तरह हैं जिसे कोई कूल किनारा बांध नहीं पाता। दोबारा विचार करने पर लगता है कि इंदिरा गांधी की भूमिका कंगना रनौत विश्वसनीय ढंग से अभिनीत कर सकती हैं।

स्टूडियो में प्रेम दृश्य अभिनीत करना आसान काम नहीं है। पूरी यूनिट देख रही होती है। यहां तक कि स्टूडियो की छत के निकट बंधे तराफे पर बैठा लाइटमैन भी सब कुछ देख रहा होता है। जिस समय मधुबाला और दिलीप कुमार के. आसिफ की ‘मुगले आजम’ में प्रेम दृश्य अभिनीत कर रहे थे, उस समय उनका एक प्रकरण अदालत में था और वे एक- दूसरे से बात भी नहीं करते थे। वे दृश्य बहुत प्रभावित करते हैं। ये दोनों की अदाकारी का करिश्मा है।

खबर है कि इन दिनों रितिक रोशन अपनी पूर्व प|ी सुजैन के साथ देखे जा रहे हैं। अत: अनुमान है कि वे पुन: विवाह कर सकते हैं परन्तु ऐसे में कंगना बनाम रितिक रोशन मुकदमे का फैसला उन्हें फिर एक-दूसरे से दूर कर सकता है। दरअसल प|ियां यह बात सबसे पहले भांप लेती हैं कि उनके पति का कहीं इश्क चल रहा है। किसी भी समारोह में या सड़क पर स्त्री को कोई घूरे तो वह उस दृष्टि की चुभन महसूस कर लेती हैं। ईश्वर ने उन्हें एक एंटिना दिया है जो हमें दिखाई नहीं देता। ईश्वर ने अपनी श्रेष्ठ कल्पनाशीलता व परिश्रम से नारी देह बनाई है और फिर थके मांदे सृष्टा ने पहाड़ व नदियां बनाई हैं। काम का समय समाप्त होने के चंद क्षण पूर्व ही पुरुष देह बनाई है।

इस मुकदमेबाजी की सुनवाई पर अभी तक दोनों पक्षों के वकील जाते हैं परन्तु फैसले के दिन दोनों को अदालत में मौजूद रहना होता है। अत: फैसले के दिन कंगना रनौत और रितिक रोशन फिर एक-दूसरे के सामने होंगे। फिर उनकी नजरें टकराएंगी और कभी उन्होंने एक-दूसरे से प्रेम किया है तो नजरों का यह मिलना सारी हकीकत बयां कर देगा। यह बताना कठिन है कि जज महोदय नजरों के पैगाम पढ़ सकेंगे या अपने ऊंचे सिंहासन से वे इस नजारे को देख नहीं पाएंगे। ये बात साहिर के लिखे ‘फिर सुबह होगी’ के गीत की याद ताजा करती है-

फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाही का गिला, देखिए आपने फिर प्यार से देखा मुझको। मैं कहां तक न निगाहों को पलटने देती, आपके दिल ने कई बार पुकारा मुझको। इस कदर प्यार से न देखो हमारी जानिब, दिल अगर मचल जाए तो मुश्किल होगी। एक यूं ही नजर दिल को जो छू लेती है, कितने अरमान जगाती है तुम्हें क्या मालूम।

जयप्रकाश चौकसे

फिल्म समीक्षक

jpchoukse@dbcorp.in