भारत माता के जयकारों के बीच हुआ शहीद का अंतिम संस्कार, पिता का दर्द- पाक को सबक सिखाना होगा, पति बोली- बड़ा घाव दे गए, कैसे भुलाऊंगी / भारत माता के जयकारों के बीच हुआ शहीद का अंतिम संस्कार, पिता का दर्द- पाक को सबक सिखाना होगा, पति बोली- बड़ा घाव दे गए, कैसे भुलाऊंगी

पति का शब देख पत्नी बोली- बड़ा घाव दे गए कैसे भुलाऊंगी

Bhaskar News

Feb 14, 2019, 01:01 PM IST
haryana Karnal News  saheed baljeet singh funeral

करनाल (हरियाण)। शहीद हवलदार बलजीत सिंह का बुधवार को उनके पैतृक गांव डिंगर माजरा में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। तीन साल के बेटे अरनव ने पिता को मुखाग्नि दी। शहीद के पिता किशनचंद ने कहा कि ऐसे बेटा भगवान सबको दे। बेटे बलजीत का इतना ही साथ था। उन्हें बेटे की बहादुरी पर गर्व है। वहीं, पति का शव देख पत्नी ने कहा- आप तो बड़ा घाव दे गए, कैसे भुलाऊंगी।


सैकड़ों युवा शहीद के पार्थिव शरीर का घरौंडा पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ हाथों में तिरंगा उठाकर भारत माता के नारे लगाते हुए शहीद बलजीत सिंह के पार्थिव शरीर के काफिले की अगुवाई कर पैतृक गांव डिंगर माजरा पहुंचे। गांव में शहीद का पार्थिव शरीर शहीद के घर रखा, जहां पर ग्रामीणों व रिश्तेदारों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद घर से श्मशान घाट तक हजारों की भीड़ ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। सेना व पुलिस के जवानों ने हवाई फायर कर पार्थिव शरीर को सलामी दी, उस समय भारत माता की जय, शहीद बलजीत सिंह अमर रहे के नारे गूंजते रहे। पाकिस्तान मुर्दाबाद के भी नारे लगाए गए।


बेटे का इतना ही साथ था : पिता किशनचंद


पिता किशनचंद ने कहा कि बेटे बलजीत का इतना ही साथ था। बेटे की बहादुरी पर गर्व है। भगवान सबके घर ऐसा बेटा दे। सरकार को पाकिस्तान को भी सबक सिखाना चाहिए। मेरा बेटा देश पर कुर्बान हो गया। कब तक पाकिस्तान के कारण देश के बेटे शहीद होते रहेंगे। पाकिस्तान को खत्म करना जरूरी है। उसकी भाषा में जबाव देना चाहिए।


1962 में पिता भी चीन से बदला लेने के लिए सेना जॉइन करना चाहते थे


चाचा बलबीर लाठर ने बताया कि जिस समय चाइना से युद्ध चल रहा था तो शहीद के पिता किशनचंद सेना में जाने के लिए तैयार थे। आगे से पहले तो बुला लिया गया, लेकिन युद्ध बंद होने के चलते बाद में अधिकारियों ने मना कर दिया था।


17 वर्षों की सेवा में अपना फर्ज कभी नहीं भूला


शहीद बलजीत सिंह 2002 में भर्ती हुआ था व उसका जज्बा देश सेवा को समर्पित था। परिवार के सदस्यों के साथ भी वह हमेशा देश सेवा की बातें करता था। ग्रामीणों व परिवार ने सरकार से शहीद के परिवार से एक सरकारी नौकरी व गांव के स्कूल को अपग्रेड कर शहीद के नाम से करने की मांग की।


मेजर बोले- बहादुरी से लड़ा आपका बेटा


शहीद बलजीत सिंह 50 राष्ट्रीय राइफल में हवलदार के पद पर तैनात थे। सेना के मेजर जनरल ने बताया कि सोमवार रात 2:30 बजे आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलते ही रत्नीपुरा इलाके में सर्च अभियान चलाया गया। आतंकी एक घर और स्कूल में छिपे थे। आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें शहीद बलजीत सिंह ने एक आतंकी को ढेर कर दिया, तभी सामने से आतंकियों की गोली ने बलजीत सिंह समेत 2 जवानों को घायल कर दिया, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया और वहां उनको मृत घोषित कर दिया।


पार्थिव शरीर देख विलखने लगे बच्चे और पत्नी


जिस समय बच्चों को शहीद के पार्थिव शरीर के पास लाया गया दोनों पापा को देखकर चिल्लाने लगे साथ में पत्नी भी। साथ खड़े लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। तीन साल के मासूम अरनव को स्तब्ध होकर देख रहे थे कि यह क्या हो गया।

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