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385 साल पहले गैलिलियो के पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के दावे को विद्रोह माना गया था

1633- आज ही के दिन दार्शनिक और प्रोफेसर गैलिलियो रोम आए थे। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, चर्च ने उनके इस सिद्धांत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 13, 2018, 04:20 AM IST

1633- आज ही के दिन दार्शनिक और प्रोफेसर गैलिलियो रोम आए थे। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, चर्च ने उनके इस सिद्धांत को विद्रोह कहा और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की। अप्रैल में मुकदमा शुरू हुआ। गैलिलियो ने हल्की सजा पाने के लिए चर्च के सामने अपना गुनाह भी स्वीकार किया। इसके बाद फ्लोरेंस में उन्हें उनके घर में नजरबंद कर दिया गया। इसी पहरे के दौरान उनकी आठ जनवरी 1642 को मौत हो गई। पीसा में जन्मे गैलिलियो ने रोमन दार्शनिक अरस्तू के उस सिद्धांत को गलत साबित किया था, जिसमें कहा गया था कि ऊपर से गिरने वाली चीज की गति उसके वजन पर आधारित होती है। पीसा की झुकी मीनार से हल्की और भारी चीजें साथ गिरा कर गैलिलियो ने इस सिद्धांत को गलत साबित किया। गैलिलियो ने कहा- सूर्य सौर मंडल का केंद्र है और पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। इस पर पोप ने गैलिलियो को ईश्वर विद्रोही करार दे दिया

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