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340 गांवों के लिए सिर्फ 175 बसें, 20 में एक भी नहीं

रोडवेज डिपो में बसों की तादाद घटने से जिला के विभिन्न रूटों की सेवाएं प्रभावित हैं। बसों की सेवाएं बढ़ाने की मांग...

Dainik Bhaskar

Feb 08, 2018, 02:25 AM IST
340 गांवों के लिए सिर्फ 175 बसें, 20 में एक भी नहीं
रोडवेज डिपो में बसों की तादाद घटने से जिला के विभिन्न रूटों की सेवाएं प्रभावित हैं। बसों की सेवाएं बढ़ाने की मांग लेकर ग्रामीण अधिकारियों तक पहुंचते हैं, लेकिन रोडवेज महकमे के अधिकारी उनकी डिमांड का समाधान नहीं करा पाते हैं। कई ग्रामीण रूट तो ऐसे हैं जिन पर मात्र एक बस फेरे लगाती है।

बता दें कि आबादी बढ़ने के साथ बसों की सेवाएं बढ़नी थी, लेकिन पिछले तीन सालों में लगातार रोडवेज बसों की तादाद घटी है। बसों की कमी से विभिन्न रूटों पर यात्रियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि हाल ही में डिपो की सिर्फ 115 बसें ऑन रोड हैं। 35 बसें सुबह दिल्ली और चंडीगढ़ के लिए निकल जाती हैं, तो गांवों के लिए करीब 80 बसों के ही फेरे बचते हैं। ऐसे में अधिकारियों के लिए भी 340 गांवों में रोडवेज बसें उपलब्ध करवाना कोई आसान डगर नहीं। उधर, वर्ष 2017 की अधर में लटकी निजी परिवहन परमिट पॉलिसी से रूटों पर बसों की तादाद नहीं बढ़ सकी और रूटों में बदलाव होने से ज्यादातर रूट खाली पड़े हैं। इससे पहले डिपो को निर्देश हुए थे कि लोकल रूटों के लिए कंडम बसों को रूट पर उतारा जाए ताकि यात्री परेशान न हों। हालांकि पिछले साल सरकार ने आमजन की सुविधा के लिए निजी परिवहन परमिट पॉलिसी लागू की थी।

इन गांव में नहीं जाती बसें

दारियाखेड़ा, बुखाराखेड़ा, पीरखेड़ा, कर्मगढ़, खुइयानेपालपुर, भागसर, खोखर, माखा, सुरतिया, दादू, पक्का, लहंगेवाला, सिंगपुरा, कमाल, जलालआना, मट व परमिट पॉलिसी के बाद बसों के रूट बदलने से कालांवाली से मैहनाखेड़ा वाया रानियां और कालांवाली से मुन्नावाली की कोई बस सर्विस नहीं है।

अव्यवस्था

निर्देश के बाद भी लोकल रूटों पर नहीं चल पाईं कंडम बसें, जीएम बोले- 10 बसें विभिन्न रूटों पर उतारी हैं

बसों की तादाद से यात्रियों की बढ़ रही है।

साल दर साल डिपो में घटी बसों की तादाद

वर्ष बसों की तादाद

2016 158

2017 140

2018 115

नोट- डिपो में रोडवेज बसों की तादाद घटने से विभिन्न रूटों पर यात्रियों की दिक्कतें बढ़ी हैं।

शाम 5 बजे बाद गांवों के लिए नहीं मिल पाती बस सेवा

आधुनिकता का दौर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन परिवहन व्यवस्था सुधरने की बजाय लगातार बिगड़ रही है। बड़े शहरों में जहां देर रात तक बसों की सुविधा मिलती है, वहीं गांवों में आज भी शाम 5 बजे के बाद बसें नहीं मिलती। सिरसा में स्थिति यह है कि शाम 5 बजे के बाद गांवों को जाने के लिए सिर्फ पांच से सात बसें ही हैं। तीन बसें ऐसी हैं, जो गांवों में यात्रियों को पहुंचाती हैं।

यात्रियों की डिमांड वाले रूटों पर बस सेवा बढ़ाने को हैं प्रयासरत


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