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जीवो मंगलम ने शिकारियों से 400 काले तीतरों को बचाया, बाद में मेनका गांधी की टीम को सौंपा

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:56 AM IST

Karnal News - भगवान महावीर स्वामी का अहिंसा परमो धर्म: का उपदेश और जियो और जीने दो का नारा सेक्टर-6 में जीवो मंगलम संस्थान में...

Karnal News - haryana news jivo mangalam rescued 400 black pheres from predators later handed over to maneka gandhi39s team
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भगवान महावीर स्वामी का अहिंसा परमो धर्म: का उपदेश और जियो और जीने दो का नारा सेक्टर-6 में जीवो मंगलम संस्थान में सार्थक हो रहा है। जहां पर बीमार व घायल पक्षियों का न केवल इलाज किया जाता है, बल्कि उनको हर दिन दाना-पानी भी दिया जाता है। जीवो मंगलम से दया व करुणा की धारा निरंतर प्रवाह हो रही है। पिछले 18 सालों में 20 हजार से अधिक पक्षियों का यहां से इलाज हाेने के बाद फिर से आसमान में उड़ान भर रहे हैं। दानवीर कर्ण की धरा पर प्रदेश में यह एकमात्र ऐसा धार्मिक संस्थान हैं जहां पर पक्षियों के लिए नि:शुल्क अस्पताल संचालित हो रहा है। यहां पर हर प्रजाति के घायल व बीमार पक्षियों का इलाज किया जाता है। डॉक्टरों की टीम प्रतिदिन घायल पक्षियों का इलाज कर करती है। सेक्टर-6 में बना जीवाें मंगलम संस्थान घायल व बीमार पक्षियों के इलाज व सेवा कार्यों के लिए सम्मान से जाना जाता है। इस संस्थान में गुरुदेव साध्वी संतोष कुमारी महाराज की प्रेरणा से साध्वी अर्पिता, साध्वी अर्चिता, साध्वी दालिमा व साध्वी परिधि, निरीह पक्षियों की सेवा में दिन रात तल्लीन हैं।

संस्थान से निरंतर हो रहा दया व करुणा का प्रवाह
शिकारियों को पक्षी न मारने की शपथ दिलाई

वर्ष 2004 में एक ट्रक में शिकारी 400-500 तीतरों को भरकर ले जा रहे थे, जिसे लोगों ने करनाल में पकड़ा था। उन तीतरों को पांच-छह दिन जीवो मंगलम में रखा गया। यहां उन्हें दाना-पानी और इलाज दिया गया। उसके बाद वे मेनका गांधी से मिले और फिर उनकी टीम उन्हें ले गई थी। शिकारियों को दोबारा पक्षी न मारने के लिए भी शपथ दिलाई।

सबसे ज्यादा आते हैं बीमार कबूतर

जीवो मंगलम में यूं तो कौए, तोते, छाेटी चिड़िया, मौर इत्यादि सभी तरह के घायल पक्षियों को इलाज के लिए लोगों द्वारा लाया जाता है, लेकिन यहां सबसे ज्यादा बीमार कबूतर आते हैं। कबूतरों को गर्मी में डी-हाईड्रेशन से लकवा होता है, जो चक्कर खाकर गिर जाते हैं। लोग इलाज के लिए उन्हें यहां छाेड़ देते हैं।

चोंच पकड़कर खिलाते हैं दाना

जीवो मंगल संस्थान में बीमार पक्षियों को चोंच पकड़कर दाना खिलाया जाता है। इसी तरह से उनको पानी भी पिलाया जाता है। इनमें बहुत से पक्षी पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद अपनी दुनिया में जाने के लिए आजाद किए जाते हैं।

अहिंसा परमो धर्म:

सुबह तेज हवा के कारण वृक्ष से गिरे कबूतर व गुग्गी का इलाज करतीं साध्वी।

दया देखिए : सांप काे भी दिया गया इलाज

सांप को देखते ही हर व्यक्ति मारने दौड़ता है, लेकिन जीवो मंगल में दया व करुणा को देखिए कि घायल सांप को भी इलाज दिया गया। पिछले साल एक व्यक्ति एक घायल सांप को लेकर आया, जिसको जीवाें ने इलाज देकर वापस उसी व्यक्ति को दे दिया।

उल्लू व सफेद चूहों का भी किया जाता है उपचार

जीवो मंगलम में भगवान महावीर की शिक्षाओं को सिरोधार्य करते दयाभाव से घायल पक्षियों को इलाज किया जाता है। साध्वियों की देखरेख में संचालित इस अस्पताल में उल्लू और सफेद चूहों को भी दयापूर्वक इलाज दिया गया है।

हर साल 1000 से ज्यादा पक्षी लाए जाते हैं : साध्वी अर्पिता ने कहा कि जीवो मंगलम में हर साल 1000 से ज्यादा घायल व बीमार पक्षियों को लोगों द्वारा लाया जाता है। लोगों में जागरूकता आई है। लोग अगर कहीं घायल पक्षियों को पड़ा हुआ देखते हैं तो जीवो मंगलम में पहुंचा देते हैं। यह भी एक दया है। अहिंसा, दया व सत्य का पालन करने वाला ही जैनी है।

पतंग की डोर पक्षियों के लिए प्राण घातक

साध्वियों के अनुसार पतंग की डोर पक्षियों के लिए प्राणघातक है। बसंत पंचमी से पक्षी घायल होना शुरू हो जाते हैं, जो बाद में भी पेड़-पौधों में फंसी डोर के कारण पक्षी घायल होते हैं। मनुष्य को पक्षियों की सुरक्षा के लिए ऐसी डोर का प्रयोग नहीं करना चाहिए तो पक्षियों के लिए घातक बने।

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