बौद्धिक रीति रिवाज से बिना दहेज की शादी

Kaithal News - कलायत | सादगीपूर्ण माहौल में बौद्धिक रीति-रिवाजों से बिना दहेज बड़सीकरी के दिल्ली पुलिस में तैनात खुशीराम...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:00 AM IST
Kalayat News - haryana news intellectual rituals without marriage dowry
कलायत | सादगीपूर्ण माहौल में बौद्धिक रीति-रिवाजों से बिना दहेज बड़सीकरी के दिल्ली पुलिस में तैनात खुशीराम धानियां और उत्तर प्रदेश के बाजू गांव की ज्योति के साथ परिणय सूत्र में बंधे। विवाह कार्यक्रम में बौद्धाचार्यों ने नव दंपती को जीवन भर साथ रहने की शपथ दिलाई। बौद्ध रीति-रिवाजों में कुंडली मिलाने के बजाए वर व वधू पक्ष की सहमति ली जाती है। इस पद्धति में तिलकोत्सव, ओली, तेल भराई, मंडप व कन्यादान आदि रस्में नहीं होती। भंते नरेश रंगा ने करीब एक घंटे की अवधि में विवाह संपन्न कराया। द्वारचार के बाद संत रैदास, गौतम बुद्ध और संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के सामने मोमबत्ती जलाई गई। दुल्हन के िता कालाराम ने दूल्हे के पिता पंजाब सिंह को कन्या समर्पित की। रिश्ता स्वीकार होने के बाद आगे की रस्में हुईं। वर-वधू को त्रिसरण व पंचशील का पाठ सुनाया गया। सात फेरों की बजाय वर-वधू को शपथ दिलाई गई।

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