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सरपंची के दौरान बांटे थे गरीबों को प्लाॅट, बाद में खुद ही अवैध कब्जे की शिकायत दी, अब प्रशासन ने 348 मकान खाली करने का नोटिस भेजा

Kaithal News - खेड़ी रायवाली के 70 फीसदी लोगों यानी 348 मकानों को अवैध बताकर खाली करने का नोटिस प्रशासन ने भेजा है। इनमें से 240 को...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:20 AM IST
Dhand News - haryana news sarpanchi distributed the plots to the poor later complained of illegal possession now the administration sent a notice to evacuate 348 houses
खेड़ी रायवाली के 70 फीसदी लोगों यानी 348 मकानों को अवैध बताकर खाली करने का नोटिस प्रशासन ने भेजा है। इनमें से 240 को कमिश्नर ने छह महीने की मोहल्लत दी है। 108 को 22 अप्रैल तक मकान खाली करने के आदेश हैं।

ग्रामीणों ने मकान खाली करवाने के पीछे उन्हें प्लाॅट बांटने वाले सरपंच बचनाराम पर ही आरोप लगाया है। साथ ही प्रशासन से गुहार लगाई कि यदि कार्रवाई करनी है तो बिना कागजी कार्रवाई के प्लाॅटों पर कब्जा दिलवाने वाले सरपंच पर की जाए। उधर 20 साल लगातार सरपंच रहने वाले बचनाराम ने प्लाॅट बांटने और शिकायत की बात को मानते हुए इस कार्रवाई के पीछे मौजूदा सरपंच बताया। ग्रामीण सुभाष, कृष्णा, अंगूरी, शालिंद्र, रेखा देवी, शीशपाल, नफे सिंह, लीलू राम, कर्मा बलबीर, कृष्ण, जसबीर, सोनिया, कविता, गुरमेल, बीरबल, दर्शन, सुमन व बाजिंदर ने बताया कि उन्हें वर्ष 1983-84 में तत्कालीन सरपंच बचनाराम ने प्लाॅट बांटे थे। इन प्लाॅटों पर मकान बनाकर रहना शुरू कर दिया। इन मकानों में अब उनकी तीसरी पीढ़ी तैयार हो चुकी है।

साथ ही पंचायत ने बिजली, पानी, गली व अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई। इतना ही नहीं पंचायत को मकानों के चूल्हा टैक्स भी दे रहे हैं। जब पंचायत ने उन्हें प्लाॅट आवंटित किए तो कागजी कार्रवाई करना भी पंचायत का ही काम था। पंचायत के अनुमति के बिना वे कैसे पंचायती भूमि पर कब्जा कर सकते हैं। तत्कालीन सरपंच की कागजी कार्रवाई न होने का दंड प्रशासन उन्हें देने पर तुला है। वे इस बारे में बीडीपीओ से लेकर कमिश्नर तक पहुंच चुके हैं। प्रशासन की बात को सुनने के लिए तैयार नहीं है।मुखालय से 19 किलोमीटर दूर कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग पर स्थित उप-तहसील ढांड के गांव खेड़ी रायवाली में करीब 490 घर हैं। आबादी करीब 2050 हैं। इनमें लगभग 1500 वोटर हैं। गुर्जर बाहुल गांव में जोगी, नाई व वाल्मीकि समाज के लोग बसते हैं। 1951-52 की चकबंदी के समय बाद लाल-डोरा नहीं बढ़ा। वर्ष 1987 से अब तक अलग-अलग कई केस किए हुए हैं। इनमें गांव के 490 मकानों से 348 मकान यानी करीब 70 फीसदी पंचायत की भूमि में बसा होना पाया गया है।

कैथल|नोटिस के विरुद्ध रोष प्रकट करते खेड़ी राय वाली के लोग।


जरनैल सिंह, सरपंच खेड़ी रायवाली।


पूर्व सरपंच बचनाराम से सीधी बातचीत

सवाल : सरपंच रहते हुए प्लाट करते समय अनुमति क्यों नहीं ली।

जवाब : मैं 1972 से 91 तक लगातार सरपंच रहा। 1983-84 में गरीबों को प्लाट दिए। इसकी अनुमति के लिए तत्कालीन डीसी को लिखा। इस दौरान गांव के साधन-संपन्न लोगों ने भी पंचायती भूमि पर कब्जा कर लिया। अनुमति नहीं मिल सकी।

सवाल : फिर खुद शिकायत क्यों की?

जवाब : कब्जा करने वालों में आढ़ती, पूर्व सरपंच सहित साधन संपन्न लोग शामिल हैं। इसीलिए शिकायत की।

सवाल : ग्रामीणों को मकान खाली करने का नोटिस उन्हें शिकायत पर है क्या?

जवाब : ग्रामीणों को नोटिस आने की मुझे जानकारी नहीं है। जो मेरी नॉलेज में हैं, वे मौजूदा सरपंच की कार्रवाई का हिस्सा है। उसका मामला दबाया है।

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