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डीसी ने एक माह पहले ईओ को सस्पेंड करने की दी थी चेतावनी, लेकिन पब्लिक टॉयलेट अब भी बदहाल

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:15 AM IST

शहर में 16 स्थानों पर रखे फेब्रिकेटेड पब्लिक टॉयलेट की नगर परिषद सुध नहीं ले रहा है। इस कारण टॉयलेट की स्थिति बदहाल...
शहर में 16 स्थानों पर रखे फेब्रिकेटेड पब्लिक टॉयलेट की नगर परिषद सुध नहीं ले रहा है। इस कारण टॉयलेट की स्थिति बदहाल है। आज भी न सफाई और न पानी का प्रबंध है। पानी व सफाई का प्रबंध न होने से लोगों ने इनका प्रयोग करना बंद कर दिया है। इस कारण लोग खाली स्थानों का प्रयोग करने को मजबूर हैं।

जबकि प्रशासन ने महीनों पहले शहर को ओडीएफ घोषित कर दिया है, जो मात्र कागजों तक ही सीमित है। पुराने अस्पताल के पास रखे छह पब्लिक टॉयलेट की हालत उसके खुले दरवाजे ही बताते हैं। यहां न पानी है और न ही सफाई का कोई प्रबंध। टैक्सी चालकों ने इन्हीं टॉयलेट को लेकर 29 दिसंबर को डीसी सुनीता वर्मा को शिकायत की थी। डीसी उस समय शहर का दौरा करते हुए यहां पहुंची थी। टैक्सी चालकों ने सफाई व पानी न होने की शिकायत की थी, जिस पर डीसी ने वहां मौजूद ईओ विक्रम सिंह व अन्य अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी। उसी दिन डीसी ने ईओ को ये कहते हुए कि आपके बस का यह काम नहीं है। इन टॉयलेट को ठेके पर दो, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके। इन आदेशों को आज एक माह से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन आज तक आदेशों की पालना नहीं हो सकी है। इससे साफ है कि अधिकारियों को आम पब्लिक से जुड़ी समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। बेशक अभी तक टेंडर नहीं हो सका है, लेकिन नपा अधिकारियों यह जिम्मेदारी तो बनती है कि इन टॉयलेट का रख-रखाव किया जाए, ताकि लाखों रुपए के फेब्रिकेटेड टॉयलेट कचरे के डिब्बे में न तबदील हो जाएं।

तकनीकी कारण या आपसी तालमेल की कमी : डीसी के आदेश के 10 दिनों बाद ही 19 जनवरी को 16 फेब्रिकेटेड टॉयलेट व चार मोबाइल टॉयलेट का टेंडर एमई रमेश वर्मा के कैमरे में मेनुअल खोला गया। बताया गया कि सालाना 19 लाख रुपए नगर परिषद ठेकेदार को साफ-सफाई व उचित रख रखाव के लिए देगी। इससे शहरवासियों को परेशानी नहीं होगी, लेकिन आज तक इसका वर्क ऑर्डर नहीं दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि टेंडर खोलने की ऑन लाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। जिससे पूरी प्रक्रिया रुक गई है। इसके पीछे तकनीकी कारण बताया जा रहा है। अब फिर से इस टेंडर को रिकॉल किया जाएगा। शहरवासियों के लिए यह समझना कठिन हो रहा है कि यहां तकनीकी कारण ही समस्या है या अधिकारियों का आपसी तालमेल ठीक नहीं है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।

कैथल | पानी की कमी के कारण गंदे पड़े पुराने हॉस्पिटल के साथ लगे टॉयलेट।

छह करोड़ के विकास कार्य भी तकनीकी कारणों से रुके

जनवरी माह में ही शहर के 14 वार्डों में सीएम ग्रांट सहित लगभग छह करोड़ के विकास कार्यों के टेंडर खोले गए। मेनुअल टेंडर खोलने तक तो सब ठीक था, लेकिन ऑन लाइन टेंडर खुल नहीं सके। यहां भी तकनीकी कारण बताया गया। ये टेंडर भी अब रिकॉल करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे पार्षदों में भी निराशा है। पहले से ही शहर विकास में पिछड़ा हुआ है। अगर इसी प्रकार तकनीकी कारणों से टेंडर रद्द होते रहे तो विकास हो नहीं पाएगा। नपा सचिव कुलदीप मलिक ने बताया कि तकनीकी कारणों के चलते टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। अब सब ठीक है। टेंडर प्रक्रिया फिर से शुरु कर दी गई है। पब्लिक टॉयलेट की स्थिति को वे स्वयं चैक करेंगे। शहरवासियों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।

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Web Title: डीसी ने एक माह पहले ईओ को सस्पेंड करने की दी थी चेतावनी, लेकिन पब्लिक टॉयलेट अब भी बदहाल
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