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लोगों को आकर्षित कर रहा ढींगरी मशरूम डायबिटीज और ब्लड प्रेशर में मदद करेगा

मशरूम की गुणवत्ता लोगों के सामने आने लगी है। इसमें ढींगरा किस्म का मशरूम लोगों को आकर्षित कर रहा है। एचएयू में...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:30 AM IST
मशरूम की गुणवत्ता लोगों के सामने आने लगी है। इसमें ढींगरा किस्म का मशरूम लोगों को आकर्षित कर रहा है। एचएयू में खरीफ के समय इस फसल काे किया जा रहा है। खास बात है कि ढींगरा मशरूम डायबिटीज को कंट्रोल करने से लेकर ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने का कार्य करता है। मशरूम में भरपूर मात्रा में न्यूट्रीशियन हैं इस कारण इसके लोगों के शरीर पर भी सकारात्मक प्रभाव हैं। एचएयू के मशरूम केन्द्र ने इसका प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। आम मशरूम की तरह ही 100 रुपए प्रति किलो इसकी कीमत तय की गई है। मशरूम को लेकर कार्य करने वाले एक्सपर्ट बताते हैं कि इस फसल को तैयार करने में सिर्फ 25 दिन का समय लगता है, लोग इसे घर या खेतों में आसानी से कर सकते हैं। वहीं एचएयू के टेक्सटाइड डिपार्टमेंट अत्याधुनिक तरीके से डिजाइनिंग की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। जिसमें कंप्यूटराइज्ड मशीन के माध्यम से हरियाणा की लोक कला को सुपीरियर फ्रैब्रिक पर उकेरा जा सकेगा।

मशरूम खाने के फायदे








15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता

ढींगरी मशरूम को तैयार करने में 25 दिन का समय तो लगता है साथ ही इसके लिए 15 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान होना चाहिए। इसको करने के लिए आपको विश्वविद्यालय में ही 80 रुपये प्रति किलो के भाव से बीज मिल जाएगा। तापमान को किसान मैंटेन रखेंगे तो कुल खपत के 50 प्रतिशत फसल इससे पैदा हो जाता है। बाजार में अच्छा भाव होने से किसानों के पास धन की उपलब्धता भी रहेगा। इसके लिए अधिक समय व जगह की आवश्यकता भी नहीं है। ढींगरा मशरूम को करने के लिए एग्रोवेस्ट का प्रयोग कर सकते हैं।

सैलिनिटी एक्सपर्ट एप लॉन्च

लवणग्रस्त मृदा के लिए मोबाइल एप पर किसान हिंदी में लेंगे जानकारी

रोहताश शर्मा | करनाल

भारत में लगभग 67.3 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र लवणता एवं क्षारीयता की समस्याओं से प्रभावित है। इस समस्या पर नियंत्रण और लवणीय-क्षारीय भूमियों के सतत प्रबंधन के लिए करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान ने अनेक उन्नत तकनीकियां विकसित की हैं । इसके बावजूद अभी तक लगभग 20 लाख हेक्टेयर लवणीय-क्षारीय भूमियों का सुधार ही हो पाया है जिसका एक कारण इन उपलब्ध तकनीकों को धीमा प्रचार-प्रसार है। हाल ही में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मोबाइल-आधारित एप विकसित कर उन्नत तकनीकियों के त्वरित प्रसार पर ध्यान केन्द्रित किया है। इसी दिशा में केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. प्रवेन्द्र श्योराण ने फार्मर फस्ट परियोजना के तहत ’सैलिनिटी एक्सपर्ट’ नामक एप तैयार किया है। स्वर्णजंयती किसान मेले में माननीय राधामोहन सिंह ने इस एप का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से कहा कि वे अपने मोबाइल फोन पर इस एप को डाउनलोड कर संस्थान की उन्नत तकनीकों एवं अन्य क्रियाकलापों की जानकारी प्राप्त कर इन बंजर पड़ी लवण प्रभावित भूमियों में सफल फसल प्रबंधन द्वारा अच्छा उत्पादन ले सकते हैं। संस्थान के निदेशक डा. पीसी शर्मा ने बताया कि ’सेलिनिटी एक्सपर्ट’ एप लवणता प्रबंधन तकनीकियों के त्वरित प्रसार के लिए एक सस्ता और सरल उपाय है।

ऐसे करें एप को डाउनलोड

डाॅ. श्योराण ने बताया कि इस एप को डाउनलोड करने के लिए एंड्रोइड फोन में गूगल प्ले स्टोर पर जाकर ’सैलिनिटी एक्सपर्ट’ टाइप करें। इस एप में लिखित जानकारी हिन्दी भाषा में उपलब्ध है जिससे किसान फ्री में आवश्यकतानुसार जानकारी ले सकतें हैं।

एप में मिलेगी यह जानकारी

केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. प्रवेन्द्र श्योराण ने बताया कि इसमें मिट्टी एवं सिंचाई जल के नमूने लेने की उपयुक्त जानकारी मिलेगी।