अच्छे-बुरे की पहचान मनुष्य के विवेक पर निर्भर: हरिप्रिया

Kaithal News - श्री कपिल मुनि मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास आचार्य हरिप्रिया ने भागवत में वर्णित...

Mar 18, 2019, 02:47 AM IST
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श्री कपिल मुनि मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास आचार्य हरिप्रिया ने भागवत में वर्णित गुरु दीक्षा, भगवान का स्वधाम में गमन, कलियुग का वर्णन तथा राजा परीक्षित की परम गति से श्रोताओं को अवगत करवा कर कथा की समाप्ति की।

आचार्य हरिप्रिया ने कहा कि आत्मा ही आत्मा की गुरु है। ईश्वर ने कृपा करके मानव को इस नश्वर संसार में भेज दिया पर अच्छे, बुरे, सत्य असत्य, ज्ञान, अज्ञान की पहचान स्वयं मनुष्य के विवेक पर छोड़ दी। उद्धव जी ने जब भगवान को कहा कि यदुवंश का नाश होने वाला है। वे भी प्रभु के साथ उनके धाम चलेंगे। भगवान ने उद्धव का मोह भंग करते हुए कहा कि क्या तुम मेरे साथ आए थे जो तुम मेरे साथ जाओगे। इस नश्वर संसार में मनुष्य अकेला ही आता है तथा अकेला ही जाता है। भगवान ने कहा कि उद्धव मैने तो अपना संग देकर तुम पर कृपा की है। अब तुम स्वयं पर कृपा करो। जब अजामिल जैसे पापी पर भी कृपा की तो फिर तुम तो कृपा के सही पात्र हो।

कथा व्यास ने कहा कि प्रभु संग से वंचित होने की कल्पना से ही सिहर उठे उद्धव ने कहा कि प्रभु आपके बिना आत्म तत्व का ज्ञान मुझे कौन देगा। इस पर भगवान ने कहा कि वैसे तो उन्होंने कई प्रकारों के शरीरों का निर्माण किया है। मनुष्य शरीर उन्हें सबसे प्रिय है। उन्होंने कहा कि मनुष्य शरीर में जीव तीक्ष्ण और एकाग्र बुद्धियुक्त हो ईश्वर का साक्षात अनुभव कर सकता है। भगवान ने उद्धव को यदुराजा व दतात्रेय का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि दीक्षा गुरु एक होता है। शिक्षा गुरु अनेक हो सकते हैं। इस संसार में उन्होंने 24 गुरुओं जिनमें धरती, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चंद्र, सूर्य, कबूतर, अजर, समुद्र, पतंगा, भ्रमर, हाथी, मधुमक्खी, स्पर्श, रस, वेश्या, कुररी पक्षी, बालक, लोहार, सर्प, मकड़ी तथा कीटक से ज्ञान की प्राप्ति की है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त के आचार व्यवहार को गुरु मान कर उसे अपने जीवन में उतारने से स्वयं को दिशा दी जा सकती है।

श्रीकृष्ण ने उद्धव को समझाते हुए कहा कि सत्संग से पशु, पक्षी तक का जीवन भी सुधर सकता है। भगवान ने कहा कि बंधन व मोक्ष शरीर के नहीं बल्कि मन के धर्म हैं। जीव कर्मों में बंधा हुआ है तथा ईश्वर नित्यमुक्त है। भगवान ने कहा कि जीव वैसे तो मेरा ही अंश है। उसके बावजूद भी वह माया में बंधा रहता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में केवल नाम ही जीव को मुक्ति प्रदान कर सकता है। भगवान ने उद्धव को ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ व संन्यास आश्रमों के धर्म भी समझाए।

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा जी की आकर्षक झांकी।

श्री कपिल मुनि धाम परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का आनंद लेते श्रद्धालु।

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