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उच्च शिक्षा में लड़कियों का नामांकन... इनमेंपुदुचेरी भी शामिल है। ये जानकारी शुक्रवार को जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन...

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 03:30 AM IST
उच्च शिक्षा में लड़कियों का नामांकन...

इनमेंपुदुचेरी भी शामिल है। ये जानकारी शुक्रवार को जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन(एआईएसएचई) 2016-17 में सामने आई है। इसके मुताबिक उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (जीईआर) 5 साल में करीब 19% बढ़कर 25.2% हो गया है। जीईआर 18-23 साल की उम्र के युवाओं की उच्च शिक्षा में नामांकन की दर है। सर्वे में उन छात्रों को शामिल किया गया है जो ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और रिसर्च (एमफिल या पीएचडी) कर रहे हैं या इस कोर्स में आवेदन किया है। सरकार ने 2020 तक उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो यानी जीईआर को 30% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 5 साल में 197 नई यूनिवर्सिटी खुलीं: रिपोर्ट में भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति के बारे में भी काफी जानकारियां दी गई हैं। इसके मुताबिक पिछले 5 सालों में उच्च शिक्षा में 56 लाख छात्र बढ़े हैं। इस दौरान देश में कुल यूनिवर्सिटीज की संख्या 667 से बढ़कर 864 हो गई है। पिछले 5 साल के दौरान देश में 4501 नए कॉलेज भी खुले हैं। इसके अलावा 10 राज्यों में महिलाओं के लिए 15 यूनिवर्सिटीज हैं।

आधारडेटा लीक की खबर...

सर्विसमें एक अरब आधार नंबर में से किसी की भी जानकारी देने का दावा किया गया है। अखबार की रिपोर्टर रचना खैरा ने खरीदार बनकर सर्विस ली। वहीं यूआईडीएआई ने कहा है कि यह रिपोर्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं है। एक अवैधानिक काम की जांच के लिए कार्रवाई शुरू की गई है। 3 जनवरी को अखबार में प्रकाशित एक खबर में कहा गया था कि 500 रुपए खर्च करने पर आपको महज दस मिनट में एक अरब लोगों के आधार कार्ड की जानकारी मिल सकती है।

मीडियासंगठनों ने किया विरोध : एडिटर्सगिल्ड ने कहा है कि रिपोर्टर ने जनहित में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए खबर छापी। आधार की देखरेख करने वाली संस्था को चाहिए कि वो रिपोर्टर पर केस करने की बजाय इसकी जांच कराए। उधर, ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने कहा, ‘अगर सरकार इसी तरह विरोध में मुकदमा दर्ज करती रही तो देश से पत्रकारिता खत्म हो जाएगी।’

सरकारकी मंशा की कलई खुली : कांग्रेस : कांग्रेसप्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्विटर के जरिये कहा कि निजता को लेकर मोदी सरकार की मंशा की कलई पूरी तरह से खुल गई। सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने आधार डेटा लीक की बात स्वीकार की थी। अब जांच-पड़ताल करने के बदले मोदीजी ने संवाददाता को निशाना बनाया है।

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