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10 स्कूल अपग्रेड : 3 हजार बच्चों को 10-12 किमी सफर से छुटकारा

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:40 AM IST

स्कूल - 8वीं से 12वीं हुआ फायदा - आठ गांवों के 900 बच्चे महमूदपुर स्कूल - 10वीं से 12वीं अपग्रेड फायदा - छह गांव के 225...
स्कूल - 8वीं से 12वीं हुआ

फायदा - आठ गांवों के 900 बच्चे

महमूदपुर

स्कूल - 10वीं से 12वीं अपग्रेड

फायदा - छह गांव के 225 बच्चों को

कसान

स्कूल - 10वीं से 12वीं हुआ

फायदा - तीन गांव के 250 बच्चे

फतेहपुर

कन्या स्कूल - 10वीं से 12वीं

फायदा - 120 लड़कियां

सिरटा

स्कूल - 10वीं से 12वीं

फायदा - 2 गांव व 5 डेरों के 300 बच्चे

पापसर

स्कूल - 10वीं से 12वीं

फायदा - चार गांव के 200 बच्चे

टटियाणा

स्कूल - 10वीं से 12वीं हुआ

फायदा - चार गांव के 180 बच्चे

लदाना चक्कू

स्कूल - 10वीं से 12वीं

फायदा - 150 बच्चे

देवबन

कन्या स्कूल - 10वीं से 12वीं

फायदा - चार गांव के 450 बच्चे

लेंडरकीमा

स्कूल - 8वीं से 12वीं हुआ

फायदा - आठ गांव के 310 बच्चे

जिले में स्कूल

जिले में 597 राजकीय स्कूल हैं। इनमें से 378 प्राइमरी, 73 मिडल, 53 हाई व 93 सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं।

1,09,295 बच्चों के दाखिले



भास्कर न्यूज | कैथल। प्रदेश के अपग्रेड हुए 79 स्कूलों में 10 कैथल जिले के हैं। दो स्कूल मिडल से सीनियर सेकेंडरी और आठ हाई से सीनियर सेकेंडरी बनाए गए हैं। इनमें तीन स्कूल ऐसे शामिल हैं जो छोटी-मोटी खामियों के कारण मई 2017 वाली लिस्ट में आने से रह गए थे। 10 स्कूलों के अपग्रेड होने से 3085 बच्चों को 10 से 12 किलोमीटर का सफर करने से छुटकारा मिलेगा। स्कूल अपग्रेड होने के बाद अब चार गांवों के बच्चों को पंजाब में पढ़ने नहीं जाना पड़ेगा वहीं पंजाब के दो गांवों के बच्चे इनमें से एक स्कूल में आएंगे।

इन गांवों के बच्चों को पढ़ने के लिए अब नहीं जाना पड़ेगा दूर

रुकती थी रिश्ते की बात, गांव में 8वीं से ज्यादा पढ़ी लड़की नहीं

ब्लॉक सीवन के बाजीगर बाहुल गांव पहाड़पुर का स्कूल आठवीं से अपग्रेड होकर 12वीं तक हो गया। ग्रामीणों की 22 साल पुरानी मांग पूरी होने पर गांव में जश्न मना। स्कूल अपग्रेड होने से गांव के 450 बच्चों को फायदा होगा। सरपंच प्रतिनिधि गुलाब सिंह ने बताया कि गांव में आठवीं तक स्कूल है। जमाने को देखते हुए परिजन अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए गांव से बाहर नहीं भेजते हैं। गांव में रहने वाले किसी भी परिवार में कोई भी लड़की 12वीं पास नहीं है। ‘लड़की 8वीं पास है’ सुनते ही रिश्ता लेकर आने वाले मना कर देते थे। ऐसा अधिकतर परिवारों के साथ हुआ है। अब ऐसा नहीं होगा, हर बेटी को 12वीं तक पढ़ाएंगे और उनके लिए रिश्ता ढूंढते समय वे लड़कों की क्वालीफिकेशन पूछेंगे। पहाड़पुर के अलावा सैर, जनेदपुर, उमेदपुर, प्रभोत, चक्कूलदाना, हरनोला, रामबागपुर के बच्चे पढ़ने आएंगे।

पहाड़पुर

पंजाब के समाना में भेजना मजबूरी, दोबारा हरियाणा में दाखिला लेने पर भाषा की दिक्कत

महमूदपुर गांव के सरपंच प्रभजीत सिंह ने बताया कि गांव के नजदीक समाना के स्कूल में बच्चे पढ़ने जाते हैं। वहां पंजाबी भाषा का प्रयोग होता है। बच्चों को पंजाब में पढ़ने और दोबारा हरियाणा में दाखिले के लिए माइग्रेसन सर्टिफिकेट बड़ी चुनौती रहती है। बच्चों को 20 किलोमीटर दूर पंजाब जाना पड़ता था। महमूदपुर के अलावा अजीमगढ़, डेरा गोबिंद नगर, गढ़ी नजीर, मलिकपुर व शादीपुर के बच्चे पढ़ने आएंगे।

महमूदपुर

पंजाब के दो गांवों से भी पढ़ने आएंगे बच्चे

लेंडरकीमा गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए करीब 10-12 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। इससे आसपास के आंधली, कसोर, लेडरपीरजादा, धर्मपुरा, माजरा, बैर साहब, अरनो गांव के बच्चों को तीन किलोमीटर में स्कूल मिलेगा। सरपंच चरणजीत कौर का कहना है कि पंजाब के दो गांव एक किलोमीटर दूर गांव बैर साहब व डेढ़ किलोमीटर दूर गांव अरनो को भी लाभ होगा।

लेंडरकीमा

1983 से कर रहे थे मांग, 2018 में हुई पूरी

सिरटा गांव की सरपंच पार्वती शर्मा ने बताया कि सरपंच बनने के बाद उनका पहला प्रयास शिक्षा को बढ़ावा देना था। उस पर गांव ने सहयोग दिया। सरपंच प्रतिनिधि कुलदीप ने बताया कि उनके गांव में 1983 में उनके स्कूल को 10वीं तक बनाया था। उस समय क्षेत्र के लोगों ने स्कूल 12वीं तक बनाने की मांग की थी। जो अब 2018 में पूरी हुई है।

सिरटा

तीन गांव के सरपंच 3 बार डायरेक्टर से मिले

देवबन गांव के सरपंच राजेंदर फौजी ने बताया कि वे सारन व खेड़ी के सरपंच को साथ लेकर तीन बार डायरेक्टर से मिलकर परेशानियां बताकर आए। उनकी मेहनत सफल हो गई। देवबन, सारन, खेड़ी व तितरम गांव के 400 बच्चों को फायदा होगा।

देवबन

वोकेशनल सेंटर हुआ था बंद, 10 साल बाद हुआ 12वीं

कसान के सरपंच दिलबाग लैलर ने बताया कि उनके गांव में पहले वोकेशनल सेंटर (वीआई) चलती थी। 2008 में वीआई बंद होने के बाद गांव में स्कूल की मान्यता 10वीं रह गई। इसके बाद 10 साल बाद अब गांवों में 12वीं आई है। कसान के अलावा तारागढ़ गांव से भी बच्चे पढ़ने के लिए आएंगे।

कसान

इन गांवों के स्कूल हुए अपग्रेड

स्कूल बच्चे

प्राइमरी 43,654

मिडल 31,684

सीनियर सेकेंडरी 33,957

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